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प्रेस एवं सांस्कृतिक राट्रवाद

1. भारत में मुद्रण के आरंभिक इतिहास पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर ⇒ भारत में छपाई का इतिहास पुर्तगालियों के आगमन के साथ आरंभ होता है। 16वीं सदी के मध्य में गोवा में पुर्तगाली धर्म प्रचारकों, जेसुइटो ने पहली बार छापाखाना लगाया। उन लोगों ने स्थानीय लोगों से कोंकणी भाषा सीखकर उसमें अनेक पुस्तकें छापी। 16वीं शताब्दी से ही कैथोलिक पादरियों ने तमिल भाषा में पहली पुस्तक को चीन में प्रकाशित की। इसी समय से भारत में पुस्तकों की छपाई ने गति पकड़ी। 1674 तक कोंकणी और कन्नड़ में लगभग पचास पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका था। डच धर्म प्रचारकों ने भी पुस्तकों की छपाई में पीछे नहीं रहे। उन लोगों ने पुरानी पुस्तकों के अनुवाद सहित बत्तीस तमिल भाषा की किताबें छापी। इस प्रकार भारत में पुस्तकों का प्रकाशन यूरोपीय धर्म प्रचारकों द्वारा आरंभ किया गया।


2. तकनीकी विकास का मुद्रण पर क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर ⇒ जैसे-जैसे छपाई का प्रसार होता गया वैसे-वैसे छापाखाना में भी निरंतर सुधार किए गए ताकि कम श्रम, लागत और समय में अधिक-से-अधिक छपाई की जा सके। 18वीं सदी के अंतिम चरण तक धातु के बने छापाखाने काम करने लगे। 19वीं-20वीं सदी में छापाखाना में और अधिक तकनीकी सुधार किए गए। 19वीं शताब्दी में न्यूयॉर्क निवासी एम० ए० हो ने शक्ति चालित बेलनाकर प्रेस का इजाद किया। इसके द्वारा प्रतिघंटा आठ हजार ताव छापे जाने लगे। इससे मुद्रण में तेजी आई। इसी सदी के अंत तक ऑफसेट प्रेस भी व्यवहार में आया। इस छापाखाना द्वारा एक ही साथ छ: रंगों में छपाई की जा सकती थी। 20वीं सदी के आरंभ से बिजली संचालित प्रेस व्यवहार में आया। इसने छपाई को और गति प्रदान की।


3. गुटेनबर्ग ने मुद्रणयंत्र का विकास कैसे किया ?

उत्तर ⇒ यूरोप में छापाखाना के आविष्कार का श्रेय सर्वप्रथम जर्मनी के योहान गुटेनबर्ग को है जिसने 1448 ई० में छापाखाना का आविष्कार किया। जैतून पेरने की मशीन को आधार बनाकर उसने प्रिंटिंग प्रेस का विकास किया। इस छपाई मशीन में पेंच की सहायता से लंबा हैंडल लगाया गया था। पेंच को घुमाकर प्लाटेन को गीले कागज पर दबाया जाता था। साँचे का उपयोग कर अक्षरों की धातु की आकृतियों को ढाला गया। इन टाइपों को घुमाने या ‘मूव’ करने की व्यवस्था की गई थी।


4. भारतीय प्रेस की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ भारतीय प्रेस की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

(i) यह ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारतीयों की भावना को एकरूप देने, उसकी नीतियों एवं शोषण के विरुद्ध जागृति लाने एवं देशप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र निर्माण में इसने महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।

(ii) इसके द्वारा न्यायिक निर्णयों में पक्षपात, धार्मिक एवं सामाजिक सुधार आंदोलन को बल मिला तथा भारतीय जनमत जाग्रत हुआ।

(iii) इसने न केवल राष्ट्रवादी आंदोलन को एक नई दिशा दी अपितु भारत में शिक्षा को प्रोत्साहन, आर्थिक विकास एवं औद्योगिकीकरण तथा श्रम आंदोलन को भी प्रोत्साहित करने का कार्य किया।


5. भारत में पांडुलिपियाँ कैसे बनाई जाती थी ?

उत्तर ⇒ प्राचीन काल में भारत में धातु-पत्थर पर अभिलेख उत्कीर्ण करवाने के अतिरिक्त भोजपत्र एवं ताड़ के पत्रों तथा बाद में हाथ से बने कागज का व्यवहार भी लेखन सामग्री के रूप में किया गया। इनसे हस्तलिखित पांडुलिपियाँ तैयार की गई। संस्कृत, पाली, प्राकृत, क्षेत्रीय भाषाओं, अरबी तथा फारसी में ऐसी असंख्य पांडुलिपियाँ तैयार की गई। इनके किनारों को सुंदर रंगीन चित्रों से सुसज्जित किया जाता था। इनके पन्नों को सिलकर उन पर जिल्द चढ़ा दी जाती थी जिससे वे सुरक्षित रहती थी।


6. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट पारित करने का क्या उद्देश्य था ?

उत्तर ⇒ वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट पारित करने का मुख्य उद्देश्य था –

(i) सरकार वैसी कोई पत्र-पत्रिका अथवा समाचार पत्र को मुक्त रूप से प्रकाशित नहीं होने देना चाहती थी जिसमें सरकारी व्यवस्था और नीतियों की आलोचना हो तथा

(ii) भारत में उभरते राष्ट्रवाद के प्रसार को रोकने के लिए।


7. यंग इंडिया समाचार पत्र के बारे में बताएँ।।

उत्तर ⇒ यंग इंडिया अंग्रेजी में प्रकाशित समाचार पत्र था। इसका प्रकाशन 1919 ई० में अहमदाबाद से हुआ। इसके संपादक महात्मा गाँधी थे। इसके माध्यम से महात्मा गाँधी ने अपने विचारों तथा राष्ट्रवादी आन्दोलन का प्रचार जन-जन तक किया।


8. रोमन चर्च ने प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं पर प्रतिबंध क्यों लगाया ?

उत्तर ⇒ रोमन चर्च प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं पर प्रतिबंध इसलिए लगाया जिससे प्रकाशक धार्मिक स्वरूप को चुनौती देनेवाली सामग्री का प्रकाशन नहीं कर सकें। पुस्तकें धार्मिक मान्यताओं एवं चर्च की सत्ता को चुनौती दे रहे थे।


9. तिलक ने किस भाषा में केसरी और मराठा का प्रकाशन किया ?

उत्तर ⇒ तिलक ने केसरी का प्रकाशन मराठी भाषा में तथा मराठा का प्रकाशन अंग्रेजी भाषा में किया।


10. इक्वीजीशन से आप क्या समझते हैं ? इसकी जरूरत क्यों पड़ी ?

उत्तर ⇒ धर्म-विरोधी विचारों के प्रसार को रोकने के लिए रोमन चर्च ने इक्वीजीशन नामक संस्था का गठन किया। यह एक प्रकार का धार्मिक न्यायालय था। इसका काम धर्म विरोधियों की पहचान कर उन्हें दंडित करना था। नये धार्मिक विचारों के प्रसार को रोकने के लिए चर्च ने प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं पर अनेक प्रतिबंध लगा दिये जिससे वे धार्मिक स्वरूप को चुनौती देनेवाली सामग्री का प्रकाशन नहीं कर सकें। 1558 से चर्च प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची रखने लगा जिससे उनका पुनर्मुद्रण और वितरण नहीं हो सके।


11. लॉर्ड लिटन ने राष्ट्रीय आंदोलन को गतिमान बनाया । कैसे ?

उत्तर ⇒ देशी भाषाओं के समाचार-पत्र को नियंत्रण में लाने के लिए लॉर्ड लिटन ने 1878 ई० में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट पारित किया। देशी समाचार पत्र खुलकर औपनिवेशिक शासन के शोषणकारी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रवादी भावना को उत्पन्न कर रहे थे। इसी को ध्यान में रखकर लिटन ने देशी भाषा समाचार-पत्र अधिनियम के माध्यम से समाचार-पत्रों पर अधिक प्रतिबंध लगाया तथा इसे नियंत्रण में लाने का प्रयास किया था। लॉर्ड लिटन के वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट ने राष्ट्रीयता की भावना एवं जन असंतोष में उबाल लाने का कार्य किया ही, साथ ही साथ राष्ट्रीय आंदोलन को भी गतिमान बनाया।


12. मार्टिन लूथर ने अपनी पिच्चानवें स्थापनाएँ किस चर्च के दरवाजे पर टाँग दी ?

उत्तर ⇒ विटेनवर्ग चर्च के दरवाजे पर मार्टिन लूथर ने अपनी पिच्चानवें स्थापनाएँ को टाँग दी।


13. मुद्रण संस्कृति ने फ्रांसीसी क्रांति के लिए किस प्रकार अनुकूल परिस्थितियाँ बनाई ?

उत्तर ⇒ मुद्रित संस्कृति ने निम्नलिखित कारणों से फ्रांसीसी क्रांति के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाई –

(i) इसने ज्ञानोदय के विचारों का प्रसार किया।
(ii) मुद्रण ने वाद-विवाद की संस्कृति का भी विकास किया।
(iii) इसने राजशाही के विरुद्ध असंतोष को बढ़ावा देकर क्रांति की भावना को बलवती बनाया।


14. मार्टिन लूथर कौन था ? अपने धार्मिक विचारों का प्रसार करने के लिए उसने मुद्रित सामग्री का व्यवहार कैसे किया ?

उत्तर ⇒ मार्टिन लूथर जर्मनी का एक धर्मसुधारक था। वह रोमन कैथोलिक चर्च में व्याप्त कुरीतियों का विरोधी था। उसे “धर्मसुधार आंदोलन का अग्रदूत” कहा जाता है। अपने विचारों के लिए उसने मुद्रण का सहारा लिया। उसका मानना था कि “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है, सबसे बड़ा तोहफा।” 1517 में उसने ‘पंचानवे स्थापनाएँ’ लिखकर इसकी एक प्रति विटेनबर्ग चर्च के दरवाजे पर टाँग
दी। इसकी प्रतियाँ छापकर चर्च को वाद-विवाद करने की चुनौती दी गई।


15. रोमन कैथोलिक चर्च ने 16वीं सदी के मध्य से प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची रखनी क्यों आरंभ की ?

उत्तर ⇒ मार्टिन लूथर ने 1517 में पिच्चानवें स्थापनाएँ लिखी, जिसमें उसने रोमन कैथोलिक चर्च में प्रचलित अनेक परंपराओं एवं धार्मिक विधियों पर प्रहार किया। लूथर के लेख के व्यापक प्रभाव से रोमन कैथोलिक चर्च में विभाजन हो गया। लूथर ने ईसाई धर्म की नई व्याख्या प्रस्तुत की। उसके समर्थक प्रोटेस्टेंट कहलाए। धीरे-धीरे प्रोटेस्टेंट ईसाई धर्म का प्रमुख संप्रदाय बन गया, रूढ़िवादी कैथोलिक संप्रदाय का प्रभाव कमजोर पड़ गया। दूसरी ओर, रोमन कैथोलिक चर्च धर्म विरोधी भावना दबाने के लिए प्रयासरत थे क्योंकि पुस्तकें धार्मिक मान्यताओं एवं चर्च की सत्ता को चुनौती दे रही थी। नए धार्मिक विचारों के प्रसार को रोकने के लिए चर्च ने प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए और वितरण नहीं हो सके।


16. जापानी उकियों चित्रकला शैली की विषय वस्तु क्या थी ?

उत्तर ⇒ 1753 में एदो (तोक्यों) के कितागावा उतामारों ने एक नई चित्रकला शैली का विकास किया ओ ‘उकियो’ अथवा तैरती दुनिया का चित्र था। इसका विषय वस्तु शहरी लोगों के जीवन का चित्रण था।


17. निम्नलिखित के बारे में 30 शब्दों में लिखें।

  1.  छापाखाना                             
  2.  गुटेनबर्ग     
  3.  वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट                 
  4.  प्रोटेस्टेंटवाद 
  5.  रेशम मार्ग                               
  6.  सर सैयद अहमद                     
  7.  यंग इंडिया                             
  8.  मराठा
  9.  बाइबिल

1. छापाखाना – छापाखाना के आविष्कार का महत्त्व इस भौतिक संसार में आग, पहिया और लिपि की तरह है जिसने अपनी उपस्थिति से पूरे विश्व की जीवन शैली को एक नया आयाम दिया। छापाखाना के आविष्कार और विकास का श्रेय चीन को है।

2. गुटेन्वर्ग – गुटेन्वर्ग का जन्म जर्मनी के मेन्जनगर में एक कृषक-जमींदार व्यापारी परिवार में हुआ था। छापाखाना का आविष्कार गुटेन्वर्ग ने 1450 में किया। गुटेन्वर्ग ने मुद्रण स्याही का भी निर्माण किया। गुटेन्वर्ग छपाई मशीन को ‘मूवेबल टाइप प्रिंटिंग मशीन’ कहा गया।

3. वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट – 1878 ई० में लॉर्ड लिटन ने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट पारित किया था। यह एक्ट देशी समाचार पत्रों को नियंत्रण में लाने के लिए पास किया गया था क्योंकि देशी भाषा वाले समाचार पत्र सरकार की साम्राज्यवादी नीतियों के विरुद्ध राष्ट्रवादी भावना को उत्पन्न कर रहे थे।

4. प्रोटेस्टेंटवाद – मार्टिन लूथर के लेख के व्यापक प्रभाव से रोमन कैथोलिक चर्च में विभाजन हो गया। लूथर ने ईसाई धर्म की नई व्याख्या प्रस्तुत की। उसके समर्थक प्रोटेस्टेंट कहलाए। धीरे-धीरे प्रोटेस्टेंट संप्रदाय ईसाई धर्म का प्रमुख संप्रदाय बन गया। प्रोटेस्टेंटवाद यह मानता था कि चर्च के रोमन कैथोलिक समुदाय में बुराई तथा भ्रष्टाचार व्याप्त है। अतः चर्च में सुधार की आवश्यकता है।

5. रेशम मार्ग – समरकन्द – पर्शिया-सिरिया मार्ग को रेशम मार्ग कहा जाता था। यह एशिया से यूरोप पहुँचने का व्यापारियों का मार्ग था। इसी रेशम मार्ग से ग्यारहवीं शताब्दी में चीन से कागज यूरोप पहँचा।

6. सर सैयद अहमद – सर सैयद अहमद अलीगढ़ आंदोलन के प्रणेता थे। मुस्लिमों के बीच शिक्षा का प्रसार करने में सर सैयद अहमद का बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। सर सैयद अहमद के राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ते प्रभाव के कारण ही उर्दू प्रेस को कांग्रेस समर्थित राष्ट्रीय आंदोलन एवं अंग्रेजी राज से मुसलमानों के संबंधों की नई व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया।

7. यंग इंडिया – ‘यंग इंडिया’ नामक पत्र का संपादन महात्मा गाँधी के द्वारा उनके विचारों एवं राष्ट्रवादी आंदोलन का प्रचार करने के लिए किया गया था। इस पत्र के माध्यम से गाँधीजी ने सरकार को अपने राजनैतिक दर्शन एवं राजनीतिक कार्यक्रमों से अवगत कराया तथा भारतीयों को एक बड़े आंदोलन के लिए प्रशिक्षित किया।

8. मराठा – अंग्रेजी भाषा में ‘मराठा’ नामक समाचार-पत्र की शुरुआत बाल गंगाधर तिलक के संपादन में 1881 ई० में बंबई से हुई। यह पत्र उग्रराष्ट्रवादी विचारों से प्रभावित था तथा इसका जनमानस पर व्यापक प्रभाव था।

9. बाइबिल – बाइबिल ईसाइयों का पवित्र धर्म ग्रंथ है। गुटेन्वर्ग प्रेस में जो पहली पुस्तक छपी वह ईसाई धर्मग्रंथ बाइबिल ही था। गुटेन्वर्ग ने मुद्रण एवं हैण्ड प्रेस का विकास कर 36 लाइन में बाइबिल को 1448 ई० में छापा।

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examunlocker@gmail.com

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