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समाजवाद एवं साम्यवाद ( लघु उत्तरीय प्रश्न )

1. समाजवादी दर्शन क्या है ?

उत्तर ⇒ समाजवाद उत्पादन में मुख्यतः निजी स्वामित्व की जगह सामूहिक स्वामित्व या धन के समान वितरण पर जोर देता है। समाजवादी, शोषण उन्मुक्त समाज की स्थापना चाहते हैं। समाजवादी व्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसके अंतर्गत उत्पादन के सभी साधनों, कारखानों तथा विपणन में सरकार का एकाधिकार हो। समाजवादी व्यवस्था में उत्पादन निजी लाभ के लिए न होकर सारे समाज के लिए होता है।

2. समाजवाद क्या है ?

उत्तर ⇒ समाजवाद एक ऐसी विचारधारा है जिसने आधुनिक काल में समाज को एक नया आयाम दिया। समाजवाद उत्पादन में मुख्यतः निजी स्वामित्व की जगह सामूहिक स्वामित्व या धन के समान वितरण पर जोर देता है। यह एक शोषण उन्मुक्त समाज की स्थापना चाहता है।

3. साम्यवाद एक नयी आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी। कैसे ?

उत्तर ⇒ रूस में क्रांति के बाद नई सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था की स्थापना हुई। सामाजिक असमानता समाप्त कर दी गयी। वर्गविहीन समाज का निर्माण कर रूसी समाज का परंपरागत स्वरूप बदल दिया गया। पूँजीपति और जमींदार वर्ग का उन्मूलन कर दिया गया। समाज में एक ही वर्ग रहा, जो साम्यवादी नागरिकों का था। काम के अधिकार को संवैधानिक अधिकार बना दिया गया। व्यक्तिगत संपत्ति समाप्त कर पूँजीपतियों का वर्चस्व समाप्त कर दिया गया। देश की सारी संपत्ति का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। इस प्रकार, एक वर्गविहीन औरशोषणमुक्त सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था की स्थापना हुई। इस प्रकार हम कह सकते हैं की रूसी क्रांति के बाद साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी।

4. रूसी क्रांति के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख करें।

उत्तर ⇒ रूसी क्रांति के दो महत्त्वपूर्ण कारण थे – सामाजिक और आर्थिक। रूसी समाज के बहुसंख्यक किसान वर्ग की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। मजदूर तथा श्रमिक भी शोषण के शिकार थे। अत: किसान मजदूर जारशाही के विरोधी बन गए। रूस की आर्थिक स्थिति भी दुर्बल थी। कृषि तथा उद्योग का समुचित विकास नहीं होने तथा युद्धों से रूस की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई। बेरोजगारी और गरीबी बढ़ गई। इससे क्रांतिकारी भावना को बल मिला।

5. रूस की संसद को क्या कहा जाता था ?

उत्तर ⇒ रूस की संसद को ड्यूमा कहा जाता था।

6. रूस में कृषि दासता की प्रथा किस वर्ष समाप्त हुई?

उत्तर ⇒ रूस में कृषि दासता की समाप्ति जार एलेक्जेंडर द्वितीय के द्वारा 1861 ई० में हुई।

7. ‘रूस की क्रांति’ ने पूरे विश्व को प्रभावित किया। किन्हीं दो उदाहरणों द्वारा स्पष्ट करें।

उत्तर ⇒  रूस की क्रांति ने पूरे विश्व को प्रभावित किया। इसके उदाहरण इस प्रकार हैं –

(i) इस क्रांति के पश्चात श्रमिक या सर्वहारा वर्ग की सत्ता रूस में स्थापित हो गई तथा इससे अन्य क्षेत्रों में भी आंदोलन को प्रोत्साहन मिला।

(ii) रूसी क्रांति के बाद विश्व, विचारधारा के स्तर पर दो खेमों में विभक्त हो गया – पूर्वी यूरोप और पश्चिमी यूरोप।

(iii) द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात पूँजीवादी विश्व तथा सोवियत रूस के बीच शीतयुद्ध की शुरुआत हुई और आगामी चार दशकों तक दोनों खेमों के बीच हथियारों की होड़ जारी रही।


8. रूस की क्रांति किसके नेतृत्व में हुई थी ?

उत्तर ⇒ 1917 ई० की रूसी क्राति बोल्शेविक दल के नेता लेनिन के नेतृत्व में हुई थी ।

9. प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय ने क्रांति देता किया। कैसे ?

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध में रूस मित्र राष्ट्रों की ओर से शामिल हुआ था जार का मानना था कि युद्ध के अवसर पर जनता सरकार का समर्थन करेगी में आंतरिक विद्रोह कमजोर पड़ जाएगा। परंतु जार को यह इच्छा परी नहीं हो सकी। विश्वयुद्ध में रूस की लगातार हार होती गई। सैनिकों के पास न तो अब अस्त्र-शस्त्र थे और न ही पर्याप्त रसद एवं वस्त्र। रूसी सेना की कमान स्वयं जा ने संभाल रखी थी। पराजय से उसकी प्रतिष्ठा को गहरी ठेस लगी। इस स्थिति से रूसी जनता और अधिक क्रुद्ध हो गयी तथा पूरी तरह से जारशाही को समाप्त के लिए कटिबद्ध हो गई। वस्तुतः प्रथम विश्वयुद्ध में पराजय रूस में क्रांति हेतु मार्ग प्रशस्त किया।

10. रूसीकरण की नीति क्रांति हेतु कहाँ तक उत्तरदायी थी ?

उत्तर ⇒ रूस में विभिन्न प्रजातियों के निवासी थे। इनमें स्लावों की संख्या सबसे अधिक थी। इनके अतिरिक्त फिन, पोल, जर्मन, यहूदी इत्यादि भी थे। ये भिन्न-भिन्न भाषा तथा रीति-रिवाज को मानते थे। इसलिए रूसी सरकार ने देश की एकता के लिए रूसीकरण की नीति अपनाई। जार की नीति थी—”एक जार, एक चर्च और एक रूस।” परंतु रूस का अल्पसंख्यक वर्ग सरकार की इस नीति से व्यग्र हो गया। जार ने देश के सभी लोगों पर रूसी भाषा, शिक्षा और संस्कृति लादने का प्रयास किया। 1863 ई० में इस नीति के विरुद्ध पोलों ने विद्रोह कर दिया जिसे दबा दिया गया। इस प्रकार रूसी राजतंत्र के प्रति उनका आक्रोश बढ़ता गया।

11. निहिलिज्म से आप क्या समझते हैं ? रूस पर इसका क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर ⇒ रूसी नागरिकों का एक वर्ग ऐसा था जो चाहता था कि रूस में सुधार आन्दोलन जार के द्वारा किए जाएँ। जार एलेक्जेंडर द्वितीय ने कई सुधार कार्यक्रम भी चलाए, परंतु इससे सुधारवादी संतुष्ट नहीं हुए। इनमें से कुछ ने निहिलिस्ट आंदोलन आरंभ किए। ये निहिलिस्ट के नाम से जाने जाते थे। ये स्थापित व्यवस्था को आतंक का सहारा लेकर समाप्त करना चाहते थे। 1881 में जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या निहिलिस्टों ने कर दी। इन निहिलिस्टों के विचारों से प्रभावित होकर क्रांतिकारी जारशाही के विरुद्ध एकजूट होने लगे।

12. बौद्धिक जागरण ने रूसी क्रांति को किस प्रकार प्रभावित किया ?

उत्तर ⇒ 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में रूस में बौद्धिक जागरण हुआ, जिसने लोगो का निरंकुश राजतंत्र के विरुद्ध बगावत करने की प्रेरणा दी। अनेक विख्यात लेखकों और बुद्धिजीवियों – लियो टॉलस्टाय, ईवान तुर्गनेव, फ्योदोर दोस्तोवस्की, मैक्सिम गोर्की ने अपनी रचनाओं द्वारा सामाजिक अन्याय एवं भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था का विरोध कर एक नए प्रगतिशील समाज के निर्माण का आह्वान किया। रूसी लोग विशेषतः किसान और मजदूर कार्ल मार्क्स के दर्शन से गहरे रूप से प्रभावित हुए। वे शोषण और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करने को तत्पर हो गए।

13. नई आर्थिक नीति मार्क्सवादी सिद्धान्तों के साथ कैसे समझौता थी ?

उत्तर ⇒– साम्यवादी व्यवस्था में व्यक्तिगत सम्पत्ति की अवधारणा नहीं थी। परंतु लेनिन ने तत्कालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किसानों को जमीन का स्वामित्व दिया। व्यक्तिगत स्वामित्व में उद्योग चलाने का भी अधिकार नई आर्थिक नीति में दिया गया। स्पष्टतः यह नीति मार्क्सवादी सिद्धांतों के साथ समझौता थी परंतु इससे सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ।

14. स्टालिन का परिचय दीजिए।

उत्तर ⇒ लेनिन के बाद सत्ता स्टालिन के हाथों में आई। सोवियत संघ ने विकास के लिए उसने तीन पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया। कृषि, शिक्षा में सुधार किया तथा श्रमिकों की स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास किया। साथ ही उसने ऐसी नीति बनाई जिससे सर्वाधिकारी शासन की स्थापना हुई।

15. 1917 की बोल्शेविक क्रांति एक सर्वहारा क्रांति थी। स्पष्ट करें।

उत्तर ⇒ 1917 की बोल्शेविक क्रांति के पश्चात रूस ने सर्वहारा वर्ग को अनेक सुविधाएँ प्राप्त हुई। किसानों और मजदूरों को मतदान के अतिरिक्त अन्य राजनीतिक अधिकार मिले। व्यक्तिगत संपत्ति की समाप्ति तथा उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया गया, जिससे एक वर्गहीन समाज का निर्माण तथा सामाजिक समानता की स्थापना हुई। इन परिवर्तनों से रूस में किसानों तथा मजदूरों का सम्मान बढ़ा। इसलिए 1917 की वोल्शेविक क्रांति को सर्वहारा क्रांति कहा जाता है।

16. सर्वहारा वर्ग किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ सर्वहारा वर्ग समाज का वैसा वर्ग है जिसमें किसान, मजदूर एवं आम गरीब लोग शामिल होते हैं। मार्क्स के अनुसार सर्वहारा वर्ग मजदुरों तथा श्रमिकों का वर्ग था जो सुविधाविहिन वर्ग था जिसे कोई अधिकार प्राप्त नहीं था। यह पुँजीपतियों के द्वारा शोषित तथा उपेक्षित वर्ग था।

17. शीतयुद्ध से आपका क्या अभिप्राय है ?

उत्तर ⇒ शीतयुद्ध प्रत्यक्ष युद्ध न होकर वाकद्वन्द्व द्वारा एक – दूसरे राष्ट्र को नीचा दिखाने का वातावरण है। द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात पूँजीवादी राष्ट्रों और रूस के बीच इसी प्रकार का शीतयुद्ध चलता रहा।

18. रासपुटिन कौन था ?

उत्तर ⇒ रासपुटिन जार निकोलस II का गुरु था जो एक भ्रष्ट, बदनाम और रहस्यमय पादरी था।

19. खूनी रविवार क्या है ?

उत्तर ⇒ रूस में 9 जनवरी, 1905 को लोगों का समूह ‘रोटी दो’ के नारे के साथ सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए सेंट पीट्सवर्ग स्थित महल की ओर जा रहा था, परंतु जार की सेना इन निहत्थे लोगों पर गोलियाँ बरसाई जिसमें हजारों लोग मारे गए। इसलिए इस दिन को रूस में खूनी रविवार (लाल रविवार) के नाम से जाना जाता है।

20. रॉबर्ट ओवेन का संक्षिप्त परिचय दें।

उत्तर ⇒ इंगलैंड में समाजवाद का प्रवर्तक रॉबर्ट ओवेन को माना जाता है। इंगलैंड में औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप श्रमिकों के शोषण को रोकने हेतु ओवेन ने एक आदर्श समाज की स्थापना का प्रयास किया। उसने स्कॉटलैंड के न्यूलूनार्क नामक स्थान पर एक आदर्श कारखाना और मजदूरों के आवास की व्यवस्था की। इसमें श्रमिकों को अच्छा भोजन, आवास और उचित मजदूरी देने की व्यवस्था की गयी।

21. कार्ल मार्क्स के विषय में आप क्या जानते हैं ?

उत्तर ⇒ कार्ल मार्क्स का जन्म जर्मनी के राइन प्रांत के ट्रियर नगर में एक यहूदी परिवार में हुआ था। मार्क्स पर रूसो, मांटेस्क्यू एवं हीगले की विचारधारा का गहरा प्रभाव था। मार्क्स और एंगेल्स ने मिलकर 1848 में कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो अथवा साम्यवादी घोषणा-पत्र प्रकाशित किया। मार्क्स ने पूँजीवाद की घोर भर्त्सना की और श्रमिकों के हक की बात उठायी। उसने ‘दुनिया के मजदूरों एक हों’ का नारा दिया। मार्क्स ने अपनी विख्यात पुस्तक दास केपिटल का प्रकाशन 1867 में किया जिसे “समाजवादियों की बाइबिल” कहा जाता है।

22. रूस में प्रति – क्रांति क्यों हुई ? बोल्शेविक सरकार ने इसका सामना कैसे किया ?

उत्तर ⇒ बोल्शेविक क्रांति की नीतियों से वैसे लोग व्यग्र हो गए जिनकी संपत्ति और अधिकारों को नई सरकार ने छीन लिया था। अतः सामंत, पादरी, पूँजीपति, नौकरशाह सरकार के विरोधी बन गए। वे सरकार का तख्ता पलटने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें विदेशी सहायता भी प्राप्त थी। लेनिन ने प्रति क्रांतिकारियों का कठोरता पूर्वक दमन करने का निश्चय किया। इसके लिए ‘चेका’ नामक विशेष पुलिस दस्ता का गठन किया गया। इसने निर्ममतापूर्वक हजारों षडयंत्रकारियों को मौत के घाट उतार दिया। चेका के लाल आतंक ने षडयंत्रकारियों की कमर तोड़ दी।

23. 1917 ई० की क्रांति के समय रूस में किस राजवंश का शासन था ? इस शासन का स्वरूप क्या था ?

उत्तर ⇒ 1917 ई० की क्रांति के पूर्व रूस में रोमोनोव वंश का शासन था। इस वंश के शासन का स्वरूप स्वेच्छाचारी राजतंत्र था। रूस का सम्राट जार अपने आपको ईश्वर का प्रतिनिधि समझता था। वह सर्वशक्तिशाली था तथा राज्य की सारी शक्तियाँ उसी के हाथों में केंद्रित थी। राज्य के अतिरिक्त वह रूसी चर्च का भी प्रधान था। प्रशा जार और उसके अधिकारियों से त्रस्त था।

24. मेन्शेविकों और बोल्शेविक के विषय में आप क्या जानते हैं ?

उत्तर ⇒ रूस की बोल्शेविक क्रांति मेन्शेविकों (अल्पमतवाले साम्यवादियों) और वोल्शेविकों (बहुमतवाले साम्यवादियों) के बीच सत्ता संघर्ष का परिणाम थी। रूस में राजतंत्र की समाप्ति के बाद सत्ता मेन्शेविक दल के नेता करेन्सकी के हाथों में आई, परंतु उसकी सरकार अलोकप्रिय थी। मेन्शेविक संवैधानिक रूप से देश में राजनीतिक परिवर्तन चाहते थे तथा मध्यमवर्गीय क्रांति के समर्थक थे। परंतु, बोल्शेविक क्रांति के द्वारा परिवर्तन लाना चाहते थे जिसमें मजदूरों की विशेष भूमिका हो। बोल्शेविक दल के नेता लेनिन ने ट्रॉटस्की की सहायता से केरेन्सी की सरकार का तख्ता पलट दिया।

25. क्रांति से पूर्व रूसी किसानों की स्थिति कैसी थी ?

उत्तर ⇒ रूस में जनसंख्या का बहुसंख्यक भाग कृषक ही थे परंतु उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी। कृषि दासता समाप्त कर दी गई थी परंतु किसानों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ था। उनके पास पूँजी का अभाव था तथा करों के बोझ से वे दबे हुए थे।

26. स्वप्नदर्शी (यूटोपियन) समाजवादियों के विषय में आप क्या जानते हैं ?

उत्तर ⇒ स्वप्नदर्शी (यूटोपियन) आरंभिक समाजवादी चिन्तक थे जिन्होंने पूँजी और श्रम के बीच सम्बन्धों की समस्या का निराकरण करने का प्रयास किया। उनकी दृष्टि आदर्शवादी थी। वे उच्च और अव्यावहारिक आदर्श से प्रभावित होकर ‘वर्ग-संघर्ष’ की नहीं बल्कि ‘वर्ग समन्वय’ की बात करते थे। स्वप्नदर्शी समाजवादियों में सेंट साइमन, चार्ल्स फूरिए, लुई ब्लाँ तथा रॉबर्ट ओवेन के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

27. 1881 ई० में जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या किसने की ?

उत्तर ⇒ रूस के शासक जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या 1881 ई० में निहिलिस्टो ने कर दी थी।

28. कौमिण्टर्न की स्थापना क्यों की गई ? इसका क्या महत्त्व था ?

उत्तर ⇒ लेनिन का एक महत्त्वपूर्ण कार्य था 1919 ई० में मास्को में थर्ड इंटरनेशनल की स्थापना करना। मार्क्सवाद का प्रचार करने एवं विश्व के सभी मजदूरों को संगठित करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों के साम्यवादी दलों के प्रतिनिधि मास्को में एकत्रित हुए। वहीं पर सभी देशों की साम्यवादी पार्टियों का एक संघ बनाया गया जो कौमिण्टर्न कहलाया। इसका मुख्य कार्य विश्व में क्रांति का प्रचार करना एवं साम्यवादियों की सहायता करना था। कौमिण्टर्न का नेतृत्व रूस के साम्यवादी दल के पास रहा। लेनिन के इस कार्य से पूँजीवादी देशों में बेचैनी फैल गयी। रूस से मधुर संबंध बनाने को वे बाध्य हो गए। इंगलैंड ने 1921 में रूस से व्यापारिक संधि कर ली। 1924 तक इटली, जर्मनी, इंगलैंड ने रूस की बोल्शेविक सरकार को मान्यता प्रदान कर दी।

1 हो – ची – मिन्ह के संबंध में लिखें।

उत्तर ⇒ हो-ची-मिन्ह साम्यवाद से प्रभावित था। उसने 1925 ई० में ‘वियतनामी क्रांतिकारी दल’ का गठन किया एवं फ्रांसीसी साम्राज्यवाद से लड़ने के लिए कार्यकर्ताओं के सैनिक प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की। 1930 ई० में राष्टवादी गटों को एकत्रित कर वियतनाम कांग सान देंग अर्थात् वियतनामी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की। विश्वव्यापी आर्थिक मंदी एवं फ्रांसीसी सरकार की क्रूरता के कारण हो-ची-मिन्ह ने राष्ट्रवादी आंदोलन को तीव्र किया।

2. हो-ची-मिन्ह मार्ग क्या है ? बताएँ।

उत्तर – हो – ची – मिन्ह हनोई से चलकर लाओस-कम्बोडिया के सीमा क्षेत्र से गुजरता हुआ दक्षिणी वियतनाम तक जाता था। इसमें सैकड़ों कच्ची – पक्की सड़कें निकलकर पूरे वियतनाम से जुड़ी थी। यह वियतनामियों का रसद सप्लाई मार्ग था। यह मार्ग काफी मजबूत था। अमेरिका सैकड़ों बार इस पर बमबारी कर चुका था, परन्तु वियतकांग एवं उनके समर्थित लोग तुरंत उसकी मरम्मत कर लेते थे। चूँकि हो – ची – मिन्ह मार्ग वियतकांग की जीवन-रेखा थी, अत: अमेरिका इस पर नियंत्रण करना चाहता था। इसी क्रम में उसने लाओस एवं कम्बोडिया पर आक्रमण भी किया। किंतु तीन तरफा संघर्ष में फँसकर उसे वापस होना पड़ा था।

3. हिंद – चीन का अर्थ क्या है ?

उत्तर ⇒ एशिया के हिंद – चीन देशों से अभिप्राय तत्कालीन समय में लगभग 3 लाख (2.80 लाख) वर्ग किमी० में फैले उस प्रायद्वीपीय क्षेत्र से है जिसमें आज के वियतनाम, लाओस और कंबोडिया के क्षेत्र आते हैं। इनकी उत्तरी सीमा म्यांमार एवं चीन को छूती है तो दक्षिण में चीन सागर है और पश्चिम में म्यांमार के क्षेत्र पड़ते हैं।

4. अमेरिका हिन्द – चीन में कैसे दाखिल हुआ, चर्चा करें

उत्तर ⇒ अमेरिका शुरू में फ्रांस का सहयोग कर रहा था लेकिन साम्यवादियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने हेतु अमेरिका हिन्द – चीन में दाखिल हुआ। दूसरी तरफ कंबोडिया का शासक सिंहानुक अमेरिका से संबंध विच्छेद कर चीन की ओर झुका जिससे अमेरिका को कंबोडिया में हस्तक्षेप करने का अवसर मिला। साथ ही सिंहानुक साम्यवादी रूस और पूर्वी जर्मनी से संबंध बढ़ाना आरंभ कर दिया। अमेरिका कंबोडिया या पूरे हिन्द चीन में साम्यवादी प्रभाव को बढ़ाना नहीं चाहता था इसलिए उसने हिन्द – चीन में हस्तक्षेप किया।

5. रासायनिक हथियारों नापाम एवं एजेन्ट ऑरेंज का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ अमेरिका ने वियतनाम पर आक्रमण में खतरनाक हथियारों, टैंकों एवं बमवर्षक विमानों के व्यापक प्रयोग के साथ-साथ खतरनाक रासायनिक हथियारों का भी प्रयोग किया। ऐसे ही कुछ रासायनिक हथियार थे—नापाम बम, एजेन्ट ऑरेन्ज। नापाम बम में नापाम एक कार्बनिक यौगिक होता है जो अग्नि बमों में गैसोलिन के साथ मिलकर एक ऐसा मिश्रण तैयार करता है जो त्वचा से चिपक जाता और जलता रहता है।
एजेंट ऑरेंज एक ऐसा जहर था जिससे पेड़ों की पत्तियाँ झुलस जाती थी तथा पेड़ मर जाते थे। जंगलों को खत्म करने में इसका प्रयोग किया जाता था।

6. होआ – होआ आंदोलन की चर्चा करें।

उत्तर ⇒ होआ – होआ वियतनाम के एकीकरण हेतु बौद्ध धर्मावलंबियों का एक धार्मिक क्रातिकारी आंदोलन था जो 1939 में शुरू हुआ था। इसके नेता हुइन्ह-फूसो । था। इस आंदोलन में क्रांतिकारी उग्रवादी घटनाओं को भी अंजाम देते थे, जिसमें आत्मदाह तक भी शामिल होता था।

7. वियतनाम में स्कॉलर्स रिवोल्ट क्यों हुआ ?

उत्तर ⇒ वियतनाम में ईसाई मिशनरियों के बढ़ते प्रभाव को समाप्त करने के लिए 1868 में ईसाईयत के विरुद्ध एक सशक्त आंदोलन हुआ। यह आंदोलन स्कालर्स रिवोल्ट अथवा विद्वानों के विद्रोह के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन को राजदरबार के अधिकारियों ने चलाया। वे कैथोलिक (ईसाई) धर्म के प्रचार और वियतनाम पर फ्रांसीसी आधिपत्य के विरोधी थे। इस आंदोलन का जोर सबसे अधिक न्गूएन और हातिएन प्रांतों में था जहाँ हजारों ईसाइयों को मार डाला गया।

8. जेनेवा – समझौता कब और किसके बीच हुआ ?

उत्तर ⇒ 1954 में जेनेवा समझौता फ्रांस और वियतनाम के बीच अमेरिकी हस्तक्षेप के कारण हुआ था।

9. पाथेट लाओ की स्थापना क्यों की गई ?

उत्तर ⇒ पाथेट लाओ एक सैन्य संगठन था। इसकी स्थापना का कारण यह था कि वह इसकी सहायता से लाओस में साम्यवादी व्यवस्था स्थापित करना चाहता था जिसकी स्थापना सुफन्न बोंग ने की थी।

10. एकतरफा अनुबंध व्यवस्था क्या थी ?

उत्तर ⇒ वियतनामी मजदूरों से बागानों में ‘एकतरफा अनुबंध व्यवस्था’ के अंतर्गत काम करवाया जाता था। इस व्यवस्था में मजदूरों को एकरारनामा के अंतर्गत जो बागान मालिकों और मजदूरों के बीच होता था, काम करना पड़ता था। इस व्यवस्था में मजदूरों को कोई अधिकार नहीं था, जबकि मालिक को असीमित अधिकार प्राप्त होते थे।

11. माई – ली – गाँव हत्याकांड का परिचय दें।

उत्तर ⇒ माई – ली दक्षिणी वियतनाम का एक गाँव था जहाँ के लोगों का वियतकांग समर्थक मानकर अमेरिकी सेना ने पूरे गाँव को घेरकर पुरुषों को मार डाला। औरतों तथा बच्चियों को बंधक बनाकर कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया फिर उन्हें मारकर पूरे गाँव में आग लगा दिया गया। अमेरिकी सेना की इस बर्बरतापूर्वक कार्रवाई की संपूर्ण विश्व में आलोचना हुई थी।


12. फ्रांसीसियों ने मेकांग डेल्टा में नहरें क्यों बनवाई ? इसका क्या परिणाम हुआ ?

उत्तर ⇒ फ्रांसीसियों ने कृषि के विस्तार के लिए मेकांग डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा के लिए नहरें बनवाई। सिंचाई की समुचित व्यवस्था उपलब्ध होने से धान की खेती और उत्पादन में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप 1931 तक वियतनाम विश्व का तीसरा चावल निर्यातक देश बन गया।

13. जेनेवा समझौता के प्रावधानों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ 1954 के जेनेवा समझौता के द्वारा इंडो-चीन के लाओस और कंबोडिया स्वतंत्र कर दिए गए। दोनों राज्यों में वैध राजतंत्र एवं संसदीय व्यवस्था लागू की गयी। वियतनाम का विभाजन अस्थायी रूप से दो भागों में कर दिया गया –

(i) उत्तरी वियतनाम
(ii) दक्षिणी वियतनाम। दोनों राज्यों की विभाजक रेखा सत्रहवीं समानातर बनाई गई। उत्तरी वियतनाम में हो-ची-मिन्ह की कम्यनिस्ट सरकार को मान्यता दी गई। दक्षिणी वियतनाम में बाओदाई की सरकार बनी रही। यह भी व्यवस्था की गई कि 1956 में पूरे वियतनाम के लिए चुनाव करवाए जाएंगे।

14. लाओस एवं कंबोडिया पर भारतीय प्रभाव का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ लाओस एवं कंबोडिया पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव था। इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म एवं हिंदू धर्म दोनों का प्रसार हुआ। चौथी सदी में स्थापित कंबोज राज्य के शासक भारतीय मूल के थे। अतः कंबोज भारतीय संस्कृति का प्रधान केंद्र बना। बारहवीं सदी में राजा सूर्यवर्मन ने प्रसिद्ध अंकोरवाट के मंदिर का निर्माण करवाया। यह हिंदू धर्म का विश्व में सबसे बड़ा मंदिर है। सोलहवीं सदी में कंबोज का पतन हो गया और इसके बाद वहाँ आंतरिक अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गयी।

15. वियतनाम में टोंकिन फ्री-स्कूल क्यों स्थापित किए गए ?

उत्तर ⇒ 1907 में वियतनाम में टोंकिन फ्री स्कूल स्थापित किए गए जिसका उद्देश्य वियतनामियों को पश्चिमी शिक्षा दिलाना था। सामान्य शिक्षा के अतिरिक्त इस शिक्षा में विज्ञान, स्वच्छता तथा फ्रांसीसी भाषा की शिक्षा देने की भी व्यवस्था की गई। स्कूल में वियतनामियों को आधुनिक बनाने पर बल दिया गया। छात्रों को पश्चिमी शिक्षा के अतिरिक्त रहन-सहन की यूरोपीय शैली अपनाने की भी शिक्षा दी गई।

16. बाओदायी कौन था ?

उत्तर ⇒ बाओदायी फ्रांस एवं अमेरिका के समर्थन से दक्षिण वियतनाम के प्रांत अन्नाम का शासक बना था। लेकिन वियतनाम में साम्यवादी राष्ट्रवादियों के बढ़ते विरोध के कारण उसका टिकना कठिन साबित हुआ। इसलिए 25 अगस्त, 1945 को बाओदायी ने अपना पद त्याग दिया।

17. 1970 में जकार्ता सम्मेलन क्यों बुलाया गया ?

उत्तर ⇒ कंबोडिया में अमेरिकी हस्तक्षेप के साथ ही चीनी हस्तक्षेप भी शुरू हुआ। इससे विश्वशांति को खतरा उत्पन्न हुआ। अमेरिका ने कंबोडिया से अपनी सेना की वापसी की घोषणा की लेकिन दक्षिण वियतनाम कंबोडिया से अपनी सेना हटाने को तैयार नहीं हुआ। इससे गंभीर स्थिति बन गई। इसी समस्या के समाधान के लिए मई, 1970 में जकार्ता सम्मेलन (ग्यारह एशियाई देशों का सम्मेलन) बुलाया गया।

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examunlocker@gmail.com

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