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रासायनिक अभिक्रिया एवं समीकरण के प्रश्न उत्तर

1. लोहे की वस्तओं को हम क्यों पेंट करते हैं ? 

उत्तर ⇒ पेंट करने से लोहे के पदार्थ का ऊपरी भाग छुप जाता है। वह वायु के साथ सीधे संपर्क में नहीं आता है जिसके कारण उसमें जंग नहीं लगता। इसलिए पेट करने से हम लोहे के उस पदार्थ को जंग लगने से बचा सकते हैं।


2 . तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन से प्रभावित क्यों किया जाता है ?

उत्तर ⇒ तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थ को वायुरोधी बर्तनों में रखने से उपचयन की गति धीमी हो जाती है। तेल एवं वसायुक्त पदार्थ को नाइट्रोजन से भी इसीलिए युक्त किया जाता है ताकि उसमें उपचयन न हो सके।


3. कॉपर सल्फेट के विलयन में लोहे का एक टुकड़ा डाल देने पर विलयन का रंग क्यों बदल जाता है ?

उत्तर ⇒ जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है तो वह भूरे रंग का हो जाता है। लोहा कॉपर सल्फेट के घोल में से कॉपर को विस्थापित कर देता है।

Fe+CuSO 4 → FeSO 4 +Cu


4. उत्प्रेरक से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ वैसे पदार्थ जो स्वयं रासायनिक प्रतिक्रिया में भाग नहीं लेते हैं लेकिन प्रतिक्रिया के वेग को बढ़ाते हैं या घटाते हैं, उसे उत्प्रेरक कहते हैं। जैसे-Fe उत्प्रेरक की उपस्थिति में बेंजीन के हाइड्रोजन परमाणु का क्लोरीन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापन- 

6 H6+Cl 2  → C6H 5Cl + HCl

बेंजीन + क्लोरीन → क्लोरोबेंजीन + हाइड्रोजन क्लोराइड


 5. वायु में जलाने से पहले मैग्नीशियम रिबन को साफ क्यों किया जाता है ?

उत्तर ⇒ यदि मैग्नीशियम रिबन नम वायु के संपर्क में रहता है तो उस पर सफेद रंग की मैग्नीशियम ऑक्साइड की पर्त जम जाती है, यह पर्त मैग्नीशियम के जलने में अवरोध पैदा करती है। इसलिए मैग्नीशियम रिबन को पहले रेगमार से साफ किया जाता है।


 6. प्रतिस्थापन अभिक्रिया क्या हैं ? उदाहरण दे ।

उत्तर ⇒ वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अधिक अभिक्रियाशील धातु अपने से कम अभिक्रियाशील धातु को यौगिक के विलयन या गलित अवस्था से विस्थापित कर देती है उसे प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।

Fe+CuSO 4 → FeSO 4 +Cu

इस रासायनिक अभिक्रिया में Fe जो कि अधिक अभिक्रियाशील है Cu की अपेक्षा उसे विस्थापित कर उसके स्थान पर स्वयं को प्रतिस्थापित कर रहा है।


7. वियोजन अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ वियोजन अभिक्रिया-जब एक बड़ा यौगिक टूटकर दो या दो से अधिक यौगिकों में परिणत हो जाता है तो वैसी अभिक्रिया वियोजन अभिक्रिया कहलाती है।

2KCIO 3   2KCl+302


8. संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है ? रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है ? .

उत्तर ⇒ संतुलित रासायनिक समीकरण वह है जिसमें अभिकारकों और उत्पादों में विभिन्न तत्त्वों के परमाणुओं की संख्या समान होती है। रासायनिक अभिक्रियाओं में द्रव्यमान के संरक्षण के नियम को संतुष्ट करने के लिए रासायनिक समीकरण संतुलित होनी चाहिए।


9. ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया का क्या अर्थ है ? 

उत्तर ⇒ ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया –  ऐसी अभिक्रियाएँ जिनमें ऊष्मा निकलती हैं,  ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण — मीथेन दहन की अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।

CH(g) + 2O2 (g) → CO2 (g) + 2H20 (g) + ऊर्जा (880.4 kJ mol-1)

 ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ –  ऐसी अभिक्रियाओं को जिनमें ऊष्मा अवशोषित होती है, ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहते हैं।
उदाहरण — बेरियम डाइऑक्साइड तथा अमोनियम थायासायनेट की अभिक्रिया ऊष्माशोषी है। .

Ba(OH)2.8H2O(s)+2NH4 SCN(s) → Ba(SCN)2 (aq)+2NH(aq) + 10H2O (l)


10. अवक्षेपण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण देकर समझाएँ।

उत्तर ⇒ जब दो विलयनों को मिलाया जाता है और उनकी अभिक्रिया से श्वेत रंग के एक पदार्थ का निर्माण होता है जो जल में अविलेय है, तो इस अविलेय पदार्थ के अवक्षेप कहते हैं । जिस अभिक्रिया में अवक्षेप का निर्माण होता है उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।

Na2SO 4 (aq) + BaCl 2 (aq) → BaSO4 (s) + 2NaCl (aq)

Ba 2+ तथा SO 42   अभिक्रिया से BaSOके अवक्षेप का निर्माण होता है।


11. श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं ? वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ हमें जीवित रहने के लिए ऊर्जा चाहिए । यह ऊर्जा हमें भोजन से मिलती है, जिसे हम खाते हैं। पाचन के दौरान, भोजन सरल पदार्थों में टूट जाता है। उदाहरण के लिए चावल, आलू तथा ब्रेड में कार्बोहाइड्रेट होता है। ये कार्बोहाइड्रेट टूटकर ग्लूकोस बनाते हैं। यह ग्लूकोस हमारे शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन से संयोग करते हैं और ऊर्जा प्रदान करते हैं। इस अभिक्रिया का विशेष नाम श्वसन है।

612(aq) + 602 (aq) ——-→ 6CO2 (ar) + 6H2O (1) + ऊर्जा

ग्लूकोज चूँकि श्वसन अभिक्रिया में ऊष्मा निकलती है, अतः श्वसन अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।


12. प्रकाश-अपघटन अभिक्रिया से क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ अपघटन अभिक्रिया : अपघटन या वियोजन वह अभिक्रिया है, जिसमें किसी यौगिक के बड़े अणु के टूटने से दो या दो से अधिक पदार्थ बनते हैं, जिनके गुण मूल यौगिक के गुण से बिल्कुल भिन्न होते हैं।

प्रकाश-ऊर्जा द्वारा अपघटन :

2AgCl(s)  —सूर्य का प्रकाश  → 2Ag(s) + Cl 2 (g)


13. वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है ? 

उत्तर ⇒ वे अभिक्रियाएँ जिनमें दो या अधिक पदार्थ संयुक्त होकर केवल एक पदार्थ बनाते हैं, संयोजन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं तथा वे अभिक्रियाएँ जिनमें यौगिक दो अधिक सरल पदार्थों में टूटता है, वियोजन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। अतः वियोजन अभिक्रिया, संयोजन अभिक्रिया के बिल्कुल विपरीत है।


14. रासायनिक अभिक्रिया से क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ जब कोई रासायनिक परिवर्तन होता है तो हम कहते हैं कि रासायनिक अभिक्रिया हुई है। जैसे भोजन पकाना, अंगूर का किण्वन तथा साँस लेना आदि। ये सभी क्रियाएँ रासायनिक अभिक्रिया के कारण सम्पन्न होती हैं।


15. संतुलित और असंतुलित समीकरण में क्या अन्तर है ?

उत्तर ⇒ रासायनिक समीकरण में तीर के दोनों ओर उपस्थित तत्त्वों में परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। ऐसे समीकरणों को संतुलित समीकरण कहते हैं। ऐसे समीकरण जिसमें अभिकारक और प्रतिफल तीर के चिह्न के साथ दर्शाये गए हैं किंतु तीर चिह्न के दोनों ओर उपस्थित परमाणुओं की संख्या समान नहीं हो, असंतुलित समीकरण कहलाता है।


16. क्या श्वसन एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है ? इसे स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ सभी वस्तुओं को जीवित रहने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा हमें भोजन से प्राप्त होती है। पाचनक्रिया के समय खाद्य पदार्थ छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं। जैसे चावल, आलू, ब्रेड में कार्बोहाइड्रेट होता है। इस कार्बोहाइड्रेट के टूटने से ग्लूकोज प्राप्त होता है। ग्लूकोज हमारे शरीर की कोशिकाओं में उपस्थित ऑक्सीजन से मिलकर हमें ऊर्जा प्रदान करता है। इस अभिक्रिया का विशेष नाम श्वसन है। अतः श्वसन भी एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।


17. संक्षारण से क्या समझते हैं ? क्या आप दैनिक जीवन में इनके प्रभावों को देख सकते हैं ?

उत्तर ⇒ आप जानते हैं कि लोहे की बनी हुई नई वस्तुएँ चमकीली होती हैं। कुछ दिन बाद वायु में छोड़ दिए जाने पर इसकी सतह पर लालिमायुक्त भूरे रंग की परत चढ़ जाती है। इस प्रक्रिया को लोहे पर जंग लगना कहा जाता है। यह अभिक्रिया अन्य धातुओं की परतों पर भी होती रहती है और उनका रंग बदलता है। जब कोई धात अपने आस-पास अम्ल, आर्द्रता आदि के सम्पर्क में आती है एवं संक्षारित हो जाती है तब इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। संक्षारण के कारण लोहे की बनी वस्तुएँ खराब हो जाती हैं।


18. बुझे हुए चूने के विलयन का उपयोग दीवारों की सफेदी करने में क्यों किया जाता है ?

उत्तर ⇒ कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करके दीवारों पर कैल्सियम कार्बोनेट की एक पतली परत बना देता है। सफेदी करने के दो-तीन दिन बाद कैल्सियम कार्बोनेट का निर्माण होता है और इससे दीवार पर चमक आ जाती है। यही कारण है कि बुझे हुए चूने के विलयन का उपयोग दीवार पर सफेदी करने में किया जाता है।

अम्ल क्षार एवं लवण के महत्वपूर्ण प्रश्न


1.अम्ल किसे कहते हैं ?

उत्तर⇒ अम्ल वह पदार्थ है जिसका स्वाद खट्टा होता है जो नीले लिटमस के घोल को लाल बनाता है, जलीय विलयन में (H+) आयन मुक्त करता है तथा धातु पर इसकी अभिक्रिया से हाइड्रोजन गैस मुक्त होते हैं।

जैसे—HCl, HNO3, H2SO4आदि।


2. क्षारक क्या है ?

उत्तर⇒ क्षारक वह पदार्थ है जिसका स्वाद कड़वा होता है; लाल लिटमस पत्र को नीला बनाता है। इसका जलीय विलयन (OH ) आयन मुक्त करता है तथा अम्ल से अभिक्रिया कर लवण बनाता है।

जैसे- NaOH, CuO, Ca0 तथा Ca(OH)2 आदि।


3. लवण किसे कहते हैं ?

उत्तर⇒ वे पदार्थ लवण कहलाते हैं जो लिटमस पत्रों के प्रति उदासीन होते हैं। धातु और अम्ल के बीच अभिक्रिया के फलस्वरूप लवण बनते हैं।

Zn + 2HCl → ZnCl, + H2
2K + H,SO →H2SO4 + H2


4. अम्ल का जलीय विलयन क्यों विद्युत का चालन करता है?

उत्तर⇒ शुष्क अम्ल (HCL) विद्युत का चालन नहीं करता है। शुष्क अवस्था में HCl, H+ आयन विमुक्त नहीं करता है। ज्योंहि अम्ल में जल की कुछ मात्रा मिला दी जाती है तो यह Hआयन विमुक्त करने लगता है। अम्ल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर विद्युत धारा आसानी से बहने लगता है।H+ आयन के चलते जल से विद्युत धारा बहती है। जल विद्युत का चालन करने लगता है।


5. अम्लीय और भस्मीय मूलक क्या है? उदाहरण के साथ समझावें।

उत्तर⇒ लवण दो आयनों से मिलकर बनते हैं। उनमें से एक धनायन और दूसरा ऋणायन है। धनायन भस्म से प्राप्त होता है जबकि ऋणायन अम्ल से प्राप्त होता है। भस्म से प्राप्त आयन को भस्मीय मूलक और अम्ल से प्राप्त आयन को अम्लीय मूलक कहते हैं। जैसे सोडियम क्लोराइड के बनने में Na+ (भस्मीय मूलक) और Cl (अम्लीय मूलक) आपस में संयोग कर NaCl लवण बनाता है।



6. सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO3) का दो उपयोग लिखें।

उत्तर⇒ सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के दो उपयोग

(i) सोडा अम्ल अग्निशामक में किया जाता है।
(ii) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ऐन्टैसिड का एक संघटक है। क्षारीय होने के कारण यह पेट में अम्ल की अधिकता को उदासीन करके राहत पहुंचाता है।


7. लिटमस विलयन के बारे में आप क्या जानते हैं ?

उत्तर⇒ लिटमस विलयन बैंगनी रंग का रंजक होता है जो थैलो फाइटा समूह के लाइकेन पौधे से निकाला जाता है। प्रायः इसे सूचक की तरह उपयोग किया जाता है। लिटमस विलयन उदासीन होता है और यह बैंगनी रंग का होता है। बहुत से प्राकृतिक पदार्थ जैसे- लाल पत्ता गोभी, हल्दी, हायड्रोजिया, पेट्रोनिया एवं जेरानियम जैसे कई फूलों की रंगीन पंखुड़ियों किसी विलयन में अम्ल एवं क्षारक की उपस्थिति को सूचित करता है। इसे अम्ल-क्षार सूचक अथवा सूचक कहा जाता है।


8. पीतल या ताँबे के बरतनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए ?

उत्तर⇒ ताँबे या पीतल के बरतन में दही नहीं रखना चाहिए। दही में अम्लीय गुण होता है, क्योंकि दही खट्टा होता है। ताँबे के साथ दही की अभिक्रिया (दही में लेक्टिक अम्ल है) के फलस्वरूप धातु के लवण बनते हैं और दही का स्वाद बदल जाता है।
दही + कॉपर → कॉपर लवण + हाइड्रोजन


9. केक या पावरोटी बनाने में बेकिंग पाउडर का उपयोग क्यों किया जाता है ?

उत्तर⇒ बेकिंग पाउडर बेकिंग सोडा और टार्टरिक अम्ल का मिश्रण होता है। जब इसे जल में मिलाया जाता है तो कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होता है।
NaHCO3 + H+ →  CO2 + अम्ल का सोडियम लवण
इस अभिक्रिया से उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड के कारण पावरोटी या केक फूल जाता है तथा इससे यह मुलायम और स्पंजी हो जाता है।


10. ब्लीचींग पाउडर बनाने की विधि एवं उपयोगिता लिखें।

उत्तर⇒ शुष्क बुझा हुआ चूना पर क्लोरीन गैस की क्रिया से विरंजक चूर्ण बनता है।

Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O

इसके उपयोग –

(i) लांड्री में साफ कपड़ों के विरंजन के लिए।
(ii) पीने वाले जल को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए रोगाणुनाशक के रूप में।


11. धोबिया सोडा एवं बेकिंग सोडा में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर⇒

धोबिया सोडा एवं बेकिंग सोडा में अंतर (1)

12. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के कुछ उपयोगों को लिखिए।

उत्तर⇒ हाइड्रोजन क्लोराइड के निम्नांकित उपयोग हैं

(i) इस्पात की सफाई करने में
(ii) अमोनियम क्लोराइड बनाने में
(iii) औषधियों के निर्माण में एवं
(iv) सौंदर्य प्रसाधन में।


13. सोडियम हाइड्रॉक्साइड के कुछ उपयोगों को लिखिए।

उत्तर⇒ सोडियम हाइड्रॉक्साइड के निम्नांकित उपयोग हैं-

(i) धातुओं से ग्रीज हटाने में प्रयुक्त होता है,
(ii) साबुन बनाने में इसका उपयोग किया जाता है,
(iii) अपमार्जक के निर्माण में,
(iv) कागज बनाने में तथा
(v) कृत्रिम फाइबर बनाने में उपयोगी है।


14. आयोडिनयुक्त नमक के उपयोग की क्यों सलाह दी जाती है?

उत्तर⇒ आजकल आयोडिनयुक्त नमक के उपयोग पर काफी जोर दिया जाता है। आयोडिन हमारे शरीर के लिए आवश्यक तत्त्व है। इसकी कमी से थॉयराइड से संबंधित रोग होते हैं। आयोडिन की कमी से आमतौर पर घेघा रोग होता है। साधारण नमक में थोड़ा पोटैशियम आयोडेट या पोटैशियम आयोडाइड मिला देने पर आयोडाइज्ड नमक बन जाता है। इसके सेवन से शरीर में आयोडिन की कमी नहीं हेती है।


15. कॉपर सल्फेट के शुष्क क्रिस्टल को गर्म करने पर उसपर होने वाले प्रभावों को लिखें।

उत्तर⇒ एक शुष्क परखनली में कॉपर सल्फेट के कुछ क्रिस्टल लेकर स्पिरीट लेम्प पर गर्म कीजिए। गर्म करने पर इसका नीला रंग समाप्त हो जाता है और यह श्वत हो जाता है। परखनली की दीवार पर जल की बूंदें दिखाई पड़ती हैं। क्रिस्टल में 5 अणु जल हाते हैं। जल के हटने पर क्रिस्टल रंगहीन (श्वेत) हो जाता है। अगर इस श्वत पदार्थ पर पुन: जल की बूंदें डाली जाएँ तो इसका रंग पुनः नीला हो जाता है। कॉपर सल्फट क्रिस्टल में जल के अणु वर्तमान रहते हैं। अंत: इसका रंग नीला
होता है।


16. अम्ल एवं क्षारक के बीच की अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं, क्यों? एक उदाहरण दें।

उत्तर⇒ अम्ल एवं क्षारक के बीच की अभिक्रिया से लवण तथा जल बनता है अर्थात दोनों एक-दूसरे को उदासीन कर देते हैं। इसलिए अम्ल एवं क्षारक के बीच की अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण- अभिक्रिया निम्न प्रकार होती है

NaOH+ HCl → NaCl+H 2O


17.हमारे अमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है ?

उत्तर⇒ हमारे अमाशय में अम्ल की भूमिका –

(i) हमारे आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जठर ग्रन्थियों से स्रावित होता है और भोजन में अम्लीय माध्यम प्रस्तुत करता है जिससे जठर रस का पेप्सिन नामक एन्जाइम अम्लीय माध्यम में कार्य कर सके।
(ii) यह भोजन में उपस्थित रोगाणुओं को अक्रियाशील एवं नष्ट करता है।
(iii) यह भोजन को शीघ्रता से नहीं पचने देता।


18. अस्पतालों में टूटी हुई अस्थियों को जोड़कर बैठाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले यौगिक का नामोल्लेख कीजिए। इसको कैसे निर्मित करते हैं?

उत्तर⇒ अस्पतालों में टूटी हुई हड्डियों को जोडने के लिए जिस यौगिक का प्रयोग किया जाता है उसे प्लास्टर ऑफ पेरिस कहते हैं। इसे रासायनिक दष्टि से कैल्सियम सल्फेट हेमी हाइड्रेट (CaSO4. 1/2 H2O) कहते हैं । इसे भट्ठी में जिप्सम को 373 K ताप पर गर्म करके बनाया जाता है ।

प्लास्टर ऑफ पेरिस


19. विरंजक चूर्ण के क्या-क्या महत्त्वपूर्ण उपयोग हैं ?

उत्तर⇒ विरंजक चूर्ण के निम्न महत्त्वपूर्ण उपयोग हैं-

(i) इसे सूती कपड़े, लिनन और लकड़ी के गुद्दे में उड़ाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
(ii) पीने योग्य पानी से हानिकारक जीवाणुओं के नाश के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
(iii) क्लोरोफॉर्म बनाने में प्रयुक्त होता है।
(iv) न सिकुड़ने वाली ऊन का इसकी सहायता से निर्माण किया जाता है ।
(v) प्रयोगशाला और उद्योगों में ऑक्सीकारक का कार्य करता है ।


20. अम्लों के सामान्य गुण बताएँ।

उत्तर⇒ अम्लों के सामान्य गुण-

(i) इनका स्वाद खट्टा होता है ।
(ii) ये नीले लिटमस को लाल कर देते हैं।
(iii) इनका घोल साबन के घोल की तरह चिकना नहीं होता।
(iv) ये धातुओं के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
(v) ये कार्बोनेट के साथ क्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करते हैं।
(vi) अम्ल, क्षारकों से क्रिया करके लवण और पानी बनाते हैं ।


21. अम्लों की हमारे जीवन में हानियाँ लिखिए।

उत्तर⇒ अम्लों की हमारे जीवन में हानियाँ –

(i) ये सजीव कोशिकाओं को नष्ट करते हैं।
(ii) सांद्र अम्ल त्वचा और कोमल अंगों को गंभीर क्षति पहुँचाते हैं।
(iii) कुछ खाद्य पदार्थों को खराब कर देते हैं।


22. क्षारकों के सामान्य गुण लिखें।

उत्तर⇒ क्षारकों के सामान्य गुण निम्न हैं-

(i) इनका स्वाद कड़वा होता है।
(ii) ये साबुन जैसे चिकने होते हैं तथा त्वचा को क्षति पहुँचाते हैं।
(iii) ये लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।
(iv) ये हल्दी के रंग को भूरा लाल कर देते हैं।
(v) ये अम्लों के साथ क्रिया करके लवण तथा पानी बनाते हैं।
(vi) ये फिनालफ्थेलिन के घोल को गुलाबी कर देते हैं।


23. साधारण नमक (NaCl) की प्राप्ति कहाँ-कहाँ से होती है ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर⇒ साधारण नमक निम्नलिखित सोतों से प्राप्त होता है-

(i) समुद्री-जल- समुद्री जल में साधारण नमक की बहुत बड़ी मात्रा घुली हुई है। समुद्री जल से नमक की प्राप्ति ‘लवण क्यारियों’ के माध्यम से होती है । सूर्य के ताप और वायु की सहायता से समुद्री जल का वाष्पीकरण होता है । इससे नमक की प्राप्ति होती है । इस नमक में MgCl2. MgSO4, जैसी अनेक अशुद्धियाँ मिली होता है। इन अशुद्धियों को दूर कर शद्ध नमक प्राप्त कर लिया जाता है। .

(ii) खनिज नमक- संसार के अनेक भागों में ठोस लवण का निक्षेप होता है। यह खनिज लवण तब बना था जब युगों पहले समुद्र का कोई हिस्सा सूख गया था। इस नमक का खनन उसी प्रकार होता है जैसे कोयले का किया जाता है। मंडी (हिमाचल प्रदेश), खेवड़ा (पाकिस्तान) आदि में ऐसा नमक उपलब्ध है। अशुद्धियों के कारण यह नमक प्रायः भूरे रंग का होता है। कभी-कभी भूमि तल की गहराई से जल में घोलकर पंपों की सहायता से बाहर निकाला जाता है।

(iii) झीलों से- राजस्थान की सांभर झील, अमेरिका की ग्रेट साल्ट लेक, रूस की लेक एल्टन आदि से भी नमक प्राप्त किया जाता है। इसे जल के वाष्पीकरण से प्राप्त किया जाता है।


24. धोने का सोडा तथा बेकिंग सोडे के दो-दो प्रमख उपयोग बताइए।

उत्तर⇒ धोवन सोडे के उपयोग-

(i) जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए
(ii) काँच, साबुन, पेपर तथा बोरॉक्स, कॉस्टिक सोडा इत्यादि अनेक महत्त्वपूर्ण यौगिकों के उत्पादन के लिए

बेकिंग सोडे के उपयोग-

(i) एन्टैसिड का एक संघटक क्षारीय होने के कारण अम्ल के आधिक्य को उदासीन करता है।
(ii) यह खाद्य एवं पेय पदार्थों के योज्य पदार्थ के रूप में प्रयुक्त होता है। बेकिंग चूर्ण में सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट एवं टार्टरिक अम्ल या इस जैसा एक अम्ल होता है। जब बेकिंग चूर्ण को गर्म करते हैं तो इसमें विद्यमान सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट विखंडित होकर, कार्बन डाइऑक्साइड एवं सोडियम कार्बोनेट प्रदान करता है। कार्बन डाइऑक्साइड बाध्य
करके ब्रेड एवं केक फूल जाते हैं।


25. प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग क्या है ?

उत्तर⇒ प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग –

(i) इसे साँचे, खिलौने, सिरेमिक बर्तन आदि बनाने में प्रयुक्त किया जाता है ।
(ii) सजावटी सामान, मूर्तियाँ आदि इससे बनाए जाते हैं।
(iii)अस्पतालों में अस्थि विभाग और दंत विभाग के द्वारा इसका पयाप्त किया जाता है। यह टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए प्रयुक्त किया जाता है और टूटे हुए दाँतों के स्थान पर नकली दाँत लगाने के सांचेबनाए जाते हैं।
(iv) भवनों की दीवारों और छतों को समतल करने और उन पर डिजयान के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
(v) अग्निशमन संबंधी सामग्री इससे तैयार की जाती है।
(vi) प्रयोगशालाओं में गैसों का रिसाव इससे रोका जाता है।

1. धातु किसे कहते हैं ?

उत्तर⇒  आवर्त सारणी के बायीं तरफ तथा मध्य में रखे जाने वाले तत्त्व धातु कहलाते हैं, जिनमें धात्विक चमक होती है । वे प्रायः तन्य, आघातवर्ध्य, विद्युत् और ऊष्मा की सुचालक, दृढ़ और अधिक घनत्व वाली होती हैं। इनके ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं । लोहा, सोना, चाँदी, ताँबा, प्लैटिनम आदि धातुओं के उदाहरण हैं ।


2. धातुओं के दो रासायनिक गणों को लिखें।

उत्तर⇒(i) धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं।
   (ii) अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस विस्थापित करते हैं।
   2Na +2HCL→ 2NaCl + H 2


3. अधातु के दो गुणधर्मों को लिखें।

उत्तर⇒ (i) अधिकतर अधातुएँ गैसीय अवस्था में पाये जाते हैं।
(ii) अधातुएँ सोनोरस ध्वनि उत्पन्न नहीं करते हैं।


4. कौन-सी धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं ?

उत्तर⇒ सोना और चाँदी ऐसी धातुएँ हैं जो अभिक्रियाशीलता श्रेणी में सबसे नीचे आती हैं। ये धातुएँ काफी कम अभिक्रियाशील हैं। ऐसी धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं।


5. धातुओं का परिष्करण से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर⇒ अपचयन प्रक्रम से प्राप्त धातुएँ शुद्ध नहीं होती हैं। इनमें अपद्रव्य होती हैं। शुद्ध धातु की प्राप्ति इन अपद्रव्यों को धातु से हटाकर किया जाता है। अत: अशुद्ध धातुओं से अपद्रव्यों को हटाना धातुओं का परिष्करण कहा जाता है।


6. ऐसा धातु का उदाहरण दीजिए जो-

(i) कमरे के ताप पर द्रव होता है।
(ii) चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
(iii) ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक हाता है।
(iv) ऊष्मा का कुचालक होता है।

उत्तर⇒ (i) पारा (ii) सोडियम तथा पोटाशियम, (iii) सोना और चांदी (iv) लेड तथा मरकरी।


7. मिश्रधातु क्या है ? तांबे के मिश्रधातु के दो उदाहरण दें।

उत्तर⇒ किसी धातु में अन्य धातु या अधातु की एक निश्चित मात्रा मिलाकर इच्छित गुण-धर्म वाली मिश्रधातुएँ प्राप्त की जा सकती हैं। ताम्बे के दो मिश्रधातु निम्नांकित हैं—पीतल और काँसा। पीतल में 80% Cu और काँसा में 90% Cu पाया
जाता है।


8. धातुएँ विद्युत के सुचालक क्यों होती हैं ?

उत्तर⇒ धातुएँ विद्युत के अच्छे चालक होते हैं। ये विद्युत धनात्मक भी हैं। इसमें इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति तीव्र होती है। ये ताप और विद्युत के सुचालक होते हैं। इसके तार से होकर विद्युत का प्रवाह आसानी से की जा सकती है। धातुओं को चालकता उनमें उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण होती है। ये इलेक्ट्रॉन धातु से होकर आसानी से दौड़ सकत हैं। यही कारण है कि धातु विद्युत और ताप के अच्छे चालक हैं।


9. संयोजकता से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर⇒ किसी भी तत्त्व को संयाजकता उसक परमाण के सबसे बाहरी काश में उपस्थित संयाजकता इलक्ट्रॉनों की संख्या से निर्धारित होती है। मान लिया कि एक तत्त्व Na है। इसका परमाणु संख्या: 11 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,1 है। अत: परमाण के बाहरी काश में इलेक्ट्रॉन संख्या । है। अत: इसकी संयोजकता 1 होगी।


10. आघातवर्थ्य तथा तन्य का अर्थ बताइए।

उत्तर⇒ कुछ धातुओं को पीटकर उनके चद्दर बनाए जाते हैं। इस गुणधर्म का आघातवर्थ्यता कहते हैं और धातु आघातवर्ध्य कहलाती है। किसी धातु के पतले तार खींचे जा सकते हैं। धातुओं के इस गुणधर्म को तन्यता कहते हैं तथा धातु तन्य कहलाती है। एक ग्राम सोने से 2 किमी लंबा तार बनाया जा सकता है।


11. संक्षारण से क्या समझते हैं?

उत्तर⇒ जब धात सतह जल, वायु अथवा आस-पास के अन्य किसा पदार्थ से प्रभावित होती है, तो इसे धातु का संक्षारित होना कहते हैं तथा इस परिघटना का संक्षारण कहा जाता है। गोल्ड तथा सिल्वर जैसी उत्कष्ट धातएँ सुगमतापूर्वक संक्षारित नहीं होती हैं। एलुमिनियम जैसी धातुएँ संक्षारित नहीं होती हैं।


12. संक्षारण से बचने की तीन विधियों को लिखें।

उत्तर⇒ संक्षारण रोकने की तीन विधियाँ –

(i) यशदलेपन द्वारा
(ii) विद्युत लेपन द्वारा
(iii) एनोडीकरण द्वारा


13. एक धातु और एक अधातु का नाम लिखें जो वायु के सम्पर्क में आने पर जल उठते हैं ?

उत्तर⇒ सोडियम धातु वायु के सम्पर्क में आन पर वायमंडलीय सामान्य ताप पर ही जल उठते हैं। श्वेत फॉस्फोरस अधातु है इसे पानी में डुबाकर रखा जाता है। यह वायु के सम्पर्क में आते ही जल उठता है।


14. जब धातुएँ नाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया करती है तो हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं होता है। क्यों ?

उत्तर⇒ क्योंकि HNO3 एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो उत्पन्न हाइड्रोजन का ऑक्सीकृत करके जल में परिवर्तित कर देता है एवं स्वयं नाइट्रोजन के किसी ऑक्साइड (N2O, NO, NO2 ) में अपचयित हो जाता है। लेकिन Mn ही एक ऐसा धातु है जो अति तनु HNOके साथ अभिक्रिया कर H2 गैस उत्पन्न करता है।


15. एनोड पंक क्या है? उदाहरण के साथ समझावें।

उत्तर⇒ विद्युत शोधन में जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तब एनोड पर स्थित अशद्ध धातु केटायन के रूप में घोल में जाने लगती है। उतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होती है। घुलनशील अशुद्धियाँ घोल में चली जाती हैं। अघुलनशील अशुद्धियाँ एनोड के नीचे जमा हो जाती हैं। इन्हें एनोड पंक कहते हैं।


16. निम्न पदों की परिभाषा दें–

(i) खनिज
(ii) अयस्क
(iii) गैंग
(iv) निस्तापन
(v) भर्जन

उत्तर⇒

(i) खनिज- भू-पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्त्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं। ये प्रायः खानों से निकाले जाते हैं।

(ii) अयस्क- वैसे खनिज जिनसे धातु का व्यावसायिक उत्पादन होता है, अयस्क कहलाते हैं। अयस्कों में धातु प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं। इससे धात का उत्पादन सरलता से कम खर्च में होता है।

(iii) गैंग- पथ्वी से प्राप्त खनिज अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि कई अशद्धियाँ होती हैं। धातओं के निष्कर्षण स पहल अयस्क से अशुद्धियों को हटाना आवश्यक होता है। ये अशुद्धियाँ गैंग कहे जाते हैं। अयस्कों को गैंग से हटाने के लिए जिन प्रक्रियाओं का उपयोग होता है वे अयस्क एवं गैंग के भौतिक अथवा रासायनिक गुण धर्मों पर आधारित होते हैं। इनके पृथक्करण के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

(iv) निस्तापन- अयस्क को उसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर तीव्रता से गर्म करने की क्रिया जिससे उड़नशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं और ऑक्सीलवण ऑक्साइड में परिणत हो जाता है निस्तापन कहा जाता है। .

(v) भर्जन-अयस्क को वायु की अनियंत्रित आपूर्ति में उसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर तीव्रता से गर्म करने की क्रिया भर्जन कहलाती है। इसमें अशुद्धियाँ ऑक्सीकृत होकर बाहर निकल जाती है।


17. आघातवर्ध्यता से क्या समझते हैं ?

उत्तर⇒ कुछ धातुओं को पीटकर चद्दर बनाए जाते हैं। इस गुणधर्म का आघातवर्ध्यता कहते हैं। इसी गुण के कारण एलुमिनियम के चद्दर, लोहे के चद्दर आदि बनाए जाते हैं।


18. पोटैशियम तथा सोडियम धातुओं को किरोसीन तेल में डुबाकर क्यों रखा जाता है?

उत्तर⇒ सोडियम तथा पोटैशियम तीव्र अभिक्रियाशील तत्त्व हैं। यह वायुमंडलीय ताप पर ही जल उठता है। अत: इसे खुले वायु में रखने से दुर्घटना की सम्भावना होती है। यही कारण है कि इसे किरोसीन तेल में डुबा कर रखा जाता है जिससे इसकी अभिक्रियाशीलता बिलकुल कम हो जाती है और यह वायमंडलीय ताप से अप्रभावित रहता है।


19.आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च क्यों होते हैं ?

उत्तर⇒ आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में पाए जाते हैं। इनमें अंतर आण्विक आकर्षण बल काफी मजबूत होते हैं। अतः अंतर आण्विक आकर्षण को तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि आयनिक यौगिकों के गलनांक काफी उच्च होते हैं।


20. द्विधर्मी ऑक्साइड क्या है? उदाहरण दें।

उत्तर⇒ वैसे ऑक्साइड को द्विधर्मी अथवा उभयधर्मी ऑक्साइड कहे जाते हैं जिनमें अम्लीय और क्षारीय दानों गुण मौजूद होते हैं। जैसे एलुमिनियम ऑक्साइड। ये अम्लों और क्षारों से अभिक्रिया कर भिन्न-भिन्न यौगिकों का निर्माण करता है।

Al2O3 + 6HCI →  2AICI3 + 3H2O
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAIO2 + H2O


21. कैरेट सोना का क्या अर्थ है ?

उत्तर⇒ शुद्ध सोने को 24 कैरेट कहते हैं। यह काफी नर्म होता है। इससे आभूषण बनाना कठिन है। आजकल गहने बनाने के लिए 22 कैरेट सोने की आवश्यकता होती है। 22 कैरेट सोना थोड़ा कठोर होता है। इसमें 22 भाग शुद्ध सोना और 2 भाग ताँबा या चाँदी मिला रहता है।


22. चाँदी, सोना एवं प्लैटिनम का उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है। क्यों ?

उत्तर⇒ सोना एक कोमल, सुनहले रंग का कीमती धातु है। इसका मुख्य उपयोग आभूषण बनाने में होता है। सोने की शुद्धता को कैरेट (Carat) में मापते हैं। शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है। आभूषण बनाते समय शुद्ध सोने में कम कीमती धात् ताँबा या चाँदी थोडा मिला दिया जाता है, जिससे वह कुछ कठोर बन जाता है। सोने के बने आभूषण 22 कैरेट के होते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि इन आभूषणों में 22 भाग सोना 2 भाग ताँबा या चाँदी की मिलावट है। 24 कैरेट सोना को 18 कैरेट सोना में बदलने के लिए 18 भाग सोना में 6 भाग ताँबा या चाँदी मिश्रित कर देते हैं। इस प्रकार चाँदी तथा प्लैटिनम का उपयोग किया जाता है


23. ध्वानिक (सोनोरस) किसे कहते हैं ?

उत्तर⇒ जब धातुएँ किसी कठोर सतह से टकराती है तो उनसे एक विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है। इसे धातुई ध्वनि कहते हैं। इस प्रकार की धातुएँ ध्वानिक कहलाती हैं। स्कूल की घंटी से निकलने वाली ध्वनि इसका उदाहरण है।


24. एक्वारेजिया से क्या समझते हैं? इसके क्या उपयोग हैं ?

उत्तर⇒ एक्वारेजिया 3 : 1 के अनुपात में सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं सांद्र नाइट्रिक अम्ल का ताजा मिश्रण होता है। यह गोल्ड को गला सकता है। जबकि दोनों अम्लों में से प्रत्येक की यह क्षमता नहीं है। एक्वारेजिया भभकता द्रव होने के साथ प्रबल संक्षारक है। यह उन अभिकर्मकों में से एक है जो गोल्ड तथा प्लैटिनम को भी आसानी से गला सकता है।


25. थर्मिट अभिक्रिया क्या है?

उत्तर⇒ आयरन (III) ऑवसाइड ( Fe2O) के साथ एल्युमीनियम की अभिक्रिया काफी तीव्र होती है और काफी ऊष्मा निकलता है इसका उपयोग रेल की पटरियों को जोड़ने में होता है। इस अभिक्रिया को थर्मिट अभिक्रिया कहते हैं।


26. अयस्कों के समृद्धीकरण से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर⇒ पृथ्वी से निकलने वाले अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि जैसी कई अशुद्धिया हटाना अयस्कों का समृद्धीकरण कहा जाता है।


27. लोहे को जंग से बचाने के दो उपाय बताइए।

उत्तर⇒ लोहे पर जंग लगने से बचाने के लिए लोहे की वस्तुओं पर पेंट करके, तेल लगाकर, ग्रीज लगाकर, यशद लेपन, क्रोमियम लेपन, एनोडीकरण या मिश्रधातु बनाकर आदि उपाय किए जाते हैं। इससे लोहे का संक्षारण रूक जाता है और लाह की वस्तुएँ बर्बाद होने से बच जाती है।


28. कॉपर को वायु में खुला छोड़ने पर वह हरे रंग का हो जाता है। क्यों ?

उत्तर⇒ कॉपर वायु में उपस्थित आर्द्र कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है। जिससे इसकी सतह से भूरे रंग की चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है तथा इस पर हरे रंग की चमक चढ़ जाती है। यह हरा पदार्थ कॉपर कार्बोनेट होता है।


29. हवाई जहाजों का ढाँचा ऐलुमिनियम के मिश्र धातुओं से क्यों बनाया जाता है ? वर्णन करें।

उत्तर⇒ हवाई जहाज का ढाँचा ऐलुमिनियम के मिश्र धातुओं डुरेलिमिन और मैग्लिनियम से निम्नलिखित कारणों से बनाया जाता है –

(i) ये अति हल्की मिश्र धातु है जिसका आपेक्षिक घनत्व बहुत कम है।
(ii) सुचालक होने के कारण विद्युत् प्रेषण तारें इनसे बनाई जा सकती हैं।
(iii) इन पर जंग नहीं लगता।
(iv) इन मिश्र धातुओं की कठोरता बहुत अधिक होती है।
(v) ये रसायनों के प्रति बहुत क्रियाशील नहीं है।


30. सल्फाइड अयस्क के सांद्रण के लिए फेन-उत्प्लावन विधि का संक्षेप में वर्णन करें।

उत्तर⇒ सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण करने के लिए उन्हें खूब महीन पीसकर पाइन के तेल मिले जल के साथ मिलाकर हवा के झोके के द्वारा झाग पैदा किया जाता है। शुद्ध अयस्क झाग के साथ ऊपर आ जाता है तथा अशुद्धियाँ नीचे बैट जाती हैं। यह विधि फेन उत्प्लावन विधि कहलाती है।


31. सोडियम को केरोसीन तेल में डुबोकर क्यों रखा जाता है?

उत्तर⇒ सोडियम सक्रिय धातु है जो वायु में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके सोडियम ऑक्साइड बनाती है। यह पानी से क्रिया कर सोडियम हाइड्रोक्साइड तथा हाइड्रोजन उत्पन्न करती है। वायु में खुला छोड़ देने पर यह आग पकड़ लेती है। इसलिए इसे मिट्टी के तेल में डुबोकर सुरक्षित रखते हैं।


32. वल्कनीकरण किसे कहते हैं ? इस प्रक्रिया में रबड़ में क्या परिवर्तन आते हैं ?

उत्तर⇒ सल्फर को प्राकृतिक रबड़ के साथ मिश्रित करने की प्रक्रिया को वल्कनीकरण कहते हैं। जब प्राकृतिक रबड़ को सल्फर से मिलाकर गर्म करते हैं तो रबड़ अधिक कठोर तथा कम लचकदार हो जाता है। रबड़ एक बहुलक है जिसमें एक ही तल में अणुओं की एक लंबी श्रृंखला होती है जिसके कारण रबड़ को खींचा जा सकता है परंतु सल्फर मिलाने से उसका लचीलापन समाप्त हो जाता है क्योंकि सल्फर रबड़ की श्रृंखला के समान अणुओं के मध्य आड़े बंध बनाता है। सल्फर कार्बन परमाणुओं के घूर्णन में भी बाधा डालती है।


33. खनिज और अयस्क क्या हैं ? लोहे के दो अयस्कों के नाम उनके आणविक सूत्र के साथ लिखें ।

उत्तर⇒ खनिज : ऐसे प्राकृतिक पदार्थ जिनमें धातुएँ अपने यौगिकों के रूप में होती हैं, खनिज कहलाते हैं। जैसे-फैल्सपार, अभ्रक आदि।
अयस्क : इन खनिजों को जिनसे लाभप्रद ढंग से धातुओं का निष्कर्षण किया जाता है, अयस्क कहलाते हैं। जैसे-हेमेटाइट, बॉक्साइट आदि।
लोहे के दो मुख्य अयस्क के नाम एक आण्विक सूत्र निम्नलिखित है-

(i) हेमाटाइट Fe2Oएवं

(ii) आयरन पाइराइट FeS2


34. विद्यत अपघटनी शोधन से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर⇒ कॉपर, जिंक, टिन, निकेल, चाँदी, सोना आदि जैसे अनेक धातुओं का शोधन विद्युत् अपघटन द्वारा किया जाता है । इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु को ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है । धातु के लवण विलयन का उपयोग विद्युत्-अपघट्य के रूप में होता है। विद्युत-अपघट्य में जब धारा प्रवाहित होती है तब एनोड पर स्थित शुद्ध धातु विद्युत्-अपघट्य में घुल जाता है । इतनी ही मात्रा में शद्ध धात विद्यत-अपघटय से कैथोड पर निक्षेपित हो जाता है। विलयशील अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं तथा अविलयशील अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे निक्षेपित हो जाती हैं जिसे ऐनोड अवपंक कहते हैं।


35. Alloys स्टील क्या है ? किन्हीं तीन Alloy स्टील के नाम और उनकी संरचना लिखें।

उत्तर⇒ लोहे के साथ अन्य धातुओं और अधातुओं को मिलाकर प्राप्त की जाने वाली मिश्रधात स्टील कहलाती है।

इसके तीन प्रकार हैं-

(i) कार्बन स्टील- लोहे और कार्बन का मिश्र धातु कार्बन स्टील कहलाता है जिसमें कार्बन की मात्रा 0.5% से 1.5% तक होती है। कार्बन के अतिरिक्त सिलिकॉन, गन्धक, फॉस्फोरस तथा मैंगनीज भी होती है। कार्बन स्टील पेच, कील, गाड़ी की पटरियाँ, गार्डर तथा मशीनें बनाने में काम आता है । समुद्री जहाज, इमारतें तथा वाहन भी इसी से बनते हैं।

(ii) स्टेनलेस स्टील- जिसमें क्रोमियम, निकल, ताँबा, टंगस्टन या वेनडेनियम को मिलाया जाता है उसे स्टेनलेस स्टील कहते हैं। इसमें क्रोमियम 18% तथा निकल 8% होता है । यह डेयरी उद्योग अस्पतालों तथा बर्तन तैयार करने में काम आता है।


36. धातुकर्म क्या है ? इसके विभिन्न चरणों को लिखें।

उत्तर⇒ धातुकर्म वह विधि है जिसके द्वारा अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण होता है।
अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण कई चरणों में होता है –

(a) अयस्कों का समद्धीकरण- अयस्कों से गैंग को हटाने की प्रक्रिया को समृद्धीकरण कहते हैं।
(b) धातुओं का निष्कर्षण- इसके लिए निस्तापन, भर्जन, अपघटन आदि विधि का प्रयोग होता है।
(c) धातुओं का परिष्करण- अशुद्ध धातुओं को विभिन्न विधियों, जैसे विद्युत अपघटनी परिष्करण द्वारा शुद्ध किया जाता है।


37. एक मिश्रधातु क्या है ? मैग्नेलियम नामक मिश्रधातु के अवयवों के नाम लिखिए। इसके कोई दो उपयोग दीजिए।

उत्तर⇒ यह दो या दो से अधिक धातुओं अथवा तथा अधातु का संभागी मिश्रण है। उदाहरण—पीतल, तांबा तथा जिंक की मिश्रधातु है, कांसा, ताँबा तथा टिन की मिश्रधातु है।

मैग्नेलियम का संघटन-
ऐलुमिनियम (AI)-95%
मैग्नीशियम (Mg)-5%

मैग्नेलियम के उपयोग-
(i) हल्की तथा कठोर होने के कारण यह हवाई जहाज के भाग बनाने में प्रयोग की जाती है।
(ii) यह वाहनों तथा तुलाओं के भाग बनाने में काम आती है।


38. ऐलुमिनियम के उपयोग बताएँ।

उत्तर⇒ ऐलुमिनियम के उपयोग-

(i) ऐलुमिनियम हल्की धातु होने के कारण, हवाई जहाजों की बॉडी और मोटर इंजन बनाने के काम आती है।
(ii) यह बर्तन, फोटोफ्रेम तथा घरेलू उपयोग की ओर अनेक वस्तुएँ बनाने में काम आती है।
(iii) यह बिजली का सुचालक है, इसलिए आजकल बिजली के स्थानांतरण के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
(iv) ऐलमिनियम की बारीक परतों को खाने का सामान, दवाइयाँ दूध की बोतलें आदि पैक करने में प्रयुक्त की जाती हैं।
(v) ऐलुमिनियम पाउडर सिल्वर पेंट बनाने के काम आता है।
(vi) ऐलुमिनियम पाउडर एलूमिनोथिरैपी में प्रयुक्त होता है। यह प्रक्रम लोहे की पटरियों तथा मशीनों के टूटे भागों को जोड़ने के काम आता है।


39. अयस्क और खनिज में अंतर लिखिए।

उत्तर⇒ खनिज-धातुओं के प्राकृत यौगिक रूप को खनिज कहते हैं । अधिकांश धातुएँ हमें यौगिकों के रूप में ही प्राप्त होती हैं, जैसे-ताँबा हमें पाइराइट या क्यूपराइट से प्राप्त होता है। अयस्क-जिन पदार्थों (खनिजों) से धातु का निष्कर्षण सरल हो उन्हें अयस्क कहते हैं, जैसे- ऐलुमिनियम का अयस्क बॉक्साइट है तो लोहे का हैमेटाइट।

1. कार्बनिक यौगिकों के कुछ गुणों को लिखें।

उत्तर⇒कार्बनिक यौगिकों के निम्नांकित गुण हैं-

(i) अधिकांश कार्बनिक यौगिक अच्छे विद्युत के चालक नहीं होते हैं।
(ii) इनके गलनांक एवं क्वथनांक निम्न होते हैं।
(iii) इनके परमाणुओं के बीच प्रबल आकर्षण बल नहीं होते हैं।
(iv) इन यौगिकों के आबंध से आयन की उत्पत्ति नहीं होती है।
(v) ये जल में घुलनशील नहीं होते हैं लेकिन पेट्रोल, डीजल, कार्बन डाइसल्फाइड जैसे-कार्बनिक पदार्थों में घुलनशील होते हैं।


2. कार्बनिक यौगिकों की संख्या इतनी अधिक क्यों है ?

उत्तर⇒क्योंकि कार्बन परमाणु अन्य परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों को साझा कर यौगिक बनाते हैं। यही कारण है कि कार्बनिक यौगिकों की संख्या इतनी अधिक है।


3. कार्बन के चार यौगिकों के नाम लिखें।

उत्तर⇒ एसिटीक एसिड  –    CH3COOH
क्लोरोफॉर्म         –     CH2Cl3
एथेनॉल             –     CH3CH2OH
मिथेन                –     CH4


4. कार्बन यौगिकों के तीन रासायनिक गुणधर्मों का उपयुक्त रासायनिक अभिक्रिया के साथ उल्लेख करें।

उत्तर⇒ (i) कार्बन यौगिक ऑक्सीकरण अभिक्रिया के फलस्वरूप ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न करते हैं।

CH4 + 02    →    CO2+ H2O + ऊष्मा + प्रकाश
  CH3CH2OH + 02  →    CO2 + H2O + ऊष्मा + प्रकाश

(ii) एथनॉइक अम्ल क्षार (NaOH) के साथ अभिक्रिया कर सोडियम एसीटेट का निर्माण करता है।

NaOH + CH3COOH    →   CH3COONa + H2O

(iii) कार्बन यौगिक एथनॉल सोडियम के साथ अभिक्रिया कर सोडियम एथॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।

2Na + 2CH3CH2OH    →   2CH3CH2O-Na+ H2


5. कार्बन के दो गण-धर्म कौन-से हैं जिनके कारण हमारे चारों ओर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है ?

उत्तर⇒कार्बन की चतु: संयोजकता तथा शृंखलन दो ऐसे विशिष्ट गण हैं जिनके चलते कार्बन यौगिकों की संख्या अधिक है।


6. कार्बन के कितने अपरूप हैं। इनमें से कौन अधिक कठोर और कौन मुलायम है ?

उत्तर⇒कार्बन के मुख्यतः दो अपरूप हैं हीरा और ग्रेफाइट। हीरा काफी कठोर और ग्रेफाइट मुलायम होता है। हीरे का उपयोग गहना बनाने में और ग्रेफाइट का उपयोग लुब्रीकेंट के रूप में होता है।


7. कार्बनिक यौगिकों के क्वथनांक और गलनांक कम होते हैं, इससे इनकी प्रकृति के बारे में क्या कहा जा सकता है ?

उत्तर⇒कार्बनिक यौगिकों के क्वथनांक और गलनांक निम्न होने का कारण है कि इन यौगिकों के अणुओं के बीच प्रबल बंधन नहीं होते हैं। अतः बंधन बनाने के लिए आयनों का निर्माण नहीं करता है।


8. क्या आप डिटर्जेंट का उपयोग कर बता सकते हैं कि कोई जल कठोर है या नहीं ?

उत्तर⇒अपमार्जक (डिटर्जेंट) लंबी कार्बोक्सिलिक अम्ल श्रृंखला के अमोनियम एवं सल्फोनेट लवण होते हैं। इन यौगिकों का आवेशित सिरा कठोर जल में उपस्थित कैल्सियम एवं मैग्नीशियम आयनों के साथ अघुलनशील पदार्थ नहीं बनाते हैं। कठोर जल में भी अपमार्जक प्रभावी बने रहते हैं। ऐसी अवस्था में डिटर्जेंट का उपयोग कर कार्ड जल कठार है, इसके बारे में कहना कठिन है।


9. समजातीय श्रेणी किसे कहते हैं ?

उत्तर⇒कार्बन के यौगिकों का एक ऐसा समूह होता है जिसकी संरचनाएँ तथा रासायनिक गण समरूप होती हैं तथा दो क्रमागत सदस्यों के बीच CH.का अन्तर हाता हे समजातीय श्रेणी कहते हैं।

उदाहरण – एल्कन्स का समजातीय श्रेणी CH.C2H. C3H8 आदि है जिसके क्रमागत सदस्यों के बीच सदा  -CH2 का अन्तर है।


10. समावयवता किसे कहते हैं ? एक उदाहरण दें।

उत्तर⇒समान आण्विक सूत्र लेकिन विभिन्न संरचनाओं वाले ऐसे यौगिक संरचनात्मक समावयन कहलाते हैं। ये दो यौगिक ब्यूटेन के समावयवी कहे जाते हैं। ब्यूटन के दो समावयवी नॉर्मल ब्यूटेन और आइसो ब्यूटेन हैं। इस गुण को समावयवता कहते हैं।

ब्यूटेन का सूत्र C4H10 है।

ब्यूटेन का सूत्र

11. एथनॉल के कुछ उपयोगों को लिखें।

उत्तर⇒ (i) इसका उपयोग टिंचर आयोडिन, कफ सीरप, टॉनिक आदि औषधियों के बनाने में होता है।
(ii) इसका उपयोग पीने में होता है।
(iii) शुद्ध एल्कोहल का उपयोग घातक है।


12. सह-संयोजी आबंध किसे कहते हैं ?

उत्तर⇒दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रोन की एक युग्म की साझेदारी के द्वारा बनाने वाले आबंध सहसंयोजी आबंध कहलाते हैं। सह-संयोजी आबंध वाले अणुओं में भीतर तो प्रबल आबंध होता है लेकिन इनका अंतराणुक बल कम होता है। इन यौगिकों के क्वथनांक और गलनांक कम होते हैं। चूँकि परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रोनों की साझेदारी होती है और आवेशित कण बनते हैं। ऐसे यौगिक विद्युत के कुचालक होते हैं।


13. डिटरजेंट कठोर जल में झाग क्यों देता है ?

उत्तर⇒का निर्माण कर साबुन के समान क्रिया करता है तथा झाग उत्पन्न करता है।


14. हाइड्रोजनीकरण क्या है? इसका औद्योगिक अनुप्रयोग क्या है ?

उत्तर⇒ वनस्पति तेलों में साधारणतः लंबी असंतृप्त कार्बन शृंखलाएँ होती हैं। निकेल उत्प्रेरक का उपयोग करके वनस्पति तेलों को हाइड्रोजनीकरण किया जाता है।

एल्किल समूह

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन को H से योग कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन प्राप्त करना हाइड्रोजनीकरण कहलाता है।


15. समावयवी क्या है ?

उत्तर⇒ कुछ ऐसे कार्बनिक यौगिक होते हैं जिनके अणुसूत्र तो समान होते हैं लेकिन उनके संरचना सूत्र भिन्न-भिन्न होते हैं। ये यौगिक एक दूसरे के समावयवी कहे जाते हैं। यह गुण समावयवता कहलाती है। जैसे एथिल एल्कोहल और डायमिथायल ईथर। इनके अणु सूत्र C2H60 है।


16. हीरा और ग्रेफाइट के गुणों में अन्तर होने के क्या कारण हैं ?

उत्तर⇒ हीरा में प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य परमाणुओं से जुड़ा होता है। इस प्रकार एक दृढ़ त्रिआयामी संरचना बनती है। अतः हीरा अत्यन्त कठोर होता है।ग्रेफाइट में कार्बन परमाणु अन्य तीन कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है। अतः यह हेक्सागोनल प्लेटों के रूप में रवा बनाता है। प्लेटों के बीच इलेक्ट्रॉन भरे रहने के कारण यह सुचालक भी है।


17. सिरका क्या है ? इसके उपयोगों को लिखें।

उत्तर⇒सिरका ऐथेनॉइक अम्ल का तनु घोल है। इसमें अन्य पदार्थ जैसे एस्टर, शर्करा, जेक्सट्रीन आदि तथा अन्य अम्ल घुले होते हैं। सिरके का उपयोग-सुगंध पैदा करने वाले पदार्थ और अचार आदि में परिरक्षक के रूप में भी किया जाता है।


18. एथनॉइक अम्ल के भौतिक गुण धर्मों को लिखें।

उत्तर⇒एथनॉइक अम्ल को साधारणतः एसिटीक अम्ल कहा जाता है। यह अम्ल कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह से संबंधित है। एसिटीक अम्ल के 3-4% विलियन को सिरका कहा जाता है। यह अचार में परिरक्षक का काम करता है। शुद्ध एथनॉइक अम्ल का गलनांक 290 K होता है। शीत के मौसम में यह जम जाता है। इसलिए इसे ग्लैशियल एसिटीक अम्ल कहा जाता है। खनिज अम्लों की तुलना में इसकी अम्लीयता दुर्बल है। यह आयनीकृत नहीं होता है। यह जल में आसानी से घुल जाता है।


19.ईंधन के रूप में एल्कोहल का इस्तेमाल कैसे किया जाता है ?

उत्तर⇒गन्ना सूर्य के प्रकाश में रासायनिक ऊर्जा में बदलने में सर्वाधिक सक्षम होता है। गन्ने का रस (सिरका) बनाने के उपयोग में लाया जाता है जिसका किण्वन करके एल्कोहल तैयार किया जाता है। कुछ देशों में एल्कोहल में पेट्रोल मिलाकर स्वच्छ ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। यह ईंधन पर्याप्त ऑक्सीजन होने पर केवल कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल उत्पन्न करता है।


20. एथनॉल (C2H5OH) के भौतिक गुणधर्मों को लिखें।

उत्तर⇒एथनॉल के भौतिक गुणधर्म
(i) रंगहीन द्रव है।
(ii) इसका गंध सुनहला है।
(iii) यह उर्ध्वपतित द्रव है तथा इसका क्वथनांक 78°C (351 K) है।
(iv) यह जल से हल्का होता है।
(v) यह जल में घुलनशील है।
(vi) यह लिटमस के प्रति उदासीन है।


21. सजीव प्राणियों पर एल्कोहल का क्या प्रभाव पड़ता है ?

उत्तर⇒अधिक मात्रा में एथनॉल का सेवन करने पर उपापचयी प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र कमजोर हो जाता है। इसके कारण समन्वय की कमी हो जाती है, मानसिक दुविधा, अनिद्रा, भावशून्यता आ जाती है । मेथनॉल की थोड़ी-सी मात्रा लेने पर मृत्यु हो सकती है। मेथनॉल यकृत में ऑक्सीकृत होकर मेथेनैल बन जाता है। मेथेनैल यकृत की कोशिकाओं के घटकों के साथ शीघ्र अभिक्रिया करने लगता है। इससे प्रोटोप्लाज्म नष्ट होने लगता है। यह चक्षु तंत्रिका को भी प्रभावित करता है और व्यक्ति अंधा हो जाता है।


22. कठोर जल को साबुन से उपचारित करने पर मैली के निर्माण को समझाएँ।

उत्तर⇒ कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवणों की उपस्थिति के कारण जल कठोर हो जाता है। जब कठोर जल को साबुन से उपचारित किया जाता है तब साबुन कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवणों के साथ अभिक्रिया कर अविलय पदार्थ बनाते हैं। यह अविलेय पदार्थ मैली का निर्माण करते हैं।


23. जीवाश्म ईंधन से आप क्या समझते हैं ? इसका निर्माण कैसे होता है ?

उत्तर⇒करोड़ों वर्षों तक पृथ्वी की सतह में गहरे दबे हुए पौधों तथा पशुओं के अवशेषों से प्राप्त ईंधन को जीवाश्म ईंधन कहते हैं। कोयला और पेट्रोलियम जीवाश्म ईंधन हैं।


24. कार्बन तत्त्व एक अद्वितीय तत्त्व है। कैसे ?

उत्तर⇒ सभी ज्ञात परमाणुओं में से केवल कार्बन परमाणुओं में ही यह क्षमता कि वे आपस में मिलकर लंबी श्रृंखला बनाते हैं । प्रत्येक ऐसी लंबी श्रृंखला कार्बन परमाणु को इस प्रकार का सरल आधार प्रदान करती है जिसमें अन्य परमाण विभिन्न विधियों द्वारा जड सकते हैं जिसके परिणामस्वरूप कार्बन तत्त्व टाग किस्मों के यौगिक बनाए जा सकते हैं।


25. समजातीय श्रेणी क्या है ? उदाहरण के साथ समझाइए।

उत्तर⇒यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें कार्बन श्रृंखला में स्थित हाइड्रोजन को एक ही प्रकार का प्रकार्यक समूह प्रतिस्थापित करता है उसे समजातीय श्रेणी कहते हैं। इसके दो क्रमागत सदस्यों में CH2 ग्रुप का अंतर होता है,

जैसे-एल्केन, सजातीय श्रेणी का सामान्य सूत्र CHnH2n+2है । इस श्रेणी के सदस्य मिथेन CH4 , इथेन C2H6,  प्रोपेन C3H8 , ब्यूटेन C4H10 , पेंटेन C15 H12 , हैक्सेन C6H14 आदि हैं।


26. एस्टीरीफिकेशन (esterification) अभिक्रिया क्या है ? समीकरण द्वारा बतायें।

उत्तर⇒अम्ल तथा ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया से ऐस्टर तथा जल बनते हैं। इस अभिक्रिया को ऐस्टरीकरण कहते है। उदाहरणार्थ ऐसीटिक अम्ल तथा ऐथिल ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया से ऐस्टर ऐसीटेट का बनना ऐस्टरीकरण है।

esterefication

27. सजातीय श्रेणी के लक्षण लिखें।

उत्तर⇒सजातीय श्रेणी के मख्य लक्षण निम्न हैं-

(i) किसी भी सजातीय श्रेणी के सभी सदस्यों को एक सामान्य सत्र के द्वारा प्रकट किया जा सकता है, जैसे एल्केन सजातीय श्रेणी के सभी सदस्योंएक ही सामान्य सूत्र CH, द्वारा प्रकट किया जाता है।

(ii) किसी भी सजातीय श्रेणी के दो साथ-साथ वाले सदस्यों में (_CH.) ग्रुप का अंतर होता है।

(iii) किसी भी सजातीय श्रेणी के सभी सदस्य एक जैसे रासायनिक गुण प्रकट करते हैं।

(iv) किसी भी सजातीय श्रेणी के सदस्यों के भौतिक गुणों में अणु भार बढ़ने के साथ-साथ क्रमिक परिवर्तन होता है।

(v) किसी भी सजातीय श्रेणी के सदस्यों को एक-सी विधियों द्वारा तैयार किया जा सकता है।


28. हाइड्रोकार्बन क्या है ? उदाहरण के साथ समझाइए।अथवा, विभिन्न प्रकार के हाइड्रोकार्बन के नाम उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर⇒ हाइड्रोजन और कार्बन से बने यौगिक को हाइड्रोकार्बन कहते हैं। हाइड्रोकार्बन दो प्रकार के होते हैं –

(i) संतप्त हाइडोकार्बन – सहसंयोजक एकल बंधनों से जुड़े कार्बन एवं हाइड्रोजन के यौगिक संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। इन्हें ऐल्केन भी कहा जाता है इनका सामान्य रासायनिक सूत्र (CnH2n+2) जैसे-मिथेन।

(ii) असंतप्त हाइड्रोकार्बन – खूली शृंखलावाले वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच द्विबंधन अथवा त्रिबंधन उपस्थित रहते हैं, असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। कार्बन परमाणुओं के बीच द्विबंधन रहने पर हाइड्रोकार्बन को ऐल्कीन (alkene) कहते हैं। ऐल्कीन का सामान्य सूत्र CnH2n है। कार्बन परमाणुओं के बीच त्रिबंधन रहने पर हाइड्रोकार्बन को ऐल्काइन (alkyne) कहते हैं। ऐल्काइन. का सामान्य सूत्र (CnH2n-2 है।


29. मिथाइल ऐल्कोहल किस प्रकार तैयार किया जाता है ?

jal gas

उत्तर⇒ मिथाइल ऐल्कोहल को वुड ऐल्कोहल या वुड स्प्रिट भी कहते हैं । इसे लकड़ी के भंजन से प्राप्त किया गया था। इसे तैयार करने के लिए लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों को वायु की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है। मिथाइल ऐल्कोहल एक उत्पाद के रूप में प्राप्त हो जाता है। आजकल इसे जल गैस तथा हाइड्रोजन के मिश्रण को 300°C तक गर्म करने से प्राप्त किया जाता है।


30. एस्टर किसे कहते हैं ? इन्हें किस प्रकार बनाया जाता है ? इनके दो उपयोग लिखिए।

उत्तर⇒जिन कार्बनिक यौगिकों का अभिलक्षकीय ग्रुप -C00- होता है, एस्टर कहलाते हैं। इनके निर्माण के लिए कार्बनिक अम्लों की सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में एल्कोहल से क्रिया कराई जाती है।

(एसिटिक अम्ल) (एथेनॉल)

उपयोग – इनकी गंध फलों के समान होती है इसलिए इनका उपयोग ठंडे पेयों, आइसक्रीम, मिठाइयों तथा परफ्यूमों में होता है। ये फलों में भी पाए जाते हैं।


31. साबुनीकरण किसे कहते हैं ? प्रयोगशाला में साबुन किस प्रकार बनाते हैं ? वर्णन कीजिए।

उत्तर⇒जब वसा या तेल को NaOH के साथ गर्म किया जाता है तो वसा या तेल के अणु विघटित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को साबनीकरण कहते हैं जिसके फलस्वरूप साबुन बनता है।

प्रयोगशाला में साबुन की तैयारी —प्रयोगशाला में साबुन तैयार करने के लिए निम्नलिखित सामग्री चाहिए –
(i) वनस्पति तेल (जैसे, कैस्टर तेल, कॉटन सीड्ड तेल)
(ii) सोडियम हाइड्रोक्साइड (कास्टिक सोडा)
(iii) सोडियम क्लोराइड (साधारण नम)

साबुन का मिशेल

विधि – एक बीकर में 20 mL.कैस्टर ल लीजिए और उस 20%, 40 mLसोडियम हाइड्रोक्साइड का घोल डालिए। इस मिश्रण को धीरे-धीरे उबलने तक गर्म किया जाता है और इसेपाँच से दस मिनट तक उबालाजाता है। अब बीकर में 5 ग्राम खाने वाला नमक डालिए औरश्रृंखला पदार्थ को ठंडा होने दीजिए।ठंडा करने पर बीकर में साबुनजल बनता है जिसे तब हटा लिया जाता है ।


32. अपमार्जक किसे कहते हैं ? संश्लिष्ट अपमार्जक की संरचना बताइए। इसका प्रमुख लाभ लिखिए।

उत्तर⇒सफाई के लिए प्रयुक्त होने वाले पदार्थों को अपमार्जक कहते हैं। बहुत पहले से अपमार्जक के रूप में साबुन का प्रयोग होता रहा है परंतु आजकल संश्लिष्ट अपमार्जक अधिक लोकप्रिय हो गए हैं। संश्लिष्ट अपमार्जक में दो सिरों वाले अणु होते हैं जिनका एक सिरा जल को आकर्षित करता है जो प्रायः सल्फेट (-SO 4) या सल्फोनेट (-SO3Na) ग्रुप द्वारा बना होता है ।दूसरा सिरा जल को प्रतिकर्षित करता है जो हाइड्रोकार्बन युक्त होता है।
संश्लिष्ट अपमार्जक कठोर जल में भी पर्याप्त मात्रा में झाग बनाते हैं। ये कठोर जल के साथ अघुलनशील कैल्सियम या मैग्नेशियम के लवण नहीं बनाते हैं।


33. क्या कारण है कि ग्रेफाइट विद्युत् का सुचालक है ?

उत्तर⇒ ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन परमाणु केवल तीन कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़ा रहता है तथा जिस कारण इसमें षट्कोणीय जाल की परतें बनाते हैं। इसमें कार्बन परमाणुओं के बीच की दूरी अधिक होती है। परतों के मध्य इस दूरी के कारण विपरीत परतों में स्थित कार्बन परमाणुओं के बीच सहसंयोजक बंधों के बनने की संभावना समाप्त हो जाती है और चौथा संयोजक इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र छूट जाता है। इसीलिए ग्रेफाइट में इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह आसानी से हो जाता है और ग्रेफाइट विद्युत् का सुचालक हो जाता है।


34. रासायनिक संरचना के आधार पर साबुन एवं अपमार्जक में विभेद कीजिए।
उत्तर⇒

साबुन

तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) Tatvon Ka Vargikaran Question Answer Class 10th Science Tatvon Ka Vargikaran Question Answer Bihar Board

SCIENCESUBJECTIVE QUESTIONSBy High Target

तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

तत्वों का आवर्त वर्गीकरण प्रश्न उत्तर : class 10th science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण का प्रश्न उत्तर यहाँ पर दिया गया है। जो परीक्षा के लिए बहुत महतवपूर्ण है। class 10th science question answer in hindiतत्वों का वर्गीकरण ऑब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर  क्लास 10th विज्ञान तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण लघु उत्तरीय प्रश्न तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न यहां पर दिया गया है class 10th science subjective question


1. न्यूलैंड के अष्टक सिद्धांत की क्या सीमाएँ हैं ?

उत्तर⇒ न्यूलैंड के अष्टक सिद्धांत की सीमाएँ हैं.

(i) अष्टक का सिद्धांत केवल कैल्सियम तक ही लागू होता था, क्योंकि कैल्सियम के बाद प्रत्येक आठवें तत्त्व का गुणधर्म पहले तत्त्व से नहीं मिलता।
(ii) बाद में कई नये तत्त्व पाए गये जिनके गुणधर्म अष्टक सिद्धांत से मेल नहीं खाते थे।
(ii) अपनी सारणी में इन तत्त्वों को समंजित करने के लिए न्यूलैंड ने दो तत्त्वों को एक साथ रख दिया और कुछ असमान तत्त्वों को एक स्थान में रख दिया।

उदाहरण- कोबाल्ट तथा निकेल एक साथ हैं तथा इन्हें एक साथ उसी स्तम्भ में रखा गया है जिसमें फ्लुओरीन, क्लोरीन एवं ब्रोमीन हैं यद्यपि इनके गुणधर्म उन दोनों तत्त्वों से भिन्न हैं। आयरन को कोबाल्ट एवं निकेल से दूर रखा गया है जबकि उनके गुणधर्मों में समानता होती है।


2. तत्त्वों के आवर्त वर्गीकरण के लिए परमाणु द्रव्यमान संख्या की अपेक्षा परमाणु संख्या को उत्तम आधार क्यों माना गया है ?

उत्तर⇒ तत्त्व का परमाणु द्रव्यमान नाभिक के कारण है। नाभिक तत्त्व के केन्द्र में स्थित है। इसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन हैं, जिनका पुंज होता है। तत्त्व का नाभिक गुणों की व्याख्या नहीं करता। वास्तव में तत्त्वों के गुण इलेक्ट्रॉनिक वितरण से संबंधित हैं। ज्यों-ज्यों परमाणु संख्या बदलती है वैसे-वैसे इलेक्ट्रॉनिक वितरण भी बदलता जाता है। इसलिए परमाणु तत्त्वों के वर्गीकरण का उत्तम आधार है।


3. नाइट्रोजन (परमाणु संख्या 7) तथा फॉस्फोरस (परमाणु संख्या 15) आवर्त सारणी के समूह 15 के तत्त्व है। इन दोनों तत्त्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इनमें से कौन-सा तत्त्व अधिक ऋण विद्युत होगा और क्यों ?

उत्तर⇒ N (Z = 7) 2,5
P (Z = 15) 2,8,5
N अधिक वैद्युत ऋणात्मक होगा, क्योंकि इसका परमाण्वीय आकार अपेक्षाकृत कम होता है। किसी वर्ग में जब शीर्ष से तल (आधार) की ओर बढ़ते हैं, प्रत्येक स्तर पर परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों का एक कोश बढ़ता जाता है। इस प्रकार परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन कोशों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जाती है जिसके कारण परमाणुओं का आकार भी बढ़ता है। परमाणु के आकार में इस वृद्धि के कारण, उसका नाभिक परमाणु में और अन्दर चला जाता है। आने वाले इलेक्ट्रॉन के लिए नाभिक K का आकर्षण कम हो जाता है, जिसके कारण परमाणु आसानी से ऋणायान नहीं बना सकता है और ऋण विद्युत लक्षण कम होता जाता है।


4. तत्वों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है ? आवर्त सारणी में वर्ग तथा आवर्त क्या हैं ?

उत्तर⇒ तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमाकों के आवर्त फलन होते हैं। जब तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु संख्या के आधार पर रखा जाए तो समान गुणों वाले तत्व नियमित अंतर के बाद प्रकट होते हैं । इलेक्ट्रॉन विन्यास इसका मूल आधार है।

वर्ग : आवर्त सारणी में उर्ध्वाधर (खड़े) कालम समूह वर्ग कहलाते हैं।
आवर्त : आवर्त सारणी में क्षैतिज कॉलम आवर्त कहलाते हैं।


5. धनायन का आकार परमाणु से कम क्यों होता है ? व्याख्या कीजिए।

उत्तर⇒ धनायन को धन आयन भी कहते हैं। यह परमाणु द्वारा एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन खो देने पर बनता है । इलेक्ट्रॉन खोने पर प्रायः शैलों की संख्या कम हो जाती है। इसलिए धनायन का आकार परमाणु के आकार से कम होता है।


6. न्यूलैंड्स के अष्टक नियम को लिखें।

उत्तर⇒ 1866 ई० में अंग्रेज वैज्ञानिक जॉन न्यलैंडस ने सात तत्त्वों को परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में व्यवस्थित किया। उन्होंने सबसे कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्त्व वाल तत्त्व हाइड्रोजन से आरंभ किया तथा 56वें तत्त्व थोरियम पर इसे समाप्त किया। उन्होंने पाया कि प्रत्येक आठवें तत्त्व का गणधर्म पहले तत्त्व के गुणधर्म के समान है। उन्होंने इसकी तुलना संगीत के अष्टक से की और इसलिए इन्होंने अष्टक का सिद्धांत कहा। इसे “न्यूलैंड्स का अष्टक सिद्धांत” कहा जाता है।


7. तत्त्वों के वर्गीकरण में डॉबेराइनर के क्या आधार थे ?

उत्तर⇒ डॉबेराइनर ने समान गुणधर्मों वाले तत्त्वों को समूहों में व्यवस्थित करने का प्रयास किया। उन्होंने तीन-तीन तत्त्व वाले कुछ समूहों को चुना एवं उन समूहों को त्रिक कहा। डॉबेराइनर ने बताया कि त्रिक के तीनों तत्त्वों का उनके परमाणु द्रव्यमान, के आरोही क्रम में रखने पर बीच वाले तत्त्व का परमाणु द्रवयमान अन्य दो तत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान का लगभग औसत होता है।


8. आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कैसे परिवर्तित होगी ?

उत्तर⇒ आवर्त में बायीं से दायीं ओर बढ़ने पर बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्रमानुसार बढ़ती जाती है। अतः अष्टक की प्राप्ति में एकांतर रूप से कम इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होगी। अतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ती है।


9. तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्व की स्थिति से क्या संबंध है ?

उत्तर⇒ आधुनिक आवर्त सारणी तत्त्वों के परमाणु संख्या के आरोही क्रम में सजाया गया है। अगर एक तत्त्व Mg (परमाणु संख्या 12) है तो आवर्त सारणी में ऐलुमिनियम परमाणु संख्या 13 को एक ही आवर्त में रखा गया है। जबकि Mg समूह 2 में और ऐलुमिनियम समूह 13 में। Mg का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (2,8,2) है और Al का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (2,8,3) है। आवर्त में लगातार बायीं से दायीं ओर जाने पर संयोजकता इलेक्ट्रॉन में क्रमानुसार 1 इलेक्ट्रॉन की वृद्धि होती है। इसी प्रकार एक समूह (2) में Mg (12) और कैल्सियम परमाणु संख्या (20) लिया जाए तो इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (2,8,2) और (2,8,8,2) प्राप्त होता है। इन्हें एक समूह में रखा गया है, लेकिन Mg में तीन कोश और Cu में चार कोश प्राप्त है। दोनों तत्त्वों की संयोजकता समान (2) है। लेकिन Mg का परमाणु साइज Ca के परमाणु साइज से छोटा है। अतः इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर उनके परमाणु संख्या को ध्यान में रखकर तत्त्वों को आवर्त सारणी में स्थान दिया गया है। अतः तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का आधुनिक आवर्त सारणी तत्त्वों की स्थिति से संबद्ध है। किसी भी तत्त्व को आवर्त सारणी में देखकर उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।


10. मेंडलीव के आवर्त सारणी की विसंगतियों को लिखें।

उत्तर⇒ मेंडलीव के आवर्त सारणी की विसंगतियाँ निम्न हैं –

(i) निश्चित रूप से आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का नियत स्थान नहीं दिया जा सका है। यह मेंडलीव के आवर्त सारणी की पहली कमी थी। उन्होंने अपनी सारणी में हाइड्रोजन को उचित स्थान नहीं दे सके।
(ii) मेंडलीव आवर्त सारणी में समस्थानिकों और नोबल गैसों के लिए कोई स्थान नहीं दिया गया।
(iii) मेंडलीव आवर्त सारणी में एक तत्त्व से दूसरी तत्त्व की ओर बढ़ने पर परमाणु द्रव्यमान नियमित रूप से नहीं बढ़ते। इसलिए यह अनुमान लगाना होगा कि दो तत्त्वों के बीच कितने तत्त्व खोजे जा सकते हैं। जब भारी तत्त्वों पर विचार करते हैं तो कठिनाई उत्पन्न हो जाती है।


11. मेंडलीफ ने तत्त्वों का वर्गीकरण किस आधार पर किया ?

उत्तर⇒ मेंडलीफ ने अपनी सारणी में तत्त्वों को उनके मूल गुणधर्म, परमाणु द्रव्यमान तथा रासायनिक गुणधर्मों में समानता के आधार पर व्यवस्थित किया।


12. डॉबेराइनर के तत्त्वों के वर्गीकरण की क्या सीमाएँ थीं ?

उत्तर⇒
(i) उस समय तक ज्ञात सभी तत्त्वों का वर्गीकरण त्रिक के आधार पर नहीं हो सका।
(ii) यह त्रिक नियम कुछ ही तत्त्वों तक सीमित रहा।
(iii) उस समय तक ज्ञात तत्त्वों में केवल तीन त्रिक ही ज्ञात हो सके।


13. आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु त्रिज्या क्यों घटती है ?

उत्तर⇒ नाभिक में आवेश के बढ़ने से यह इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर खींचता है जिससे परमाणु का आकार घटता है और इसकी परमाणु त्रिज्या घट जाती है।


14. उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया है ?

उत्तर⇒ उत्कृष्ट गैसें He, Ar, Ne आदि के परमाणु क्रमांक क्रमश: 2, 18, 10 हैं। इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (2), (2, 8, 8), (2,8) है। इनकी संयोजकताएँ शून्य हैं अतः इन्हें अलग समूहों में रखा गया क्योंकि इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास भिन्न-भिन्न हैं।


15. आपके अनुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूहों में क्यों रखा गया ?

उत्तर⇒ चूँकि ये गैसें मेंडलीफ आवर्त सारणी के बनने के काफी बाद पाया गया, जिसे सारणी में खाली जगहों में रखा गया। सभी गैसें अभिक्रियाशील थे, अतः उन्हें एक अलग समूह में रखना उचित था।


16. समूह में इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति किस तरह बदलती है ?

उत्तर⇒ समूह में नीचे की ओर संयोजकता इलेक्ट्रॉन पर क्रिया करने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश घटता है, क्योंकि सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं। इसलिए यह इलेक्ट्रॉन सुगमतापूर्वक निकल जाते हैं।


17. समह में ऊपर से नीचे जाने पर संयोजकता किस प्रकार परिवर्तित होती है ?

उत्तर⇒ समूह में ऊपर से नीचे जाने पर तत्त्वों की संयोजकताएँ स्थिर रहती हैं। समूह 1 के तत्त्वों की संयोजकताएँ 1 और समूह 2 के तत्त्वों की संयोजकताएँ 2 होती हैं। इसी प्रकार समूह 3 और 4 के परमाणुओं की संयोजकताएँ 3 और 4 होंगी।


18. समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कैसे परिवर्तित होगी ?

उत्तर⇒ समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर अधातुओं में कोशों की संख्या बढ़ती है लेकिन संयोजकता इलेक्ट्रॉन समान रहती है। अत: इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति घटती है जबकि कोशों की संख्या बढ़ती है। अधातुओं में ऋणात्मकता की प्रवृत्ति रहती है जिससे यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवत्ति रखता है। लेकिन समह में ऊपर से नीचे आने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति घटती है क्योंकि आयनाकरण उर्जा की कमी होती है।

1. निम्नलिखित अभिक्रियाएँ क्या हैं ?
(i) संकलन अभिक्रिया  (ii) प्रतिस्थापन अभिक्रिया  (iii) एस्टरीकरण अभिक्रिया

उत्तर ⇒(i) संकलन अभिक्रिया – निकेल अथवा पैलेडियम जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में असंतृप्त हाइड्रोकार्बन, हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन देते हैं। उत्प्ररेक वे पदार्थ होते हैं जिनके कारण अभिक्रिया भिन्न दर से बढ़ती है। निकेल उत्प्रेरक का उपयोग करके साधारणतः वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में इस अभिक्रिया का उपयोग होता है। वनस्पति तेलों में साधारणतः लंबी असंतृप्त कार्बन श्रृंखलाएँ होती हैं जबकि जंतु वसा से संतृप्त-कार्बन शृंखलाएँ होती हैं।

(ii) प्रतिस्थापन अभिक्रिया – एक अभिक्रियाशील तत्त्व अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील तत्त्व के लवण से तत्त्व को विस्थापित करता है, इन्हें विस्थापन अभिक्रिया कहा जाता है। जैसे—कॉपर सल्फेट के विलयन में लोहे की कील डालने पर लोहे के कील द्वारा कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर धातु को अलग करता है। लोहे के कील पर Cu जमा होने से यह भूरे रंग का हो जाता है और कॉपर सल्फेट के नीले रंग मलीन हो जाते हैं।

Fe(s) + CuSO4(aq.) → Feso4(aq.) + Cu (s)

rasayanik abhikriya avam samikaran kaksha 10

(iii) एस्टरीकरण अभिक्रिया – एथेनॉइक अम्ल और एथेनॉल की अभिक्रिया किसी अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में करायी जाती है तो एस्टर का निर्माण होता है। इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण अभिक्रिया कही जाती है।


2. द्विविस्थापन अभिक्रिया से क्या समझते हैं ? एक उपयुक्त रासायनिक समीकरण देकर इसकी पुष्टि कीजिए।

उत्तर ⇒ वे अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है उन्हें द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं। एक परखनली में सोडियम सल्फेट का विलयन लिया जाता है। पुनः उतनी मात्रा में बेरियम क्लोराइड का विलयन लेकर उसमें मिला दिया जाता है। देखने पर एक श्वेत रंग का अवक्षेप प्राप्त होता है। इस अविलेय पदार्थ को अवक्षेप कहा जाता है।
ऐसा इसलिए होता है कि Ba2+ तथा SOकी अभिक्रिया से BaSO4 का अवक्षेप का निर्माण होता है।

एक अन्य उत्पाद सोडियम क्लोराइड का भी निर्माण होता है जो विलयन में ही रहता है।

rasayanik abhikriya evam samikaran question answer

3. संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है ? रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है ?

examole

उत्तर ⇒संतुलित रासायनिक समीकरण में रासायनिक अभिक्रिया के पहले एवं उसके पश्चात् प्रत्येक तत्त्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है। असंतुलित (कंकाली) रासायनिक समीकरण में अभिक्रिया के पहले और बाद के उत्पादों में परमाणुओं की संख्या बराबर नहीं होती है। यह द्रव्य के अनश्वरता के सिद्धांत का पालन नहीं करता है। रासायनिक समीकरण को संतुलित रखने पर यह पता चलता है कि अभिकारकों के कितने-कितने आयतन मिलकर अभिक्रिया करते हैं और इनसे कितने आयतन उत्पाद पैदा होते हैं।उपर्युक्त रासायनिक समीकरण संतुलित है और इससे यह पता चलता है कि 2 आयतन H और 1 आयतन 0 मिलकर 2 आयतन जल का निर्माण करता है। दूसरा, समीकरण से यह भी स्पष्ट है कि 2g H और 32g O आपस में संयोग कर 36 g जल का निर्माण करता है। लेकिन कंकाली रासायनिक समीकरण से यह सूचना अप्राप्त है। यही कारण है कि रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना आवश्यक है।


4. वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया को स्वच्छ रेखाचित्र द्वारा एक क्रियाकलाप दीजिए।

जल का विधुत अपघटन

उत्तर ⇒ क्रियाकलाप – एक प्लास्टिक का मग लिया जाता है जिसकी तली में दो छिद्र करके रबड़ का डॉट लगा दिया जाता है। इन छिद्रों से होकर कार्बन इलेक्ट्रोड लगा दिया जाता है। इन इलेक्ट्रोडों को 6 वोल्ट की बैटरी से जोड़ दिया जाता है। मग में इतना जल डाला जाता है कि । इलेक्ट्रोड इसमें पूर्णतः डूब जाए। जलमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की कुछ बूंदे ऑक्सीजन हाइड्रोजन डाल दी जाती हैं। जल से भरी दो अंशांकित परखनलियों को इलेक्ट्रोडों पर उलट के रख दिया जाता है । अब विधुत धारा पर्बाहित कर उपकरण को थोड़ी देर छोड़ दिया जाता है । दोनों इलेक्ट्रोडों पर बुलबुले बनते हुए देखे जाते हैं। ये बुलबुले अंशांकित नली में जल का विद्युत अपघटन जल को नीचे विस्थापित कर नली में इकट्टे होते हैं।

दोनों नलियों में इकट्ठे गैस के आयतन को देखने पर पता चलता है कि एक का आयतन दूसरे का दुगुना है। कैथोड पर एकत्रित गैस का आयतन एनोड पर एकत्रित गैस के आयतन का दुगुना है। दोनों परखनलियों को सावधानीपूर्वक हटा लिया जाता है और जलती दियासलाई की तीली से इसकी परीक्षा की जाती है। एनोड पर की गैस दियासलाई की जलती तीली को काफी तेजी से जलाता है अर्थात् यह गैस जलन का पोषण करता है। कैथोड पर की गैस जलन का पोषण नहीं करता है बल्कि यह विस्फोट के साथ जल उठता है। कैथोड पर उत्पन्न गैस हाइड्रोजन और एनोड पर उत्पन्न गैस ऑक्सीजन है।
अतः जल के अपघटन से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस निर्मित होते हैं।


5. एक क्रियाकलाप द्वारा विस्थापन अभिक्रिया को दर्शाइए।
उत्तर ⇒
rasayanik abhikriya avam samikaran ka objectiveलोहे की तीन कीलें लिये जाते हैं। तब इन्हें रेगमाल से रगड़कर साफ कर दिया जाता है। दो परखनली (A) और (B) ली जाती है। इसमें 10 ml कॉपर सल्फेट का विलयन रखा जाता है। दोनों कीलों को धागे से बांध कर सावधानीपूर्वक परखनली B के कॉपर सल्फेट के विलयन में लगभग 20 मिनट रखने के बाद बाहर निकाला जाता है।

कॉपर सल्फेट की विलियन परख नालो

अब परखनली (A) और (B) में विलयन के नीले रंग की तुलना कीजिए पुनः कीलों की तुलना उस कील से कीजिए जो बाहर रखी हुई थी।आप पायेंगे कि कॉपर सल्फेट का विलयन का रंग नीला मलीन हो गया तथा लोहे के कील का रंग भूरा हो गया है।

Fe(s) + CuSO4 (aq.) → FeSO4 (aq.) + Cu(s)

इस अभिक्रिया में लोहे ने दूसरे तत्त्व कॉपर को कॉपर सल्फेट के विलयन से विस्थापित कर दिया है। लोहे के कील को भूरे रंग के होने का कारण है कि इसकी
सतह पर कॉपर की परत जमा हो गयी है। अतः विस्थापन अभिक्रिया को इस क्रियाकलाप द्वारा समझना आसान है।


6. निम्न पदों का वर्णन करें तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दें:
(a) संक्षारण (b) विकृतगंधिता।
अथवा, संक्षारण क्या है ? संक्षारण रोकने के उपाय बताइए।

उत्तर ⇒(a) संक्षारण – लोहे की बनी हुई वस्तुएँ चमकीली होती हैं लेकिन कुछ समय पश्चात् उन पर लालिमायुक्त भूरे रंग की परत चढ़ जाती है। आमतौर पर इस प्रक्रिया को लोहे पर जंग लगना कहते हैं । कुछ अन्य धातुओं में भी ऐसा ही परिवर्तन होता है। जब कोई धातु अपने आसपास अम्ल, नमी आदि के संपर्क में आती है तब ये संक्षारित होती हैं और इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। चाँदी के ऊपर काली पर्त और ताँबे के ऊपर हरी पर्त चढ़ना, संक्षारण के उदाहरण हैं।
संक्षारण के कारण कार के ढांचे, पुल, जहाज तथा धातु विशेषकर लोहे से बनी वस्तुओं की बहुत क्षति होती है।

(b) विकृतगंधिता – वसायुक्त अथवा तैलीय खाद्य सामग्री जब लंबे समय तक रखा जाता है तब उसका स्वाद या गंध में परिवर्तन आ जाता है। उपचयित होने पर तेल और वसा विकृत गंधी हो जाते हैं तथा उनके स्वाद तथा गंध बदल जाते हैं । वायुरोधी बर्तनों में खाद्य सामग्री रखने से उपचयन की गति धीमी हो जाती है। क्या आप जानते हैं कि चिप्स बनाने वाले चिप्स की थैली को नाइट्रोजन जैसे गैस से युक्त कर देते हैं ताकि चिप्स का उपचयन न हो सके और उन्हें देर तक संरक्षित रखा जा सके।


7. वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्य कहा जाता है ? इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।

उत्तर ⇒ वे अभिक्रियाएँ जिनमें दो या अधिक पदार्थ संयुक्त होकर केवल एक पदार्थ बनाते हैं, संयोजन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं तथा वे अभिक्रियाएँ जिनमें यौगिक दो अधिक सरल पदार्थों में टूटता है, वियोजन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। अतः वियोजन अभिक्रिया, संयोजन अभिक्रिया के बिल्कुल विपरीत है।
उदाहरण -:
(i) हाइड्रोजन, ऑक्सीजन में जलकर जल बनाती है।

संयोजन

जल में जब विधुत धारा प्रवाहित की जाती है, यह वियोजित होकर हाइड्रोजन गैसऔर ऑक्सीजन गैस देता है।

अपघटन
सोडियम धातु क्लोरिन में 

(ii) सोडियम धातु क्लोरिन में  जलकर सोडियम क्लोराइड बनाता है।

गलित सोडियम क्लोराइड में जब विधुत धारा प्रवाहित की जाती है, यह वियोजित होकर सोडियम धातु और क्लोरीन गैस देता है ।

सोडियम धातु क्लोरीन

8. विस्थापन एवं द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अंतर है ? इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखें।

 4. विस्थापन एवं द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अंतर है ? इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखें। उत्तर-विस्थापन अभिक्रिया - जब कोई एक तत्त्व दूसरे तत्त्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है तो वायु विस्थापन अभिक्रिया होती है। उदाहरण

उत्तर ⇒ विस्थापन अभिक्रिया – जब कोई एक तत्त्व दूसरे तत्त्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है तो वायु विस्थापन अभिक्रिया होती है।
उदाहरण -:

द्विविस्थापन अभिक्रिया – द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो अलग-अलग परमाण या परमाणुओं के समूह (आयन) का आपस में आदान-प्रदान होता है।

द्विविस्थापन अभिक्रिया

उपरोक्त उदाहरण विस्थापन और द्विविस्थापन अभिक्रियाओं का अंतर स्पष्ट करते हैं।

क्लास 10th का रासायनिक अभिक्रिया एवं समीकरण


9. रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार उदाहरण सहित लिखें।

उत्तर ⇒रासायनिक अभिक्रिया के दौरान किसी एक तत्त्व का परमाणु दूसरे तत्त्व के परमाणु में नहीं बदलता है। न ही कोई परमाणु मिश्रण से बाहर जाता है या बाहर से मिश्रण में आता है। वास्तव में, किसी रासायनिक अभिक्रिया में परमाणुओं के आपसी आबंध के टूटने और जुड़ने से नए पदार्थों का निर्माण होता है।

(a) संयुक्त आभाक्रया – ऐसी अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं उसे संयुक्त अभिक्रिया कहते हैं ।
जैसे – कैल्सियम ऑक्साइड जल के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करके बुझे हुए चूने (कैल्सियम हाइड्रोक्साइड) का निर्माण करके अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करता है।

जैसे- CaO(s) + H2O (l) → + Ca(OH)2(aq)

      (बिना बुझा हुआ चूना)                 (बिना बुझा हुआ चूना)

इस अभिक्रिया में कैल्सियम ऑक्साइड तथा जल मिलकर एकल उत्पाद, कैल्सियम हाइड्रोक्साइड बनाते हैं।

वियोजन अभिक्रिया

(b) वियोजन अभिक्रिया – वह अभिक्रिया जिसमें एकल अभिकर्मक टूटकर छोटे-छोटे उत्पाद प्रदान करता है।
वियोजन अभिक्रिया के उदाहरण –

विस्थापन अभिक्रिया – जब कोई तत्त्व दुसरे तत्त्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है तो वह विस्थापन अभिक्रिया होती है।
उदाहरण-

विस्थापन अभिक्रिया

(d) द्विविस्थापन अभिक्रिया – द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो अलग-अलग परमाणु या परमाणुओं के समूह का आपस में आदान-प्रदान होता है।

 rasaynik abhikriya and samikaran

उदाहरण-:   

1. अम्ल और क्षारक में अंतर बतावें।

उत्तर⇒

अम्लक्षारक
(i) इसका स्वाद खट्टा होता है।(i) इसका स्वाद खारा होता है।
(ii) यह नीले लिटमस पत्र को लाल करता है।(ii) यह लाल लिटमस पत्र को नीला करता है।
(ii) यह मेथिल ऑरेंज को लाल कर देता है।(iii).यह मेथिल ऑरेंज को पीला कर देता है।
(iv) यह जल में विलेय होकर हाइड्रोजन आयन (H+)देता है।(iv) यह जल में विलेय होकर हाइड्रॉक्साइड (OH) आयन देता है।
(v) यह क्षारक को उदासीन कर देता है।(v) यह अम्ल को उदासीन कर देता है।
(vi) इसका pH मान 7 से कम होता है।(vi) इसका pH मान 7 से अधिक होता है।

2. साधारण नमक का उत्पादन कैसे होता है ? इसे रासायनिक उद्योग का कच्चा माल क्यों कहते हैं ?

साधारण नमक का उत्पादन कैसे होता है इसे रासायनिक उद्योग का कच्चा माल क्यों कहते हैं

उत्तर⇒ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन आपस | में अभिक्रिया कर सोडियम क्लोराइड नमक बनाता है।

यह लवण उदासीन है।
समुद्री जल में कई प्रकार के लवण घुले होते हैं। इन लवणों से सोडियम क्लोराइड प्राप्त किया जाता है।
इस प्रकार प्राप्त साधारण नमक हमारे दैनिक उपयोग के कई पदार्थों, जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड, बेकिंग सोडा, वाशिंग सोडा, विरंजक चूर्ण आदि के लिए | यह एक महत्त्वपूर्ण कच्चा पदार्थ है।


3. धोनेवाले सोडा का निर्माण कैसे किया जाता है ? इसके तीन उपयोगों को लिखें।

उत्तर⇒ बेकिंग सोडा को गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट (धोने वाला सोडा) का निर्माण होता है।

धोनेवाले सोडा का निर्माण कैसे किया जाता है इसके तीन उपयोगों को लिखें।

सोडियम कार्बोनेट में क्रिस्टलन जल के 10 अणु होते हैं। अतः इनके क्रिस्टल का अणुसूत्र Na2CO3 10H2O है।

धोनेवाले सोडा के तीन उपयोग :

(i) सोडियम कार्बोनेट का उपयोग काँच, साबुन एवं कागज उद्योगों में होता है।

(ii) जल की स्थायी कठोरता दूर करने में भी इसका उपयोग होता है

(iii) बोरेक्स जैसे सोडियम यौगिक के बनाने में इसका उपयोग है।


4. वाशिंग सोडा अथवा सोडियम कार्बोनेट का उत्पादन कैसे किया जाता है ? संक्षेप में अभिक्रिया समेत लिखें। इसके उपयोग भी लिखें।

उत्तर⇒ सोडियम कार्बोनेट का उत्पादन साल्वे विधि से किया जाता है। इस विधि में सोडियम क्लोराइड के संतप्त घोल को अमोनिया से संतृप्त कर उसमें कार्बन डायऑक्साइड गैस प्रवाहित किया जाता है। इससे सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट का अवक्षेप प्राप्त होता है।

NH3 + H2O + CO2 → NH4HCO3

NaCl + NH4HCO3 → NaHCO3 ↓+ NH4Cl2

अवक्षेप को छानकर सुखा लिया जाता है। इसे गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है। फिर इसका रवाकरण कर वाशिंग सोडा प्राप्त किया जाता है।

वाशिंग सोडा अथवा सोडियम कार्बोनेट का उत्पादन कैसे किया जाता है संक्षेप में अभिक्रिया समेत लिखें। इसके उपयोग भी लिखें।

अमोनिया और सोडा वाटर (Co, का जलीय घोल) को कच्चे माल के रूप में प्रयोग में लाने के कारण इस विधि को अमोनिया-सोडा विधि कहा जाता है।

इसका उपयोग :

(i) कपड़ा धोने में
(ii) जल की अस्थायी कठोरता दूर करने में
(iii) अभिकर्मक के रूप में।


5. प्लास्टर ऑफ पेरिस के निर्माण की विधि एवं उपयोग लिखें।

प्लास्टर ऑफ पेरिस के निर्माण की विधि एवं उपयोग लिखें।

उत्तर⇒ जिप्सम को 373°K पर गर्म करने पर यह जल के अणओं का त्याग कर कैल्सियम सल्फेट अर्द्धहाइड्रेट 6. प्लास्टर ऑफ पेरिस के निर्माण की विधि एवं उपयोग लिखें। उत्तर—जिप्सम को 373°K पर गर्म करने पर यह जल के अणओं का त्याग कर कैल्सियम सल्फेट अर्द्धहाइड्रेट ( CasO, HO) बनाता है। _ caso. 21,0-case, Ho+H, ऊष्मा 373°K इसका उपयोग : . को डॉक्टर टूटी हड्डियों को सही जगह पर स्थिर रखने के लिए इसका उपयोग करते हैं। (ii) इसका उपयोग खिलौना बनाने में होता है। बनाता है।

इसका उपयोग :

(i) डॉक्टर टूटी हड्डियों को सही जगह पर स्थिर रखने के लिए इसकाउपयोग करते हैं।

(ii) इसका उपयोग खिलौना बनाने में होता है।


6. जलीय विलयन में अम्ल और क्षारक का क्या व्यवहार होता है ?

उत्तर⇒ जल की उपस्थिति में HCl में हाइड्रोजन आयन (H+) उत्पन्न होते हैं। जल की अनुपस्थिति में HCl अणुओं से H+ आयन पृथक नहीं हो सकते हैं।

HCl+ H2O → H3O++Cl

हाइड्रोजन आयन स्वतंत्र रूप में नहीं रह सकते लेकिन ये जल के अणुओं के साथ मिलकर रह सकते हैं। अतः हाइड्रोजन आयन को सदैव H+ (aq.) या हाइड्रोनियम आयन (H3O+) से दर्शाया जाता है। यह विद्युत का चालन करता है। किसी क्षारक को जल में घोलने पर हाइड्रोक्सिल आयन (OH) उत्पन्न होते हैं।

जलीय विलयन में अम्ल और क्षारक का क्या व्यवहार होता है

जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं।


7. उत्फुलनशील, प्रस्वेदी और द्रव्याग्राही लवण से,क्या समझते हैं ? समझाकर लिखें।

उत्तर⇒ उत्कुलन लवण : कुछ रवायुक्त लवण को वायु में छोड़ देने पर अपना रवाजल को खोकर चूर्ण के समान लवण बच जाते हैं। ऐसे लवण उत्फुल लवण कहे जाते हैं।

जैसे Na2Co3 10H2O, Na2so4 10H2O आदि।

प्रस्वेदी लवण : कुछ लवण हवा में छोड़ देने पर नमी सोख कर पसीज जाते हैं और धीरे-धीरे एक जलीय घोल के रूप में परिणत हो जाते हैं। ऐसे लवण प्रस्वेदी कहलाते हैं। जैसे कैल्सियम क्लोराइड, जिंक क्लोराइड आदि।

द्रव्यग्राही लवण – कुछ रवादार लवण वायु से जल को सोख लेते हैं लेकिन इतना नहीं सोखते हैं कि वे गीले हो जाएँ।
ऐसे लवण द्रव्यग्राही लवण कहलाते हैं जैसे नमक में अशुद्धि के रूप में थोडा मैगनीसियम क्लोराइड होता है जिससे यह पसीज जाता है।


8. अल्कोहल एवं ग्लूकोज जैसे यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं लेकिन इनका वर्गीकरण अम्ल की तरह नहीं होता है। एक क्रियाकलाप द्वारा इसे साबित कीजिए।

उत्तर⇒ क्रियाकलाप – एक बीकर लिया जाता है। इसके बीचों-बीच एक रबर का कॉर्क रखकर इसमें दो कील ठोक दिया जाता है। दोनों कीलों को 6 वोल्ट की बैट्री से जोड़ा जाता है। परिपथ में एक बल्ब और स्वीच भी लगा दिया जाता है। बीकर में अल्कोहल का विलयन लिया जाता है। विधुत-धारा प्रवाहित की जाती है। बल्ब नहीं जलता है। अगर अल्कोहल विलयन की जगह ग्लूकोज विलयन लेकर प्रयोग को दुहराया जाता है तो भी बल्ब नहीं जलता है। इस प्रयोग से यह निष्कर्ष निकलता है कि विलयन से कोई विधुत-धारा नहीं बहती है।

10. अल्कोहल एवं ग्लूकोज जैसे यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं लेकिन इनका वर्गीकरण अम्ल की तरह नहीं होता है। एक क्रियाकलाप द्वारा इसे साबित कीजिए। उत्तर-क्रियाकलाप - एक बीकर लिया जाता है। इसके बीचों-बीच एक रबर का कॉर्क रखकर इसमें दो कील ठोक दिया जाता है। दोनों कीलों को 6 वोल्ट की बैट्री से जोड़ा जाता है। परिपथ में एक बल्ब और स्वीच भी लगा दिया जाता है। बीकर में अल्कोहल का विलयन लिया जाता है। विधुत-धारा प्रवाहित की जाती है। बल्ब नहीं जलता है। अगर अल्कोहल विलयन की जगह ग्लूकोज विलयन लेकर प्रयोग को दुहराया जाता है तो भी बल्ब नहीं जलता है। इस प्रयोग से यह निष्कर्ष निकलता है कि विलयन से कोई विधुत-धारा नहीं बहती है। अगर इन विलयनों की जगह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लेकर विद्युत-धारा प्रवाहित की जाती है तो बल्ब जल उठता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन आयन (H') उत्पन्न होते हैं। विलयन में विद्युत-धारा का प्रवाह आयनों द्वारा होता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विद्युत-धारा प्रवाहित करने पर ग्लूकोज विलयन एवं अल्कोहल विलयन पर (H') आयन नहीं देते हैं। H+ आयन देने वाले विलयन ही अम्लीय होता है। ग्लूकोज और अल्कोहल में हाइड्रोजन है, लेकिन विलयन आयन नहीं उत्पन्न करते हैं। ___ यही कारण है कि ग्लूकोज और अल्कोहल को अम्ल की श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया गया है।

अगर इन विलयनों की जगह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लेकर विद्युत-धारा प्रवाहित की जाती है तो बल्ब जल उठता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन आयन (H’) उत्पन्न होते हैं। विलयन में विद्युत-धारा का प्रवाह आयनों द्वारा होता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विद्युत-धारा प्रवाहित करने पर ग्लूकोज विलयन एवं अल्कोहल विलयन पर (H’) आयन नहीं देते हैं। H+ आयन देने वाले विलयन ही अम्लीय होता है। ग्लूकोज और अल्कोहल में हाइड्रोजन है, लेकिन विलयन आयन नहीं उत्पन्न करते हैं। ___ यही कारण है कि ग्लूकोज और अल्कोहल को अम्ल की श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया गया है।


9. क्षारकों/क्षारों के रासायनिक गुण संक्षेप में लिखिए।

उत्तर⇒ क्षारकों/क्षारों के महत्त्वपूर्ण रासायनिक गुण निम्न हैं

(a) धातुओं से क्रिया—–क्षार कुछ धातुओं से क्रिया कर H गैस उत्पन्न करते हैं।

Zn + 2NaOH → Na2O + H 2 (g)

सोडियम जकेट

2AI+ 2NaH+ 2H2O → 2NaAlO2+3H

सोडियम अलुमिनेट 

(b) वायु से क्रिया- कुछ क्षार वायु में उपस्थित CO2 से क्रिया करते हैं।

2NaOH + CO2 → Na2CO3

2KOH +  CO2 → K2CO3

(c) अम्लों से क्रिया – क्षारक/क्षार अम्लों से क्रिया कर लवण तैयार करते हैं।

NaOH + HCl → NaCl H2o

Fe (OH)2+2HCl → FeCl2 + 2H2O

Ca (OH)2+2HCl → CeCl2 + 2H2O

(d) लवणों से क्रिया – तांबा, लोहा, जिंक आदि के लवण क्षारों/क्षारकों से क्रिया करते हैं और अघुलनशील धात्विक हाइड्रॉक्साइड तैयार करते हैं।

ZnSO4 + 2NaOH → Na2SO+ Zn (OH)

CuSO4+2NH4OH → (NH4)2SO4 + Cu (OH)2 ↓

FeCl+ 3NaOH → 3NaCl + Fe (OH)3 ↓


10.अम्ल की तरह नहीं होता है । एक क्रियाकलाप के द्वारा साबित कीजिए।

उत्तर⇒ यद्यपि ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज जैसे यौगिकों में हाइड्रोजन होती है पर वे विलयन में आयनीकृत नहीं होते और H+ आयन उत्पन्न नहीं करते यह इस तथ्य से साबित होता है कि उनके विलयन विद्युत् चालन नहीं करते ।

ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज जैसे.यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं लेकिन इनका वर्गीकरण अम्ल की तरह नहीं होता है । एक क्रियाकलाप के द्वारा साबित कीजिए।

क्रिया – कलाप – एक बीकर में ऐल्कोहॉल, ग्लूकोज आदि का विलयन लीजिए। एक कार्क पर दो कील लगाकर कॉर्क को बीकर में रख दीजिए । कीलों को 6 वोल्ट की एक बैटरी के दोनों टर्मिनलों के साथ एक बल्ब और स्विच के माध्यम से जोड़ दीजिए। अब विद्युत् धारा प्रवाहित कीजिए । विद्युत् चालन नहीं हुआ।


11. चूना कैसे बनाया जाता है ?

उत्तर⇒ कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) ही चूना है जो कि चूने के पत्थर (CaCO3) को गर्म करके बनाया जाता है –

चुने का पत्थर (CaCo3) चूने की भट्टी के ऊपर से डाला जाता है। भट्टी के बीच में उपस्थित अग्नि बक्सों में कोयला जलाकर भट्टी को गर्म किया जाता है। गर्म होने पर चूने के पत्थर का अपघटन होता है और कार्बन डाइऑक्साइड गैस     अन्य गर्म गैसों के साथ ऊपर की ओर बाहर निकल जाती है तथा कैल्सियम ऑक्साइड (चूना) भट्टी के फर्श से एकत्रित कर लिया जाता है।

ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज जैसे.यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं लेकिन इनका वर्गीकरण

12. दैनिक जीवन में pH का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर⇒ pH का हमारे दैनिक जीवन में बहुत अधिक महत्त्व है –

(i) मानव और जंतु जगत में – हमारे शरीर की अधिकांश क्रियाएँ 7.0 से 7.8 pH परास के बीच काम करती हैं। हम इसी संकीर्ण परास में ही जीवित रह सकते हैं। हमारे रक्त, आँसुओं, लार आदि का pH लगभग 7.4 होता है। यदि यह 7.0 से कम हो जाता है या 7.8 से बढ़ जाता है तो जीवन असंभव-सा हो जाता है। वर्षा के जल से pH का मान जब 7 से कम होकर 5.6 हो जाता है तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं । अम्लीय वर्षा का जल जब नदियों में बहता है तो नदी के जल का pH मान कम हो जाता है जिस कारण जलीय जीवधारियों का जीवन कठिन हो जाता है।
.
(ii) पेड़-पौधों के लिए पेड – पौधों की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए मिट्टी के pH परास की विशेषता बनी रहनी चाहिए । यदि यह अधिक अम्लीय या क्षारीय हो जाए तो उपज पर कुप्रभाव पड़ता है।

(iii) पाचन तंत्र – हमारे पेट में HCl उत्पन्न होता रहता है जो हमें बिना हानि पहुँचाए भोजन के पाचन में सहायक होता है । अपच की स्थिति में इसमें अम्ल की मात्रा अधिक बनने लगती है जिस कारण पेट में दर्द और जलन अनुभव होता है। इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए ऐंटैसिड जैसे क्षारकों का प्रयोग करना पड़ता है। इसके लिए प्रायः मिल्क ऑफ मैग्नीशियम जैसे दुर्बल क्षारक का प्रयोग करना आवश्यक हो जाता है।

(iv) दंत-क्षय – हमारे मुँह के pH मान 5.5 से कम होने पर का क्षय शुरू हो जाता है। हमारे दाँत कैल्सियम फॉस्फेट से बने होते हैं जो शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है। यह जल में नहीं घुलता पर मुँह की pH मान 5.5 से कम होने पर यह नष्ट होने लगता है। मुँह में उपस्थित जीवाणु, अवशिष्ट शर्करा और खाद्य पदार्थों के निम्नीकरण से अम्ल उत्पन्न होते हैं। इनसे छुटकारा पाने के लिए क्षारकीय दंत-मंजन का प्रयोग किया जाना चाहिए । इससे अम्ल की अधिकता उदासीन हो जाती है और दाँत क्षय से रोके जा सकते हैं।

(v) जीव-जंतुओं के डंक से रक्षा – जब जीव जंतु कभी डंक मार देते हैं तो वे हमारे शरीर में विशेष प्रकार के अम्ल छोड़ देते हैं। मधुमक्खी भिरंड, चींटी आदि मेथेनॉइक अम्ल हमारे शरीर में डंक के माध्यम से पहुंचा देते हैं। इससे उत्पन्न पीड़ा से मुक्ति के लिए डंक मारे गए अंग पर बेकिंग सोडा जैसे दुर्बल क्षारक का प्रयोग करना चाहिए।

(VI) विशष पाधों से रक्षा – नेटल (Nettle) पौधे के पत्तों पर डंकनमा बाल . हात है । उन्हें छू जाने से डंक जैसा दर्द होता है। इन बातों से मेथैनॉइक अम्ल का स्राव हाता है जो दर्द का कारण बनता है। पारंपरिक तौर पर इस पीडा मुक्ति डॉक पौधे की पत्तियों को डंक वाले स्थान पर रगडकर पाई जाती है।

1. धातुओं के रासायनिक गुणधर्मो को लिखें।

उत्तर ⇒ धातुएँ विद्युत रासायनिक धनात्मक तत्त्व होती हैं। इनको विद्युत धनात्मक तत्त्व इसलिए कहते हैं, क्योंकि ये इलेक्ट्रॉन त्याग कर आयनीकृत होती हैं तथा धनायन निर्मित करती हैं।

उदाहरणार्थ  –  K  →  K+ + e, Ca  →  Ca2+ 2e

धातुओं के विधुत धनात्मक अभिलक्षण द्वारा कुछ विशेष अभिलाक्षणिक रासायनिक गुणधर्म उत्पन्न होते हैं।

(a)धातुओं की अभिक्रिया ऑक्सीजन के साथ-धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर धातु के ऑक्साइड बनाती हैं।
2Mg + O2 → 2Mgo
धातु के ऑक्साइड की प्रकृति क्षारकीय होती है लेकिन एलुमीनियम, जिंक की ऑक्साइड अम्लीय और क्षारकीय दोनों होती है। इस प्रकार के धातु ऑक्साइडों को उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं।
अधिकांश धातु ऑक्साइड जल में अघुलनशील हैं लेकिन कुछ धातु के ऑक्साइड तीव्रता से अभिक्रिया कर क्षार बनाते हैं।
जैसे – Na2O + H2O
K2O + H2O → 2KOH

(b) धातु की अभिक्रिया जल से-धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया कर संगत धातु हाइड्रॉक्साइड अथवा ऑक्साइड बनाते हैं और हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।

जैसे- 2K + 2H2O → 2KOH + H2
2Na + 2H2O → 2NaOH + H2

कुछ धातुएँ जल से मंद गति से अभिक्रिया करती हैं।
जैसे — Ca + 2H2O → Ca(OH)2 +H2

मैग्नीशियम गर्म जल से अभिक्रिया कर मैगनीशियम हाइड्रोक्साइड तथा H 2 गैस मुक्त करती है।
2Mg + 2H2O → 2Mg(OH)2 + H2

Al, Zn और Fe जल के भाप से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।
2Al + 3H 2O → Al2O3 +3H2O
3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2O

(c) धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया कर धातु के लवण और हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।
Mg + 2HCL → MgCl2 + H2
Zn + 2HCl → ZnCl2 +H2

धातुएँ HNO3 से अभिक्रिया करता और H2 गैस मुक्त नहीं करता है।

(d) धातुएँ क्लोरीन संग अभिक्रिया कर धातु के क्लोराइड बनाता है।
Ca + Cl2 → CaCl2

(e) धातुएँ हाइड्रोजन के साथ विशेष परिस्थितियों में अभिक्रिया कर धातु के हाइड्रॉइड बनाता है।
जैसे – 2Na + H2 → 2NaH
Ca + H2 → CaH2


2. अधातुओं के रासायनिक गुणधर्मों को लिखें।

उत्तर ⇒ अधातुएँ इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर ऋणायन बनाता है।
Cl + e → Cl
O + 2e → O2-
S + 2e → S2-

(a) ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया – अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग कर ऑक्साइड बनाती हैं। इनके ऑक्साइड अम्लीय अथवा उदासीन होते हैं। अधातुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है और अधातु ऑक्साइड बनाते हैं। अतः इन्हें सहसंयोजी यौगिक कहते हैं।
C(s) + O 2(g) → Co2(g)
S(s) + O 2(g) → SO2(g)

Co2 और SO2 दोनों ही अम्लीय ऑक्साइड है अतः ये जल में घुलकर अम्ल बनाते हैं।
CO2 + H2O → H2CO3
 कार्बनिक अम्ल
So2 + H2O → H2SO3
 सल्फ्यूरसअम्ल

CO एवं N2O उदासीन ऑक्साइड के उदाहरण हैं। लिटमस पत्रों के प्रति उदासीन हैं।

(b) अम्लों के साथ अभिक्रिया – अधातुएँ तनु अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती हैं। तनु अम्लों से अधातुओं द्वारा हाइड्रोजन तभी विस्थापित हो सकती है जब अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न प्रोटॉनों (H +) को इलेक्ट्रॉनों की पूर्ति की जाए।

H2SO4 (aq.) → 2H + (aq.) + SO42 (aq.)
2H + (aq.) + 2e  → H2(g)

अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्राही होती हैं। इनके द्वारा प्रोटॉनों (H +) को इलेक्ट्रॉनों की पूर्ति नहीं हो सकती है। अतः अधातुएँ तनु अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर सकती है।

(c) क्लोरीन के.साथ अभिक्रिया – अधातुएँ क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके सहसंयोजी क्लोराइड निर्मित करती है। सहसंयोजी क्लोराइड सामान्यतः वाष्पशील द्रव अथवा गैस होती है। जैसे—फॉस्फोरस क्लोराइड।
P4(s) + 6Cl2(g) → 4PCI3 (g)
फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड

(d) हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया – अधातुएँ हाइड्रोजन के साथ संयुक्त होकर हाइड्राइड प्रदान करती हैं। जैसे अमोनिया (NH3), मिथेन (CH 4), हाइड्रोजन सल्फाइड (H 2S), जल (H 2O) इत्यादि।
इनके यौगिक स्थायी होते हैं जो अधातु एवं हाइड्रोजन परमाणुओं के मध्य इलेक्ट्रॉन युग्म के सहभाजन के फलस्वरूप प्राप्त होते हैं।
N2(g) + 3H 2(g) → 2NH3(g)
H2(g) + S(s) → H2S(g)


3. अयस्कों से धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त चरणों को लिखिए।

उत्तर ⇒ धातुकर्म — धातु के अयस्कों से शुद्ध धातु प्राप्त करना एवं उनका शुद्धिकरण आदि धातुकर्म कहा जाता है। अयस्क से शुद्ध धातु के निष्कर्षण के विभिन्न चरण इस प्रकार हैं -:

धातुकर्म

4. धातुओं के भौतिक गुणधर्मों को लिखें।

उत्तर ⇒ धातुओं के भौतिक गुणधर्म निम्नांकित हैं-:
(i) धात्विक चमक – प्रत्येक धातु का अपना धात्विक चमक होता है जिससे इसे पहचानने में सुविधा होती है। धातुओं में यह गुण धात्विक चमक है।

(ii) कठोरता – धातुएँ समान्यत: कठोर होती हैं आयरन, ऐलुमिनियम तथा कॉपर काफी कठोर धातएं हैं। इन्हें चाक से नहीं काटा जा सकता है। लेकिन Na, और पोटैशियम धातु मुलायम है जिसे चाकू से भी काटा जा सकता है। यह गुण कठोरता कहलाती है।

(iii) आघातवर्ध्यता एवं तन्यता – धातुओं को हथौड़े से पीटकर पतला चादर बनाया जा सकता है। धातु का यही गुण आघातवर्ध्यता कहलाता है।
धातुओं के तार खींचें जा सकते हैं। यह गुण तन्यता कहलाती है।

(iv) ऊष्मीय तथा विद्युतीय चालकता – धातु के एक सिरे को गर्म करने पर दूसरा सिरा भी गर्म हो जाता है। धातु में यह गुण ऊष्मीय चालकता कहलाता है। धातु के तार द्वारा विद्युत एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। धातुओं में यह गुण विद्युतीय चालकता कही जाती है।


5. अधातु के पाँच भौतिक गुणों को लिखिए।

उत्तर ⇒अधातुओं के गुण –

(i) अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती है। अपवाद आयोडीन।
(ii) अधातुएँ ऑक्साइड प्रदान करती हैं।
(iii) अधातु के गलनांक और क्वथनांक निम्न होते हैं।
(iv) अधिकतर अधातुएँ गैसीय अवस्था में पायी जाती हैं। कुछ अधातुएँ ठोस और द्रव अवस्था में भी पाई जाती हैं। जैसे ब्रोमीन द्रव अवस्था में और सल्फर ठोस अवस्था में रहती है।
(v) अधातुएँ जल में अल्प घुलनशील होती हैं।


6. आयनिक यौगिकों के गुणधर्मों को लिखें।

उत्तर ⇒आयनिक यौगिक के निम्नांकित गुणधर्म हैं –
(i) इसका गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होता है।
(ii) इनके धन और ऋण आयनों के बीच मजबूत आकर्षण बल के कारण ये यौगिक ठोस एवं थोड़े कठोर होते हैं।
(iii) ये यौगिक सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं। लेकिन पेट्रोल, किरोसीन आदि जैसे विलायकों में अघुलनशील होते हैं।
(iv) इस यौगिक के जलीय विलयन विद्युत के अच्छे चालक हैं, तथा आयन विपरीत इलेक्ट्रोड की ओर गमन करते हैं।


7. निम्नलिखित पदों की व्याख्या करें :
(क) खनिज (ख) अयस्क (ग) गैंग

उत्तर ⇒ (क) खनिज – भू-पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्त्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं। ये प्रायः खानों से निकाले जाते हैं।

(ख) अयस्क – वैसे खनिज जिनसे धातु का व्यावसायिक उत्पादन होता है, अयस्क कहलाते हैं। अयस्कों में धातु प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं। इससे धात का उत्पादन सरलता से कम खर्च में होता है।

(ग) गैंग – पृथ्वी से प्राप्त खनिज अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि कई अशुद्धियाँ होती हैं। धातुओं के निष्कर्षण से पहले अयस्क से अशुद्धियों को हटाना आवश्यक होता है। ये अशुद्धियाँ गैंग कहे जाते हैं। अयस्कों को गैंग से हटाने के लिए जिन प्रक्रियाओं का उपयोग होता है वे अयस्क एवं गैंग के भौतिक अथवा रासायनिक गुण धर्मों पर आधारित होते हैं। इनके पृथक्करण के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है।


8.(a) रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए।
(b) दिये गये धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम से व्यवस्थित करें।
(i) Zn (ii) Fe (iii) Ca (iv) Mg (v) K (vi) Na

उत्तर -(a)

धातुअधातु
1. धातु को वायु में गर्म करने परधातु के ऑक्साइड बनते हैं।
   4Na+O2 → 2Na2O
   4K+O2 → 2K2O
1. अधातु को वायु में तपाने पर अधातु के ऑक्साइड बनते हैं।
S + O2 → SO2
C + O2 → CO2
2. धातु के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं तथा जल के साथ अभिक्रिया कर क्षारक बनाते हैं।
Na2O + H2O → 2NaOH
                              (क्षार)
K2O +H2O → 2KOH
                           (क्षार)
2. अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं और जल के साथ अभिक्रिया कर अम्ल बनाता है।
SO2 + H2O + H2SO3
                      (सल्फ्यूरस अम्ल)
SO3 + H2O → H2SO4
                    (सल्फ्यूरिक अम्ल)
3. धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन विस्थापित करती है।
Ca + H 2SO 4 → CaSO4 + H2
Zn + 2HCL → ZnCl2 + H2
3. अधातुएँ अम्लों से अभिक्रिया नहीं करती हैं ।
4. कुछ धातुएँ जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन उत्पन्न करती है।
Ca + 2H2O → Ca(OH)2 + H2
4. अधातुएँ जल से अभिक्रिया नहीं करती हैं।

(b) K, Na, Ca, Mg, Zn, Fe


9. धातुओं का संक्षारण किन-किन कारणों से होता है ?

उत्तर ⇒ धातुओं का संक्षारण निम्न कारणों से होता है –
(i) खुली वायु में सिल्वर की वस्तुओं को कुछ दिनों के लिए छोड़ देने पर उसकी सतह काली हो जाती है। सिल्वर का वायु में उपस्थित सल्फर के साथ अभिक्रिया कर सिल्वर सल्फाइड की परत बनने के कारण ऐसा होता है।

(ii) कॉपर को आर्द्र वायु में छोड़ने पर भूरे-रंग की चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है तथा इस पर हरे रंग की परत चढ़ जाती है। यह हरा पदार्थकॉपर कार्बोनेट है।

(iii) लंबे समय तक लोहे की वस्तुओं को आर्द्र वायु में छोड़ देने पर उसकी परत भूरे रंग की हो जाती है जिसे जंग लगना कहा जाता है। धीरे-धीरेलोहे की वस्तुएँ संक्षारित होकर बर्बाद हो जाती हैं।


10. लोहा के एक प्रमुख अयस्क का नाम एवं सूत्र लिखें। इस अयस्क का सान्द्रण कैसे होता है ?

चित्र वात्य भट्टी

उत्तर ⇒लोहे के प्रमुख अयस्क हेमेटाइट Fe 2O 3 है। लोहे के निष्कर्षण में वात्य भट्ठी में होने वाली अभिक्रियाएँ –

इस प्रकार Fe की प्राप्ति होती है।

वात्य भट्ठी में चार्ज के रूप में निस्तापित अयस्क (8 भाग), कोक (4 भाग) तथा चूने का पत्थर (1भाग) का मिश्रण डाला जाता है। भट्ठी में चार्ज अधिक ताप की ओर आता जाता है और उसमें क्रमिक रूप से रासायनिक परिवर्तन होते जाते हैं। बिलकुल ऊपर शीर्ष का क्षेत्र तप्तीकरण क्षेत्र (Preliminary heating zone) कहलाता है, इसमें चार्ज की नमी आदि दूर हो जाती है।इसके बाद का क्षेत्र अपचयन का ऊपरी क्षेत्र (Upper Zone of reduction) कहलाता है जिसका ताप 900°C लगभग होता है। यहाँ निम्न अभिक्रियाएँ सम्पन्न होती हैं और CO के द्वारा फेरिक ऑक्साइड का आयरन में अपचयन हो जाता है।इस प्रकार Fe की प्राप्ति होती है।


11. सक्रियता श्रेणी क्या है ?

उत्तर ⇒ सक्रियता श्रेणी वह सूची है जिसमें धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। इसे सक्रियता श्रेणी कहा जाता है।
नीचे धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलताएँ दर्शायी गई हैं-

सक्रियता श्रेणी क्या है ?

12. विद्युत अपघटनी परिष्करण द्वारा शुद्ध ताँबा की प्राप्ति कैसे की जाती है ?

उत्तर ⇒ कॉपर, जिंक, टिन, निकेल, सिल्वर, गोल्ड आदि धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है। __एक विद्युत् अपघटनी टैंक लिया जाता है। इसके अंदर अम्लीयकृत कॉपर सल्फेट का विलयन अपघट्य के रूप में टैंक में रखा जाता है। इस प्रक्रम में अशुद्ध ताँबे का एनोड और शुद्ध ताँबे का पतला. कैथोड बनाकर लवण विलयन में डाल दिया जाता है। विद्युत अपघट्य से जब विद्युत-धारा प्रवाहित किया जाता है, तब एनोड पर स्थित अशुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाती है। इतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु विद्युत अपघट्य से कैथोड पर निक्षेपित हो जाती है। विलेय अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं तथा अविलेय अशुद्धियाँ एनोड तली पर निक्षेपित हो जाती हैं। इन अशुद्धियों को एनोड पंक कहा जाता है। इस प्रकार विद्युत अपघटन द्वारा शुद्ध धातु का परिष्करण हो जाता है।


13. जस्ता के अयस्क से जस्ता निष्कर्षण करने के सिद्धांत का उल्लेख करें।

BHANJAN

उत्तर ⇒ आयरन, जिंक, लेड, कॉपर आदि सक्रियता श्रेणी के मध्य में पाए जाने वाले धातु हैं। प्रकृति में यह प्रायः सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में पायी जाती है। सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड के रूप में प्राप्त करना आसान है। अतः अपचयन से पहले धातु के सल्फाइड एवं कार्बोनेट को धातु के ऑक्साइड में परिणत करना जरूरी है। सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में बदल जाता है। इस प्रक्रिया को भंजन कहते हैं। कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में बदल जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तापन कहा जाता है। जिंक के अयस्कों के भंजन एवं निस्तापन के समय निम्नांकित अभिक्रियाएँ होती हैं –

इसके बाद इन ऑक्साइडों को कार्बन द्वारा अपचयित कर धातु की प्राप्ति कर ली जाती है।

TAPAN

इस प्रकार धातु का निष्कर्षण हो जाता है।


14. बॉक्साइट अयस्क से एलुमिनियम धातु के निष्कर्षण संक्षेप में अभिक्रिया सफेत लिखें।

उत्तर ⇒पहले बॉक्साइट से एलुमिना का निर्माण किया जाता है। बॉक्साइट के महीन चूर्ण को गर्म सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया कराई जाती है। एलुमिनियम ऑक्साइड सोडियम एलुमिनेट बनकर घुल जाता है।

AI2O3 + 2H2O + 2NaOH → 2NaAIO2 + 3H2O

फिर घोल को छानकर तनु बना लिया जाता है। फिर इसमें ताजा अवक्षेपित एलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड डालते हैं। सोडियम हाइड्रोक्साइड अवक्षेपित हो जाता है। अवक्षेप को छानकर सुखा लिया जाता है। इसे गर्म कर शुद्ध एलुमिना तैयार कर लिया जाता है।

2AI (OH)2 → AL 2O3 + 3H2O

अब एलुमिना में क्रायोलाइट मिलाकर विद्युत विच्छेदन किया जाता है। कैथोड पर एलुमिनियम और एनोड पर ऑक्सीजन मुक्त होता है।

Al2O3 → 2Al3+ + 3O2
2Al3 + 6e → 2AI (कैथोड पर)
30 2- → 3O2 + 6e (एनोड पर)
एलुमिनियम निष्कर्षण की यह बेयर विधि कहलाती है।


15. सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं का निष्कर्षण किस प्रकार किया जाता है ?

उत्तर ⇒ अभिक्रियाशीलता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुएँ अत्यंत अभिक्रियाशील होती हैं। इन्हें कार्बन के साथ गर्म कर उनके यौगिकों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। कार्बन के द्वारा सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्सियम, एलुमिनियम आदि के ऑक्साइड को अपचयन कर उन्हें धातुओं में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। इन धातुओं की बंधुता कार्बन की अपेक्षा ऑक्सीजन के प्रति अधिक होती है। इन धातुओं को विद्युत अपघटनी अपचयन द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। सोडियम, मैग्नीशियम एवं कैल्सियम को उनके गलित क्लोराइडों के विद्युत अपघटन से प्राप्त किया जाता है। कैथोड पर धातुएँ निक्षेपित हो जाती हैं तथा एनोड पर क्लोरीन मुक्त होती है।

कैथोड पर – Na+ + e → Na
एनोड पर – 2Cl → Cl2 +2e

इसी प्रकार एलुमिनियम ऑक्साइड के विद्युत अपघटनी अपचयन से ऐलुमिनियम प्राप्त किया जाता है।


16. सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है ?

उत्तर ⇒सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुएँ काफी अनभिक्रियाशील होती हैं। इन धातुओं के ऑक्साइड को केवल गर्म करने से ही धातु प्राप्त किया जा सकता है। जैसे—सिनाबार (HgS) मरकरी का एक अयस्क है। वायु में गर्म करने पर यह सबसे पहले मयूंरिक ऑक्साइड (HgO) में परिवर्तित होता है और अधिक गर्म करने पर मयूंरिक ऑक्साइड मरकरी (पारद) में अपचयित हो जाता है।

शिनाबर
प्रकार

इसी प्रकार, प्राकृतिक रूप से Cu 2S के रूप में उपलब्ध ताँबे को केवल वायु में गर्म कर इसको अयस्क से अलग किया जा सकता है।


17. निस्तापन क्या है ? उदाहरण के साथ समझाइए।

CACO3

उत्तर ⇒अयस्क को उसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर तीव्रता से गर्म करने कि क्रिया जिससे उड़नशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं और ऑक्सीलवणऑक्साइड में परिणत हो जाता है, निस्तापन कहा जाता है।कार्बोनेट अयस्क जैसे चूना पत्थर (CACO3) के निस्तापन से कैल्सियम ऑक्साइड प्राप्त होता है। साथ ही CO2 गैस भी निकलता है।इसी प्रकार जिंक कार्बोनेट के निस्तापन से ZnO और Co2 बनता है।

ZNCO3
CAO+C

इसके बाद कार्बन जैसे उपयुक्त अपचायक का उपयोग कर धातु ऑक्साइड से धातु प्राप्त किया जाता है।


18. धातुओं एवं अधातुओं के बीच कैसे विभेद करेंगे ?

उत्तर ⇒धातुओं और अधातुओं के गुणों में विभेद-

भौतिक गुणों में विभेद धातुएँ

धातुएँअधातुएँ
(1) धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस होती हैं परन्तु केवल पारा सामान्य ताप पर तरल अवस्था में होता है।(1) अधातुएँ सामान्य ताप पर तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं।। फॉस्फोरस और सल्फर ठोस रूप में, H2, O2, N2 गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में होते हैं।
(2) धातुएँ तन्य तथा आधातवर्ध्य तथा लगिष्णु होती हैं।(2) ये प्रायः भंगुर होती हैं।
(3) धातुएँ प्रायः चमकदार होती हैं अर्थात् उनमें धात्विक चमक होती हैं।(3) अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती परंतु हीरा, ग्रेफाइट तथा आयोडीन इसके अपवाद हैं।
(4) धातुएँ ऊष्मा तथा विधुत की सुचालक होती हैं परंतु बिस्मथ इसका अपवाद है।(4) ग्रेफाइट और गैस कार्बन को छोड़कर सभी अधातुएँ कुचालक हैं।
(5) धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक बहुत अधिक होते हैं।(5) अधातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक कम होते हैं।
(6) धातुएँ अधिकांशतः कठोर होती हैं परंतु सोडियम तथा पोटैशियम चाकू से काटी जा सकती है।(6) इनकी कठोरता भिन्न-भिन्न होती है। हीरा सब पदार्थों से कठोरतम है।
(7) धातुओं का आपेक्षिक घनत्व अधिक होता है परंतु Na, K इसके अपवाद हैं।(7) अधातुओं का आपेक्षिक ताप प्रायः कम होता है।
(8) धातुएँ अपारदर्शक होती हैं।(8) गैसीय अधातुएँ पारदर्शक हैं।

रासायनिक गुणों में विभेद

धातुएँअधातुएँ
(1) धातुएँ क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं जिसमें से कुछ क्षार बनाती हैं।(1) अधातुएँ अम्लीय तथा उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।
(2) धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस पुनः स्थापित करती गैस को पुनः स्थापित नहीं करती हैं।(2) अधातुएँ अम्लों में से हाइड्रोजन हैं तथा अनुरूप लवण बनाती हैं।
(3) धातुएँ धनात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं।(3) अधातुएँ ऋणात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं।
(4) धातुएँ क्लोरीन से संयोग करके क्लोराइड बनाती हैं जो वैद्युत् संयोजक होते हैं।(4) अधातुएँ क्लोरीन से संयोग कर क्लोराइड बनाती हैं, परन्तु वे सहसंयोजक होते हैं।
(5) कुछ धातुएँ हाइड्रोजन से संयोग करके हाइड्रोक्साइड बनाती हैं जो विधुत संयोजक होते हैं।(5) अधातुएँ हाइड्रोजन के साथ अनेक स्थाई हाइड्राइड बनाती हैं जो सहसंयोजक होते हैं।
(6) धातुएँ अपचायक हैं।(6) अधातुएँ ऑक्सीकारक हैं।
(7) धातुएँ जल विलयन में धनायन बनाती हैं।(7) अधातुएँ जलीय विलयन में ऋणायन बनाती हैं।

19. अयस्क क्या है ? अयस्क सांद्रण की सामान्य विधियों का परिचय दीजिए।

उत्तर ⇒ अयस्क – वैसे खनिज जिनसे कम खर्च में धातु का निष्कर्षण किया जाय उसे अयस्क कहते हैं।

अयस्क सांद्रण की सामान्य विधियाँ

अयस्क सांद्रण की सामान्य विधियाँ – अयस्क या खनिज पृथ्वी से निकाले जाते हैं जिनके साथ अनेक प्रकार के व्यर्थ पदार्थ होते हैं जिन्हें गैंग कहते हैं। निष्कर्षण की प्रक्रिया से पहले उन्हें हटाना आवश्यक होता है। इस प्रकार गैंग का साथ हटाने से अयस्क में धातु की मात्रा, अधिक हो जाती है जिसे सांद्रण कहते हैं।

अतः किसी अयस्क को अगले प्रक्रमों के लिए तैयार करने के लिए अयस्क का सांद्रण करना होता है । अयस्क से गैंग हटाने की विधि अयस्क के तथा गैंग के भीतर या रासायनिक गुणों के अंतर पर आधारित होती है।

सांद्रण की भौतिक विधियाँ –
(i)चंबकीय विधि – यह विधि आयरन, कोबाल्ट, निकिल ; जैसे-चुंबकीय पदार्थों की अशुद्धियों को अलग करने के लिए स्वीकार की जाती है। जो खनिज चुंबकीय प्रकृति के होते हैं वे चुंबकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं जबकि गैंग आदि आकर्षित नहीं होते । क्रोमाइट तथा पाइरोल्युसाइट के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किए जाते हैं। इस विधि में पीसे हुए अयस्क को एक कन्वेयर बैल्ट के ऊपर रखते हैं। कन्वेयर बैल्ट दो रोलरों के ऊपर से गुजरती है जिनमें से एक चुंबकीय होता है। जब अयस्क चुंबकीय किनारे पर से नीचे आता है, तो चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ दो अलग-अलग ढेरों में एकत्रित हो जाते हैं। लोहे के अयस्क मैग्नेटाइट का सांद्रण इसी विधि द्वारा किया जाता है।

(ii)द्रवचालित धोना – इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को पानी की तेज धार में धोया जाता है। इस तेज धार में हल्के गैंग कण बह जाते हैं जबकि भारी खनिज कण तली में बैठ जाते हैं। टिन और लैड के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किए जाते हैं।

(iii)फेन-प्लावन विधि – इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को जल एवं किसी उपयुक्त तेल के साथ एक बड़े टैंक में मिलाया जाता है। खनिज कण पहले ही तेल से भीग जाते हैं जबकि गैंग के कण पानी से भीग जाते हैं। अब इस मिश्रण में से बुलबुलों के रूप में वायु प्रवाहित की जाती है जिससे खनिज कण युक्त तेल के झाग या फेन बन जाते हैं जो जल की सतह पर तैरने लगती है जिन्हें बड़ी सरलता से जल के ऊपर से निकाला जा सकता है। ताँबा, सीसा तथा जिंक के सल्फाइड का सांद्रण करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है।

(iv) रासायनिक विधियाँ – रासायनिक पृथक्करण में खनिज तथा गैंग के मध्य रासायनिक गुणों के अंतर का उपयोग किया जाता है। इसकी एक मुख्य विधि है—बेयर की विधि, जिसके द्वारा बॉक्साइट से ऐलुमिनियम ऑक्साइड प्राप्त किया जाता है।

बेयर विधि द्वारा ऐलुमिनियम अयस्क का सांद्रण -:

बेयर विधि द्वारा ऐलुमिनियम अयस्क का सांद्रण

इस विधि में बॉक्साइट को गर्म साडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अपचयित किया जाता है जिसे NaAlO2 जो जल में घलनशील हैं, गैंग को छानकर अलग कर दिया जाता है। NaAlO2 का हाइडोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करवाई जाती है जिससे ऐलुमिनियम हाइड्रोक्साइड प्राप्त होता है । जिसके बाद ऐलुमिनियम हाइड्रोक्साइड को गर्म करके शुद्ध एलुमिनियम ऑक्साइड प्राप्त होता है। विभिन्न अभिक्रियाएँ निम्नलिखित प्रकार से है –


20. मिश्रधातु किस कहते हैं ? इनके बनाने के उद्देश्यों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒मिश्रधातु किसी धात का किसी अन्य धातु या अधातु के साथ मिलाकर बनाया गया संगामी मिश्रण, मिश्रधातु कहलाता है। जैसे—टांके में कलई तथा सीसा समान मात्रा में मिलाया जाता है। उदाहरण के लिए, स्टेनलेस स्टील, टांका, पीतल, कांसा बैलमैटल आदि सभी मिश्रधातुएँ हैं।

मिश्रधातुआ क उपयोग
(i) कठोरता बढ़ाने के लिए – लोहे में कार्बन की मात्रा मिलाकर स्टेनलैस स्टील बनाया जाता है जो लोहे से अधिक कठोर होता है । सोने में तांबा तथा चांदी में सीसा मिलाने से उनकी कठोरता अधिक हो जाती है। ड्यूरेलियम ऐलमिनियम से बना मिश्र धातु है जो अत्यधिक कठोर होता है।

(ii) शक्ति बढ़ाने के लिए – इस्पात, ड्यूरेलियम आदि मिश्र धातु कठोर होने के कारण शक्तिशाली भी होते हैं।

(ii) संक्षारण रोकने के लिए – जैसे स्टेनलेस स्टील, लोहे तथा जिंक से बनी मिश्र धातु आदि पर जंग नहीं लगता ।

(iv) ध्वनि उत्पन्न करने के लिए – ताँबे तथा कलई से बनाई गई मिश्र धात बैल मैटल होती है जिससे अधिक ध्वनि उत्पन्न हो जाती है।

(v) गलनांक कम करने के लिए – जैसे रोज-मैटल मिश्र धात है। इसका गलनांक कम होता है। यह बिस्मथ कलूई और सीसे बनती है।

(vi) उचित साँचे में ढालने के लिए – काँसा तथा टाइप मैटल ।

(vii) रंग परिवर्तन के लिए – ताँबे तथा ऐलुमिनियम से बनी ऐलमिनियम ब्रांज मिश्र धातु का सुनहरी रंग होता है।

(vii) घरेलू उपयोग – घरों, कारखानों, दफ्तरों में सभी जगह मिश्र धातुओं का उपयोग होता है जैसे घर के बर्तन, अलमारी, पंखे, फ्रिज, आभूषणों आदि में मिश्र धातुओं का उपयोग होता है।


21. जारण और निस्तापन से आप क्या समझते हैं ? एक उदाहरण देकर समझायें । अभिक्रिया श्रेणी (Reactivity Series) के मध्य के तत्वों का निष्कर्षण उनके oxides से किस प्रकार करते हैं ?

उत्तर ⇒ जारण या भर्जन (Roasting) भर्जन में सान्द्रित अयस्क को वायु की अधिकता में खुब गर्म किया जाता है जिससे वाष्पशील अशद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं तथा अयस्क का ऑक्सीकरण हो जाता है। यह मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के लिए परावर्तनी भट्टी में किया जाता है। जैसे जिंक ब्लैण्ड (ZnS) का जारण 2ZnS + 3O2 2ZnO + 2sO2

FE2O3

निस्तापन (Calcination) – सान्द्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में उसके गलनांक से नीचे गर्म करने पर उसमें से वाष्पशील अशुद्धियाँ अलग हो जाती हैं तथा अयस्क सरन्ध्र (Porous) हो जाता है । यह मुख्य रूप से कार्बोनेट, हाइड्रेटेड अयस्कों में किया जाता है।

अभिक्रिया श्रेणी के मध्य के तत्वों का निष्कर्षण उनके ऑक्साइड को कार्बन द्वारा अपचयन से करते हैं।

ZnO + C  → Zn + CO

Fe2O3 + 3C → 2Fe +3CO


22. बॉक्साइट का रासायनिक सूत्र लिखें। एल्यमीनियम का शोधन कैसे किया जाता है ?

उत्तर ⇒बॉक्साइट का रासायनिक सूत्र : एल्युमीनियम का शोधन वैद्युत अपघटन विधि द्वारा होता है। इसमें अशुद्ध एल्युमीनियम को एनोड एवं शुद्ध एल्युमीनियम की प्लेट को कैथोड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। एल्युमीनियम के एक लवण का विलयन वैद्युत अपघट्य का कार्य करता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर एनोड से शुद्ध धातु निकलकर विलयन में जाती है और विलयन में से उतनी ही शुद्ध धातु कैथोड पर एकत्रित हो जाती है। विलेय अपद्रव्य विलयन में चले जाते हैं, जबकि अविलेय ऐनोड के नीचे पेंदी में एकत्र हो जाते हैं जो ‘एनोड मड’ कहलाते हैं।


23. (a) लोहा के एक प्रमुख अयस्क का नाम एवं इसका सूत्र लिखें। (b) इस अयस्क का सांद्रण कैसे होता है ?

उत्तर ⇒ (a) हेमेटाइट – Fe2O. xH2O ;  मैग्नेटाइट – Fe3O4

(b) लोहा के अयस्क का सान्द्रण : लोहा के अयस्क का सान्द्रण चुम्बकीय पृथक्करण विधि द्वारा किया जाता है। इस विधि में दो पूलियों के ऊपर का अचुम्बकीय बेल्ट चढ़ा होता है। एक पूली अचुम्बकीय होती है तथा दूसरी पूली एक विद्युत चुम्बक की बनी होती है। अचुम्बकीय पूली पर चूर्णित अयस्क गिराया जाता है जो बेल्ट के सहारे चुम्बकीय पूली तक जाता है और वहाँ चुम्बकीय अयस्क अचुम्बकीय अशुद्धियों से पृथक हो जाता है।

1. निम्नलिखित यौगिकों का संरचना सूत्र लिखें –

(i) मिथेन
(ii) इथेन
(iii) प्रोपेन’
(iv) ब्यूटेन
(v) पेंटेन


2. हाइड्रोकार्बन क्या है ? यह कितने प्रकार का होता है-

उत्तर ⇒ हाइड्रोकार्बन – कार्बन और हाइड्रोकार्बन से बने यौगिक को हाइड्रोकार्बन कहते हैं।

हाइड्रोकार्बन तीन प्रकार के होते हैं

(i) संतृप्त हाइड्रोकार्बन
(ii) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन
(iii) ऐरोमेटिक हाइड्रोकार्बन

(i) संतृप्त हाइड्रोकार्बन – जब कार्बन की चारों संयोजकताएँ एकल आबंध द्वारा जुड़े हों तो ऐसे हाइड्रोकार्बन को संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहा जाता है। जैसे—मिथेन (CH4), इथेन (C2H6) आदि संतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं।

(ii) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन – जब दो कार्बन परमाणुओं के बीच द्विआबंध अथवा तीन आबंध हो तो ऐसे हाइड्रोकार्बन को असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहते हैं। द्विआबंध वाले हाइड्रोकार्बन एलकीन और मिश्राबंध वाले हाइड्रोकार्बन एल्काइन कहे जाते हैं।

हाइड्रोकार्बन क्या है यह कितने प्रकार का होता है

(iii) एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन – ऐरोमेटिक हाइड्रोकार्बन की वलय संरचना होती है।

एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन-ऐरोमेटिक हाइड्रोकार्बन की वलय संरचना होती है।

3. एथेनॉल से इथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्यों कहा जाता है ?

एथेनॉल से इथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्यों कहा जाता है

उत्तर ⇒ एथाइल एल्कोहल को क्षारीय KMnO4 अथवा अम्लीय K2Cr2O7 के साथ गर्म करने पर एथनॉइक अम्ल बनता है।

यहाँ क्षारीय KMnO4 अथवा अम्लीय K2Cr2O7 में ऑक्सीजन देने की क्षमता होती है। ये पदार्थ ऑक्सीकारक हैं। ये आरंभिक पदार्थ एल्कोहल में ऑक्सीजन जोड़ते हैं। अतः एथेनॉल से एथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया कही जाती है।


4. साबुन और अपमार्जक में अन्तर बतावें।

उत्तर-

साबुनअपमार्जक
1. साबुन में कार्बोक्सिलिक अम्ल की लंबी श्रृंखला वाला सोडियम लवण होता है। साबुन में यनिक समूह -COO – Na+ होता है1. अपमार्जक में लंबी श्रृंखला के बेंजीन सल्फोनिक अम्ल का सोडियम लवण होता है । इसमें आयनिक समूह SO3-Na+ या SO4-Na+ है।
2. साबुन कठोर जल में सफाई के लिए उपयुक्त नहीं है।2. यह कठोर जल में भी सफाई के लिए उपयोगी है।
3. साबुन वनस्पति तेलों से बनता है।3. अपमार्जक पेट्रोलियम के हाइड्रोकार्बन से बनते हैं।
4. साबुन से सफाई क्रिया निम्न स्तर पर संभव है।4. अपमार्जक से सफाई क्रिया उच्च स्तर पर संभव है।
5. साबुन से जल प्रदूषण कम होता है।5. इससे जल प्रदूषण अधिक होता है।

5. निम्नलिखित संतृप्त हाइड्रोकार्बनों के अणुसूत्र एवं संरचना सूत्र लिखें।

(i) एथीन
(ii) प्रोपेनल
(iii) ब्यूटेन
(iv) क्लोरोप्रोपेन

निम्नलिखित संतृप्त हाइड्रोकार्बनों के अणुसूत्र एवं संरचना सूत्र लिखें

उत्तर ⇒

6. संरचना सूत्र लिखें।

संरचना सूत्र लिखें

(i) बेंजीन
(ii) इथाइन
(iii) फॉरमल्डिहाइड


7. निम्नलिखित कार्बनिक यौगिक का संरचना सूत्र लिखें।

(i) डाइक्लोरोमिथेन
(ii) इथेनोइक अम्ल
(ii) मिथेन
(iv) फॉरमल्डिहाइड

अथवा, एसीटिलीन बनाने की सामान्य विधि को लिखें। एसीटिलीन के सामान्य रासायनिक गुणों को लिखें।

निम्नलिखित कार्बनिक यौगिक का संरचना सूत्र लिखें।

अथवा,

कैल्शियम कार्बाइड एवं जल की प्रक्रिया से : साधारण तापक्रम पर ही कैल्शियम एवं जल की प्रक्रिया से एसीटिलीन (C2H2) बनता है।

CaC2+2H2O → Ca (OH)2+C2H2

रासायनिक गुण :

(i) H2का योग – 200 – 250°C पर प्लैटिनम उत्प्रेरक की उपस्थिति में एसीटिलीन एवं हाइड्रोजन के योग से इथेन बनता है।

H2का योग - 200 - 250°C पर प्लैटिनम उत्प्रेरक की उपस्थिति में एसीटिलीन एवं हाइड्रोजन के योग से इथेन बनता है।
में प्रवाहित करने पर पहले विनाइल एल्कोहल बनता है जो बाद में एसीटल्डिहाइड में बदल जाता है।

(ii) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल का योग – Hgso4 उत्प्रेरक की उपस्थिति में एसीटिलीन तनु H2SO4 में प्रवाहित करने पर पहले विनाइल एल्कोहल बनता है जो बाद में एसीटल्डिहाइड में बदल जाता है।


8. निम्न यौगिकों के संरचनाएँ चित्रित कीजिए –

(i) एथनॉइक अम्ल
(ii) ब्रोमो पेन्टेन
(i) ब्यूटनोन
(iv) हेक्सेनैल

क्या ब्रोमो पेन्टेन का संरचनात्मक समावयव संभव है ?

निम्न यौगिकों के संरचनाएँ चित्रित कीजिए

उत्तर ⇒


9. निम्नलिखित कार्बनिक यौगिकों के रचना सूत्र लिखें।

(i) ब्यूटीन

(ii) मेथनल

(iii) टॉलुइन

निम्नलिखित कार्बनिक यौगिकों के रचना सूत्र लिखें।
निम्नलिखित कार्बनिक यौगिकों के रचना सूत्र लिखें।

(iv) नेपथलीन


10. निम्नलिखित के इलेक्ट्रॉन बिन्दु संरचना बनाइए :

(a) एथनॉइक अम्ल ।
(b) H2S
(c) F2


11. एथेनॉल निम्नांकित में प्रत्येक से किस प्रकार अभिक्रिया करता है ?

(i) अम्ल (HBr)

(ii) PCl5

(iii) सान्द्रं (H2SO4)के आधिक्य

एथेनॉल निम्नांकित में प्रत्येक से किस प्रकार अभिक्रिया करता है

(iv) अम्लीय KMnO4


12. इथेनोइक अम्ल का निम्नलिखित के साथ होने वाली अभिक्रियाओं का रासायनिक समीकरण लिखें।

(क) सोडियम   (ख) सोडियम कार्बोनेट   (ग) सोडियम बाइकार्बोनेट।

उत्तर- एथेनॉइक अम्ल की अभिक्रिया

(क) सोडियम से एथेनॉइक अम्ल सोडियम से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।

2CH3COOH + 2Na → 2CH3COONa + H2

(ख) सोडियम कार्बोनेट से अभिक्रिया – एथेनॉइक अम्ल सोडियम कार्बोनेट से अभिक्रिया कर कार्बन डायऑक्साइड (CO2) गैस मुक्त करता है।
2CH3COOH + Na2Co3→ 2CH3COONa + H2O + CO2

(ग) सोडियम बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया – एथेनॉइक अम्ल सोडियम बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया कर कार्बन डायऑक्साइड (CO2) उत्पन्न करता है।

2CH3COOH + NaHCO3→CH3COONa + CO2 + H2O

13. एथनॉल की प्राप्ति किण्वन विधि से करें। इथेनॉल के दो उपयोग लिखें।

उत्तर ⇒ एथनॉल को सामान्यतः एल्कोहल कहा जाता है। इसका सामान्य सत्र CnH2n+1OH है। इथाइल एल्कोहल अथवा मिथाइल एल्कोहल सामान्य की श्रेणी में आता है

एल्कोहल सामान्य एल्कोहल—C2H5OH

मिथाइल, एल्कोहल-CH3OH

प्रयोगशाला में एथनॉल या एल्कोहल बनाने की विधि – प्रयोगशाला में एथनॉल, एथिल क्लोराइड (C2H5CI) को सोडियम हाइड्रोक्साइड के जलीय घोल के साथ गर्म कर बनाया जाता है

हाइड्रोक्साइड के जलीय घोल के साथ गर्म कर बनाया जाता है

यह रंगहीन, सुनहला गंध देने वाला, ऊर्ध्वपतित पदार्थ, जल में घुलनशील तथा लिटमस के प्रति उदासीन होता है।
इसका उपयोग, टिंचर आयोडीन, कफ सीरप, टॉनिक बनाने में होता है। इसका उपयोग लोग पीने में भी करते हैं


14. प्रयोगशाला में मिथेन गैस बनाने की विधि एवं क्लोरीन के साथ . इसकी अभिक्रिया लिखें।

उत्तर- प्रयोगशाला में मिथेन गैस सोडियम एसीटेट को सोडालाइम के साथ गर्म कर बनाई जाती है।

प्रयोगशाला में मिथेन गैस बनाने की विधि एवं क्लोरीन के साथ . इसकी अभिक्रिया लिखें।

मिथेन की क्लोरीन से अभिक्रिया – सूर्य से विसरित प्रकाश की उपस्थिति में मिथेन की अभिक्रिया क्लोरीन से कराने पर उसके हाइड्रोजन परमाणु एक-एक कर क्लोरीन द्वारा विस्थापित हो जाते हैं।

मिथेन की क्लोरीन से अभिक्रिया - सूर्य से विसरित प्रकाश की उपस्थिति में मिथेन की अभिक्रिया क्लोरीन से कराने पर उसके हाइड्रोजन परमाणु एक-एक कर क्लोरीन द्वारा विस्थापित हो जाते हैं।

15. कार्बन एवं उसके यौगिकों का उपयोग अधिकतर अनुप्रयोगों में ईंधन के रूप में क्यों किया जाता है ?

उत्तर ⇒ कार्बन को वायु में जलाने पर काफी ऊष्मा उत्पन्न होती है।

C+ O2 → CO2 + ऊष्मा + प्रकाश

कार्बन के यौगिक CH4, C2H6 आदि यौगिकों को भी ऑक्सीजन के साथ गर्म करने पर काफी ऊष्मा प्रदान करता है।

CH4 + 202 → CO2 + 2H2O + ऊष्मा + प्रकाश . इथायल एल्कोहल भी कार्बन का यौगिक है. जो ऑक्सीकरण के कारण काफी ऊष्मा प्रदान करते हैं।

2C2H5OH + 60→ 4C02 + 6H2O + ऊष्मा + प्रकाश कुछ देशों में एल्कोहल में पेटोल मिलाकर उसे स्वच्छ ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।


16. एथेनॉइक अम्ल के बनाने की विधियों को लिखें।

प्रयोगशाला में एथेनॉइक अम्ल एथनॉल का अम्लीय पोटैशियम डायक्रोमेट से अभिक्रिया करके बनाया जाता है।

उत्तर ⇒ (i) प्रयोगशाला में एथेनॉइक अम्ल एथनॉल का अम्लीय पोटैशियम डायक्रोमेट से अभिक्रिया करके बनाया जाता है।
K2Cr2O7 + 4H2SO4  →  K2SO4 + Cr2(SO4)3 + 4H2O + 3[0](ii) एथेनॉइक अम्ल का औद्योगिक उत्पादन एथाइन से होता है। सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल में थोड़ा पारद सल्फेट (HgSO4) उत्प्रेरक मिलाकर उसमें एथाइन गैस प्रवाहित करते हैं। इससे एसिटल्डिहाइड बनता है। फिर मैंगनस एसीटेट उत्प्रेरक की उपस्थिति में हवा से ऑक्सीकृत होकर एथेनॉइक अम्ल देता है।

एथेनॉइक अम्ल का औद्योगिक उत्पादन एथाइन से होता है

17. मिसेल क्या है? कपड़े की सफाई प्रक्रिया किस प्रकार होती है ?

उत्तर ⇒ जब साबुन अथवा अपमार्जक अणु जल में घुल जाते हैं तो अणु परस्पर एकत्रित होकर गुच्छों का रूप धारण कर लेते हैं जिसको मिसेल कहते हैं। इसमें पूँछ । अंदर की ओर चिपक जाती है एवं सिर बाहर की ओर इंगित होते हैं।

जब साबुन अथवा अपमार्जक अणु जल में घुल जाते हैं तो अणु परस्पर एकत्रित होकर गुच्छों का रूप धारण कर लेते हैं

शोधन प्रक्रिया में हाइड्रोकार्बन पूछे तैलीय गंदगी से चिपक जाती है। जब जल को हिलाते हैं तो तैलीय गंदगी ऊपर उठने का प्रयास करती है जिससे यह छोटे-छोटे टुकड़ों में वियोजित हो जाती है। यह प्रक्रम दूसरे अपमार्जक अणुओं की पूँछों को चिपकने का अवसर प्रदान करता है। अब इस विलयन में अनेक छोटी-छोटी तैलीय गोलिकाएँ जो चारों तरफ से अपमार्जक अणुओं द्वारा घिरी हुई विद्यमान होती हैं। अपमार्जक विलयन में उपस्थित ऋणात्मक सिरों द्वारा छोटी-छोटी तैलीय गोलिकाएँ परस्पर संयुक्त होकर पुंज बनाने से वंचित रह जाती हैं। इस प्रकार वस्तु से तैलीय गंदगी दूर हो जाती है।

आजकल उपयोग में आने वाले अपमार्जकों की हाइड्रोकार्बन शृंखलाएँ अल्पशाखित होती हैं जो बहुशाखित अपमार्जकों की तुलना में सूक्ष्म जीवियों द्वारा शीघ्रतापूर्वक विखंडित हो जाती है।


18. कार्बन के दो अपरूपों में हीरा कठोर और ग्रेफाइट मुलायम होता है। क्यों ?

उत्तर ⇒ हीरे में कार्बन का प्रत्येक परमाणु कार्बन के चार अन्य परमाणुओं के साथ आबंधित होता है जिससे एक दृढ़ त्रिआयामी संरचना बनती है। ग्रेफाइट में कार्बन के प्रत्येक परमाणु का आबंध कार्बन के तीन अन्य परमाणुओं के साथ एक ही तल पर होता है जिससे षट्कोणीय व्यूह मिलता है। इनमें से एक आबंध द्विआबंधी होता है जिसके कारण कार्बन की संयोजकता पूर्ण होती है। ग्रेफाइट की संरचनाएँ  षट्कोणीय तल एक – दूसरे के ऊपर व्यवस्थित होते हैं। इन दो विभिन्न संरचनाओं के कारण हीरा काफी कठोर और ग्रेफाइट मुलायम होता है। हीरा विधूत का कुचालक और ग्रेफाइट विधूत के सुचालक होते हैं। फुलेरीन कार्बन अपरूप का एक अन्य वर्ग है।


19. प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group) से क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ संतृप्त हाइड्रोकार्बन की अपेक्षा असंतृप्त हाइड्रोकार्बन अधिक अभिक्रियाशील होते हैं।

असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों की अभिक्रियाशीलता कार्बन-कार्बन द्विआबंध (C = C) एवं कार्बन-कार्बन त्रिआबंध (C = C) की उपस्थिति के कारण होती है। कार्बन-कार्बन द्विआबंध (C = C) एवं कार्बन-कार्बन त्रिआबंध (C = C) पर हाइड्रोकार्बनों की अधिकांश अभिक्रियाएँ आधारित हैं।

प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group) से क्या समझते हैं

C2H6 एथेन और C2H5OH का उदाहरण लें तो पाते हैं कि इन दोनों यौगिकों के भौतिक और रासायनिक गुण भिन्न-भिन्न हैं। कार्बनिक यौगिकों में वह समूह जिसके चलते इनकी क्रियाशीलता बढ़ जाती है, प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group) कहा जाता है।

-C≡C- है।

इसी प्रकार – CHO, COOH, > C=O

— NH2 एवं — NO2 आदि क्रमशः एल्डिहाइड, कार्बोक्सिल, कीटोनो, एमीनो और नाइट्रो समूह के उदाहरण हैं।

—Cl, —Br तथा – OH हैलो समूह तथा एल्कोहली समूह कहे जाते हैं।


20. साबुन की सफाई की प्रक्रिया की क्रिया-विधि समझाइए।

उत्तर ⇒ हम जानते हैं कि तेल पानी में अघुलनशील है और अधिकांश मैल तैलीय होते हैं। जब किसी मैले कपड़े पर साबुन को जल के साथ मिलाकर हाथ से रगड़ा जाता है। अथवा ब्रश द्वारा रगड़ा जाता है तो मिसेल का निर्माण हो जाता है। मैल मिसेल के हाइड्रोकार्बन वाले भाग से चिपक जाते हैं और चारों ओर से ऋण आवेश (COO-)से घिर जाते हैं, ताकि वह फिर साफ होने वाली कपड़े से पुनः चिंपक न जाएँ। कपड़े पर जल डालने पर या कपड़े को जल में डुबाने पर मैल मिसेल के रूप में कपड़े को तुरंत छोड़ कर जल में निलंबित हो जाते हैं और कपड़े की सफाई हो जाती है।

21. प्रयोगशाला में मिथेन गैस किस प्रकार बनाया जाता है ? सिद्धान्त सहित वर्णन करें।

अथवा, प्रयोगशाला में मिथेन बनाने की विधि एवं क्लोरीन के साथ इसकी रासायनिक अभिक्रिया को लिखें।

M.Q., Set-III: 2015, 2015A, M.Q., Set-II : 2016)

उत्तर ⇒ सिदान्त सोडियम एसीटेट एवं सोडा लाइम के मिश्रण को गर्म करने से मिथेन गैस बनती है।

CH3ÚCOONa + NaOH → Na2CO3 + CH

सिदान्त सोडियम एसीटेट एवं सोडा लाइम के मिश्रण को गर्म करने से मिथेन गैस बनती है

प्रयोगशाला में मिथेन गैस बनावट

चित्रानुसार उपकरण सजाकर कड़े काँच की परखनली में सोडियम एसीटेट और सोडालाइम के मिश्रण को गर्म किया जाता है जिससे मिथेन गैस निकलती है, जिसे पानी के विस्थापन विधि द्वारा गैस जार में जमा किया जाता है।

मिथेन क्लोरीन से निम्न प्रकार से प्रतिक्रिया करता है –

CH4+CI2 → CH3CI + HCÍ

CH3CI + Cl2 → CH2C12 + HCI

CH2C1+Cl2 → CHCl3 + HCI

CHCI+ C12 →  CCI+HCI

22. साबुन की सफाई प्रक्रिया की क्रिया विधि समझाएँ।साबुन जल की सतह पर होता है तब इसके अणु अपने को ऐसे व्यवस्थित कर

साबुन सफाई करने की विशेष प्रणाली पर आधारित होते हैं।

उत्तर ⇒ साबुन सफाई करने की विशेष प्रणाली पर आधारित होते हैं। इनमें ऐसे अणु होते हैं जिसके दोनों सिरों के विभिन्न गुणधर्म होते हैं। जल में घुलनशील एक सिरे को हाइड्रोफिलिक कहते हैं। हाइड्रोकार्बन में विलयशील दूसरे सिरे को हाइड्रोफोबिक कहते हैं। जब साबुन जल की सतह पर होता है तब इसके अणु अपने को ऐसे व्यवस्थित कर

लेते हैं कि इसका आयोनिक सिरा जल के भीतर होता है जबकि हाइड्रोकार्बन पूँछ (दूसरा छोर) जल के बाहर होता है। जल के अंदर इन अणुओं की विशिष्ट व्यवस्था होती है जिससे इसका हाइड्रोकार्बन सिरा जल के बाहर बना होता है। ऐसा अणुओं का बड़ा समूह (कलस्टर) बनने के कारण होता है। यह हाइड्रोफोबिक पूँछ कलस्टर के भीतरी हिस्से में होता है जबकि उसका आयनिक सिरा कलस्टर की सतह पर होता है। इस संरचना को मिसेल कहते हैं । मिसेल के रूप में साबुन सफाई करने में सक्षम होता है। तैलीय मैल मिसेल के केन्द्र में एकत्र हो जाते हैं। मिसेल, विलयन में कोलॉइड के रूप में बने रहते हैं तथा आयन-आयन विकर्षण के कारण वे अवक्षेपित नहीं होते। इस प्रकार मिसेल में तैरते मैल आसानी से हटाये जा सकते हैं। साबुन के मिसेल इससे प्रकाश को प्रकीर्णित कर सकते हैं। जिसके कारण साबुन का घोल बादलं जैसा दिखता है।

23. समावयता किसे कहते हैं ? पेंटिन के समावयंवों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखें।

उत्तर ⇒ वे यौगिक जिनके अणुसूत्र समान हों लेकिन संरचना सूत्र भिन्न-भिन्न हो, समावयवी कहलाते हैं तथा इस घटना को समावयता कहा जाता है।

पेंटेन (C5H12) के समावयव

समावयता किसे कहते हैं पेंटिन के समावयंवों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखें।

24. समावयव से क्या अभिप्राय होता है ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

अथवा, ब्यूटेन के समावयव लिखिए।

समावयव (Isomers)- ऐसे यौगिक जिनका आण्विक सूत्र तो समान हो

उत्तर ⇒ समावयव (Isomers) – ऐसे यौगिक जिनका आण्विक सूत्र तो समान हो परंतु अणुओं की संरचनात्मक व्यवस्था भिन्न-भिन्न हो, उन्हें समावयव कहते हैं तथा इस घटना को समावयव कहते हैं । मिथेन, एथेन, प्रोपेन में कार्बन तथा हाइड्रोजन के परमाणुओं को पुनः व्यवस्थित करने पर भी संरचना में कोई परिवर्तन नहीं आता परंतु जब अल्केन के अणु में कार्बन की संख्या तीन से अधिक हो जाती है तो एक से अधिक व्यवस्थाएँ संभव हो जाती हैं । इनमें से एक में कार्बन परमाणु लंबी श्रृंखला बनाते हैं जबकि दूसरे में शाखाएँ होती हैं । ब्यूटेन में शाखायुक्त श्रृंखला में कम-से-कम कार्बन परमाणु तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से बंधित है। इस प्रकार अल्केनों को आइसो-अल्केन कहते हैं। शाखारहित शृंखला में कोई भी कार्बन परमाणु दो से अधिक कार्बन परमाणुओं से बंधित नहीं होता है। इस प्रकार के अल्केनों को सामान्य (नार्मल) n-अल्केन कहते हैं।

25. कार्बन क्या है ? अपररूपता से क्या आप समझते हैं ? कार्बन के कितने अपरूप हैं? सोदाहरण वर्णन करें।

उत्तर ⇒ कार्बन – कार्बन एक उपधातु है इसकी संयोजकता चार होती है यह भिन्न यौगिकों से संयोग करके बहुत से कार्बनिक यौगिक बनाते हैं।अपरूपता-तत्वों का एक गुण जिसके द्वारा कोई तत्व ऐसे कई रूपों में पाया जाता है जिनके भौतिक गुण भिन्न-भिन्न हो। लेकिन रासायनिक गुण सामान्य हो अपरूपता कहलाते हैं।कार्बन के तीन अपरूप होते हैं-1. हीरा 2. ग्रेफाइट तथा 3. फुलेरीन।प्रकृति में कार्बन तत्व अनेक विभिन्न भौतिक गुणों के साथ विविध रूपों में पाया जाता है। हीरा एवं ग्रेफाइट दोनों ही कार्बन के परमाणुओं से बने हैं। कार्बन के परमाणुओं के परस्पर आबंधन के तरीकों के आधार पर ही इनमें अंतर होता है। हीरे में कार्बन का प्रत्येक परमाणु कार्बन के चार अन्य परमाणुओं के साथ आबंधि त होता है जिससे एक दृढ़ त्रिआयामी संरचना बनती है। ग्रेफाइट में कार्बन के प्रत्येक परमाणु का आबंधन कार्बन के तीन अन्य परमाणुओं के साथ एक ही तल पर होता है जिससे षट्कोणीय व्यूह मिलता है। इनमें से एक आबंध द्विआबंधी होता है जिसके कारण कार्बन की संयोजकता पूर्ण होती है। ग्रेफाइट की संरचना में षट्कोणीय तल एक दूसरे के ऊपर व्यवस्थित होते हैं।इन दो विभिन्न संरचनाओं के कारण हीरे एवं ग्रेफाइट के भौतिक गणधर्म अत्यंत भिन्न होते हैं, जबकि उनके रासायनिक गुणधर्म एकसमान होते हैं। हीरा अब तक का ज्ञात सर्वाधिक कठोर पदार्थ है, जबकि ग्रेफाइट चिकना तथा फिसलनशील होता है।शुद्ध कार्बन को अत्यधिक उच्च दाब एवं ताप पर उपचारित (Subjecting) करके हीरे को संश्लेषित किया जा सकता है। ये संश्लिष्ट हीरे आकार में छोटे होते हैं, लेकिन अन्यथा ये प्राकृतिक हीरों से अभेदनीय होते हैं।
फुलेरीन कार्बन अपरूप का अन्य वर्ग है। सबसे पहले C-60 की पहचान की गई जिसमें कार्बन के परमाणु फुटबॉल के रूप में व्यवस्थित होते हैं। चूँकि यह अमेरिकी आर्किटेक्ट बकमिसटर फुलर (Buckmister Fuller) द्वारा डिजाइन किए गए जियोडेसिक गुंबद के समान लगते हैं, इसीलिए इस अणु को फुलेरीन नाम दिया गया।

26. प्रकृति में कार्बनिक यौगिकों की अत्यधिक संख्या का क्या कारण है ? उल्लेख करें।

उत्तर ⇒ प्रकृति में कार्बनिक यौगिकों की अत्यधिक संख्या का निम्न कारण हैं –

(i) कार्बन परमाणु में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है, अर्थात् कार्बन परमाणु को अपने-आप में जुड़ने का गुण होता है। कार्बन के इस गुण को शृंखलन या स्वबंधन या कैटिनीकरण कहते हैं। इस गुण के कारण कार्बन परमाणु आपस में जुड़कर सीधी लम्बी श्रृंखला, शाखायुक्तश्रृंखला एवं बंदशृंखला से जुड़े रहते हैं। जैसे –

प्रकृति में कार्बनिक यौगिकों की अत्यधिक संख्या का निम्न कारण हैं

(ii) कार्बन के परमाणु आपस में तथा दूसरे तत्व के परमाणुओं के साथ एक, द्वि अथवा त्रिबंधन से जुड़ सकते हैं। जैसे –

C-C, C = C, C ≡ C

C-N, C = N, C ≡ N

C-O, C = O

(iii) कार्बन की चतुः संयोजकता के कारण कार्बन के परमाणु कार्बन के अन्य चार परमाणुओं के साथ अथवा कुछ अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ, जैसे-हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, क्लोरीन इत्यादि सहसंयोजी आबंध द्वारा जुट सकते हैं। अन्य तत्वों के साथ कार्बन का आबंध अधि क प्रबल होता है, जिसके कारण बने यौगिक स्थायी होते हैं और आकार में छोटे होते हैं।

(iv) कार्बन के यौगिक समावयता प्रदर्शित करते हैं

1. आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा मेंडलीफ की आवर्त सारणी की विसंगतियों का निवारण कैसे किया गया है ?

उत्तर⇒ आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा मेंडलीफ की आवर्त सारणी की विसंगतियों का निवारण (farginferent ara farur (Removal of anomalies of Mendeleev’s periodic table by Modern periodic table)-आधुनिक आवर्त नियम के प्रतिपादन से मेंडलीफ की आवर्त सारणी के अधिकांश दोष दूर हो गये जबकि मेंडलीफ की आवर्त सारणी के तत्त्व आधुनिक आवर्त सारणी में ठीक उसी जगह पर हैं। जैसे कोबाल्ट (Co) का परमाणु संख्या 27 एवं निकेल (Ni) का परमाणु संख्या 28 है। इसलिए आधुनिक आवर्त सारणी में कोबाल्ट को पहले रखा गया और निकेल को बाद में रखा गया।

किसी तत्त्व के सभी समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या समान होती है इसलिए उनके परमाणु संख्या भी समान होते हैं। अतः एक तत्त्व के सभी समस्थानिकों (जैसे—क्लोरीन के समस्थानिक CI-35 और C1-37) को तत्त्व के साथ आधुनिक आवर्त सारणी के उसी समूह में एक ही स्थान पर रखा गया।

तत्त्व की परमाणु संख्या एक पूर्ण संख्या होती है, जैसे—1, 2, 3, …… इत्यादि। अतः यदि किसी तत्त्व की परमाणु संख्या पूर्णांक
जैसे—1.5, 2.5, 3.5, …… इत्यादि हो, तो उसे आधुनिक आवर्त सारणी में स्थान मिलना संभव नहीं होगा।
हाइड्रोजन (H) विद्युत धनात्मक तत्त्व है और इसके गुण क्षारीय धातुओं के समान है। अतः हाइड्रोजन को आधुनिक आवर्त सारणी में प्रथम आवर्त एवं प्रथम समूह में रखा गया है।


2. मेंडलीफ के वर्गीकरण की क्या सीमाएँ हैं ?

उत्तर⇒ (i) हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्षार धातुओं से मिलता है। क्षार धातुओं की भाँति हाइड्रोजन भी हैलोजन, ऑक्सीजन एवं सल्फर के साथ एक जैसे सूत्र वाले यौगिक बनाती है। दूसरी ओर हैलोजन की भाँति हाइड्रोजन भी द्विपरमाणुक अणु के रूप में पाई जाती है एवं धातुओं और अधातुओं के साथ यह संयोजक यौगिक बनाती है।

निश्चित रूप से आवर्त सारणी में हाइड्रोजन को नियत स्थान नहीं दिया जा सकता है। यह मेंडलीफ के आवर्त सारणी की पहली कमी थी। उन्होंने अपनी सारणी में हाइड्रोजन को उचित स्थान नहीं दे सके।

(ii) मेंडलीफ आवर्त सारणी में समस्थानिकों और नोबुल गैसों के लिए कोई स्थान नहीं दिया गया।

(iii) मेंडलीफ आवर्त सारणी में एक तत्त्व से दूसरे तत्त्व की ओर बढ़ने पर परमाणु द्रव्यमान नियमित रूप से नहीं बढ़ते। इसलिए यह अनुमान लगाना होगा कि दो तत्त्वों के बीच कितने तत्त्व खोजे जा सकते हैं। जब भारी तत्त्वों पर विचार करते हैं तो कठिनाई उत्पन्न हो जाती है।


3. आधुनिक आवर्त सारणी के उपलब्धियों को लिखें।

उत्तर⇒(i) आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु-संख्या पर आधारित है जो कि अधिक वैज्ञानिक है।
(ii) हाइड्रोजन को निश्चित स्थान प्रदान किया गया है।
(iii) प्रत्येक तत्त्व की स्थिति उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के क्रम में है।
(iv) प्रत्येक आवर्त क्षार धातु (प्रथम आवर्त को छोड़कर) से प्रारंभ होता है और अक्रिय तत्त्व से समाप्त होता है।
(v) अज्ञात तत्त्वों के लिए आवर्त सात में रिक्त स्थान छोड़ा गया है जिससे बहुत से तत्त्वों की खोज हुई है।
(vi) आधुनिक आवर्त सारणी में धातु एवं अधातु को उपधातुओं द्वारा अलग किया गया है।
(vii) आधुनिक आवर्त सारणी में सामान्य तत्त्वों, संक्रमण तत्त्वों एवं अक्रिय गैसों को स्पष्ट रूप से पृथक रखा गया है।


4. आधुनिक आवर्त सारणी एवं मेंडलीफ की आवर्त सारणी में तत्त्वों की व्यवस्था की तुलना कीजिए।

उत्तर⇒आधुनिक आवर्त सारणी में 18 ऊर्ध्व स्तंभ जिन्हें समूह कहा जाता है तथा 7 क्षैतिज कतारें हैं। मेंडलीफ आवर्त सारणी में 8 समूह और 6 क्षैतिज कतारें हैं। आधुनिक आवर्त सारणी में मेंडलीफ की आवर्त सारणी की तीनों कमियों को सुधारा गया है।
आधुनिक आवर्त सारणी तत्त्वों के परमाणु संख्या पर आधारित है, जबकि मेंडलीफ की आवर्त सारणी परमाणु द्रव्यमान पर।
आधुनिक आवर्त सारणी के समूह 1 में उपस्थित तत्त्व (H, Li, Na, K, Rb और Cs) है। इन तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर पाया जाता है कि इनकी संयोजकता इलेक्ट्रॉन की संख्या समान है अर्थात् संयोजी इलेक्ट्रॉन की संख्या 1 है।
इसी प्रकार फ्लोरीन और क्लोरीन समूह 17 के तत्त्व हैं। इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर संयोजकता इलेक्ट्रॉन की संख्या 7 है। इससे यह पता चलता है कि आधुनिक आवर्त सारणी में समूह, बाहरी कोश के सर्वसम इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को दर्शाता है। समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती जाती है। मेंडलीफ आवर्त सारणी में सोना (Au) को समूह 1 में रखा गया है जबकि आधुनिक आवर्त सारणी में इसे समूह 2 और आवर्त 6 में रखा गया है। मेंडलीफ के आवर्त सारणी में Hg को समूह 2 में और आधुनिक आवर्त सारणी में इसे समूह 12 में रखा गया है। इस प्रकार आधुनिक आवर्त सारणी में मेंडलीफ के आवर्त सारणी के विसंगतियों को सुधारा गया है।


5. न्यूलैंड्स के अष्टक सिद्धांत की सीमाएँ क्या हैं ?

उत्तर⇒(i) यह सिद्धांत केवल कैल्सियम (Cu) तक ही लागू हो सका। इसके बाद प्रत्येक आठवें तत्त्व का गुणधर्म पहले तत्त्व से नहीं मिलता है।

(ii)यह केवल हल्के तत्त्वों के लिए ही ठीक से लागू नहीं हो सका।

(iii) यह अधिक परमाणु द्रव्यमान वाले तत्त्वों पर लागू नहीं हो सका।

(iv)तत्त्वों को समंजिल करने के लिए दो-दो तत्त्वों को एक साथ रखा।
जैसे-Co तथा Ni, Ce तथा La

(v)कुछ असमान तत्त्वों को एक स्थान में रखा। जैसे—Co तथा Ni को F, CI तथा Br के साथ रखा जबकि इनके गुणधर्म CO तथा Ni से भिन्न है। Fe को Co तथा Ni से अलग रखा जबकि उनके गुणधर्मों में समानता है।

(vi)निष्क्रिय गैस का आविष्कार हो जाने पर आठवें तत्त्व के बदले नवम् तत्त्व प्रथम तत्त्व के समान गुण वाला होने लगा।

(vii)न्यूलैंड्स ने माना कि प्रकृति में केवल 56 तत्त्व विद्यमान हैं, अन्य तत्त्वों का भविष्य में भी आविष्कार संभव नहीं है। लेकिन बाद में कई नए तत्त्व पाए गए जिनके गुणधर्म, अष्टक सिद्धांत से मेल नहीं खाते थे।


6. निष्क्रिय गैसीय तत्त्वों को आवर्त सारणी के शून्य वर्ग में क्यों रखा गया है ?

उत्तर⇒इस परिवार के सदस्यों को शून्य वर्ग में रखा गया है। क्योंकि ये सभी सदस्य O संयोजकता प्रस्तुत करते हैं। इसका अर्थ यह है कि ये अन्य तत्त्वों के साथ संयोजित होने की प्रवृत्ति नहीं रखते। हीलियम की संयोजकता शेल (केवल एक ही शेल) में केवल 2 इलेक्ट्रॉन हैं। अन्य परिवार के सदस्यों की संयोजकता शेल में आठ-आठ इलेक्ट्रॉन होते हैं। संयोजकता (8-संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या) के बराबर होती है। इसलिए ये शून्य संयोजकता प्रस्तुत करते हैं।


7. आधुनिक आवर्त सारणी एवं मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में तत्त्वों की व्यवस्था की तुलना कीजिए।अथवा, मेंडेलीफ के आवर्त सारणी और आधुनिक आवर्त सारणी में क्या अन्तर है ?
उत्तर⇒

मेण्डलीफ की आवर्त सारणीआधुनिक आवर्त सारणी
(i) तत्त्वों को बढ़ते परमाणु द्रव्यमानों में व्यवस्थित किया गया है।(i) तत्त्वों को बढ़ते परमाणु क्रमांक में व्यवस्थित किया गया है।
(ii) इस आवर्त सारणी में ऊर्ध्वाधर स्तंभ केवल 8 हैं जो कि वर्ग कहलाते हैं(ii) इस आवर्त सारणी 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभ है जो कि वर्ग कहलाते हैं।
(iii) सभी संक्रमण तत्त्वों को एक ही स्थान पर वर्ग VIII में रखा तत्त्व रखे गए हैं।(iii) वर्ग 3 से वर्ग 12 में संक्रमण तत्व रखे गये है ।
(iv) मेण्डेलीफ के साथ उत्कृष्ट गैसों की खोज ही नहीं हुई थी(iv) आधुनिक आवर्त सारणी में उत्कृष्ट गैसों को वर्ग 18 में व्यवस्थित किया गया है।
(v) तत्त्वों के समस्थानिकों को उचित स्थान नहीं मिला है।(v) तत्त्वों के समस्थानिकों को उनके संगत तत्त्वों के स्थान पर ही रखा गया है क्योंकि उनके परमाणु क्रमांक समान होते हैं।
(vi) रासायनिक रूप से असमान तत्त्वों को एक साथ रखे गए हैं।(vi)रासायनिक रूप से असमान तत्त्वों को पृथक्-पृथक् वर्गों में रखा गया है।
(vii) कुछ स्थानों पर उन तत्त्वों को जिनका परमाणु द्रव्यमान उच्च है, उन तत्त्वों से पहले रखा गया है।(vii) इसमें वर्गीकरण का आधार परमाणु क्रमांक है। इस प्रकार मैण्डेलीफ में वर्णित प्रतिलोम जिन तत्त्वों का परमाणु द्रव्यमान क्रम सम्बन्धी दोष को दूर कर निम्न है।

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